
सुनील सिंह सिसोसिया/जयपुर. राज्य में कानूनी दावपेंच में फंसी बजरी का संकट लोगों को अभी 2 साल और झेलना पड़ेगा। राज्य में पहले की गई लीजों में से 8 को छोड़ सभी को निरस्त किया जा चुका है। शेष 8 लीज की अवधि भी दिसंबर-जनवरी में खत्म हो जाएगी। ऐसे में अब बजरी की खानों की पुन: नीलामी करने के बाद करीब डेढ़ से दो साल तक बजरी खनन का काम और नहीं हो सकेगा। उधर, बजरी पर लगी रोक से राज्य सरकार को हर माह 100 करोड़ से ज्यादा का राजस्व घाटा हो रहा है। जबकि जनता अवैध खनन कर लाई जा रही बजरी को ऊंचे दामों पर खरीदकर लुट रही है।
यह खेल करीब 9 माह से चल रहा है। खनन पर सुप्रीम कोर्ट ने यह कहते हुए रोक लगा रखी है कि पहले नदियों में बजरी आने व निकासी को लेकर विस्तृत रिपोर्ट दी जाए। सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्रीय पर्यावरण मंत्रालय से नदियों में बारिश में आने वाली बजरी व निकासी सहित अन्य बिंदुओं को लेकर रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट कोर्ट में पेश नहीं की जा सकी है। इससे बजरी खनन राज्य में पूरा बंद है। चुनावी वर्ष होने से खान एवं भू-विज्ञान विभाग व प्रशासन ने बजरी खनन को एक तरह से खुली छूट दे रखी है।
छोड़ दी राहत की उम्मीद
सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल तीन-चार माह कोई राहत मिलने की उम्मीद अब खान विभाग के अधिकारियों ने भी छोड़ दी है। ऐसे में पुरानी बची 8 खानों की अवधि भी खत्म हो जाएगी। इसके बाद जनवरी-फरवरी में खानों की नीलामी भी की जाती है, तो भी नीलामी के बाद खान संचालकों को केन्द्रीय पर्यावरण मंत्रालय में या फिर छोटी खानों के लिए राज्य सरकार के स्तर पर पर्यावरण अनापत्ति प्रमाण पत्र के लिए आवेदन करना होगा। इससे पहले मानसून से पहले की और उसके बाद की अलग-अलग रिपोर्ट देनी होंगी। फिर केन्द्रीय पर्यावरण मंत्रालय से एनओसी में डेढ़ साल का समय लगने के चलते बजरी खनन 2 साल बाद 2020 के अंत में ही चालू हो सकेगा।
बड़े ट्रक का खर्चा 20 से 25 हजार
खान विभाग के सूत्रों के मुताबिक जयपुर में बजरी 70 से 100 रुपए फीट तक बिक रही है। यह दर शहर में जगह के हिसाब से है। ऐसे में एक बड़े ट्रक को जयपुर तक अवैध तरीके से बजरी लाने के लिए 20 से 25 हजार रुपए सेवा पर खर्च करने पड़े रहे हैं। बनास से पहले जहां 3 हजार ट्रक रोजाना जयपुर पहुंचते थे, आज 800 से 1000 पहुंच रहे हैं। इसकी बानगी हर क्षेत्र में चल रहे निर्माण कार्यों से देखी जा सकती है। जहां बनास की बजरी उपयोग में ली जा रही है। अवैध खनन करने वाले इत्मीनान से बजरी की ट्राली और ट्रक लेकर शहर के बीच खड़े होकर उसे मनचाही दरों पर बेच रहे हैं।
क्यों बिगड़ रहे हालात
बजरी के अवैध खनन के खेल में जनता के करोड़ों रुपए रोजाना अधिकारियों की जेब में जा रहे हैं। यही कारण है कि सुप्रीम कोर्ट की रोक के बावजूद राजधानी ही नहीं हर जगह बनास नदी की बजरी आसानी से उपलब्ध है। विभाग का कहना है कि यदि पुलिस सक्रियता से कार्रवाई करें खनन नहीं हो सकता।