बोले-राजस्थान का कोई विधायक बिकाऊ नहीं
जयुपर. प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने कहा, मुख्यमंत्री आरोप लगा रहे हैं कि विधायकों को 35-35 करोड़ रुपए में खरीदने की कोशिश हो रही है। भाजपा के एक कार्यकर्ता ने मुझसे कहा कि खरीदना ही चाहते तो 35 करोड़ में तो पूरी कांग्रेस को खरीद लेते। राजस्थान का कोई विधायक बिकाऊ नहीं है। पूनिया ने रैली में कहा कि उनके पास एक कार्यकर्ता का फोन आया कि वर्चुअल के लिए अंतरिक्ष में जाना पड़ेगा क्या? उन्होंने कहा इसी हॉल में पैर रखने की जगह नहीं होती थी। उन्होंने राजस्थान सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि 70 दिन में पूरी सरकार से बाहर कोई नहीं निकला। अब पूरी सरकार बाड़ाबंदी में है। अपने नेताओं की नारेबाजी के अलावा कमेंट भॢतयों सहित अपनी समस्याओं को लेकर भी नजर आए। रैली को केन्द्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल, गजेन्द्र सिंह शेखावत और गुलाबचंद कटारिया, राजेन्द्र राठौड़ ने भी संबोधित किया।
रैली नहीं नजर आई पूर्व मुख्यमंत्री
पूरी रैली में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे नजर नहीं आई। वे भाजपा कार्यालय में बनाए गए मंच पर भी मौजूद नहीं थी। उनकी गैर मौजूदगी चर्चा का विषय बनी रही।
पहली वर्चुअल रैली के वर्चुअल नजारे
केन्द्र की मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल की पहली वर्षगांठ पर भाजपा की राजस्थान के लिए पहली वर्चुअल जनसंवाद रैली में रोचक नजारे सामने आए। सोशल मीडिया के कमेंट बॉक्स में नेताओं के समर्थकों में शक्ति परीक्षण की होड़ नजर आई। आमतौर पर इस तरह की रैली में भीड़ के समूह में समर्थक नारेबाजी करते हैं, लेकिन इस पहली वर्चुअल रैली में शक्ति परीक्षण में कमेंट बॉक्स में ही जमकर नारेबाजी की गई। नेताओं के समर्थकों ने कमेंट बॉक्स में अपने नेता के समर्थन में जिंदाबाद के नारे लगाकर उनकी उपस्थिति को दर्शाने की कोशिश की।
बूथवार लोगों को जोडऩे का दिया था लक्ष्य
इस रैली में शक्ति परीक्षण का बड़ा कारण आने वाले दिनों में प्रदेश कार्यकारीणी सहित जिलों की कार्यकारिणी का लंबित होना भी रहा। वहीं, भाजपा ने बूथवार लक्ष्य भी दिए थे, जिसमें बूथवार कम से कम 50-50 लोगों को रैली से जोडऩे का लक्ष्य रखा गया था। ऐसे में अपने लक्ष्य को पूरा दिखाने के लिए भी समर्थकों में होड़ नजर आई। प्रदेश भाजपा कार्यालय में रैली के लिए सभागार में मंच बनाया गया था। राजस्थान के नेताओं ने वहीं से रैली को संबोधित किया, वहीं सभागार में सीमित संख्या में कार्यकर्ताओं व नेताओं के लिए बैठने की व्यवस्था भी की गई थी। इसमें जयपुर शहर के ज्यादा नेता, विधायक व पदाधिकारी मौजूद रहे।