Jaipur air quality report: जयपुर में वायु प्रदूषण रोकने के लिए 344 करोड़ रुपए से अधिक खर्च कर दिए गए, इसके बाद भी शहर की आबोहवा लोगों की सेहत के लिए खतरा बनी हुई है।
Jaipur air quality report: जयपुर में वायु प्रदूषण रोकने के लिए 344 करोड़ रुपए से अधिक खर्च कर दिए गए, इसके बाद भी शहर की आबोहवा लोगों की सेहत के लिए खतरा बनी हुई है। केंद्र सरकार ने 15वें वित्त आयोग के तहत नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (एनकैप) में जयपुर नगर निगम को 344.70 करोड़ रुपए दिए।
निगम अधिकारियों के अनुसार, एनकैप का जो बजट मिला था, वह पूरा खर्च हो गया है। निगम ने सड़क निर्माण व गड्ढे भरने में ही 290.48 करोड़ रुपए खर्च कर दिए, जो इस बजट का 84 प्रतिशत से अधिक है। वहीं, वायु प्रदूषण रोकने के कारगर उपाय भी नहीं हो पाए। जो मशीनें खरीदी गईं, उनका भी पूरी तरह उपयोग नहीं हो पाया।
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नतीजा, शहर की हवा में पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) 2.5 और पीएम 10 का स्तर क्रमशः 300 से 500 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंच रहा है, जो केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के तय मानक 100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से 3 से 5 गुना अधिक है। हवा सांस लेने लायक भी नहीं है। इससे फेफड़ों में 'जहर' पहुंच रहा है।
| वर्ष | राशि (करोड़ रुपए में) |
|---|---|
| 2019-20 | 06 |
| 2020-21 | 165 |
| 2021-22 | 90.35 |
| 2022-23 | 64.05 |
| 2023-24 | 18.85 |
| वर्ष | राशि (करोड़ रुपए में) |
|---|---|
| 2020-21 | 2.3 |
| 2021-22 | 7.87 |
| 2022-23 | 143.85 |
| 2023-24 | 155.99 |
| 2024-25 | 34.69 |
वायु गुणवत्ता में सुधार नहीं होने से जयपुर नगर निगम को वर्ष 2025-26 में एनकैप का बजट नहीं मिल पाया है।
हवा में पीएम 10 का स्तर सालाना औसत से ढाई गुना ज्यादा है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निर्धारित मानक 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर हैं, जबकि पिछले तीन सालों में जयपुर में पीएम 10 का स्तर 140 से 150 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा।
| मद | खर्च (करोड़ रुपए में) |
|---|---|
| सड़क निर्माण व पेचवर्क | 290.48 |
| पैदल यात्री अवसंरचना का निर्माण | 3.80 |
| ग्रीन स्पेस का विकास | 30.7 |
| रोड स्वीपिंग मशीन | 1.6 |
| एंटी स्मॉग गन से छिड़काव | 0.84 |
| जन जागरूकता गतिविधियां | 1.12 |
| कचरा कंपोस्टर (श्रेडर मशीन) | 3.37 |
| ठोस कचरा संग्रहण के लिए वाहन | 6.41 |
| लाल डूंगरी में ट्रांसफर स्टेशन के लिए दीवार निर्माण | 0.38 |
| अन्य काम | 6 |
(औसत पीएम — माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर)
| वर्ष | पीएम 10 |
|---|---|
| 2019-20 | 124 |
| 2020-21 | 112 |
| 2021-22 | 126 |
| 2022-23 | 143 |
| 2023-24 | 148 |
| 2024-25 | 143 |
(माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर)
| क्षेत्र | पीएम 2.5 | पीएम 10 |
|---|---|---|
| मानसरोवर | 357 | 500 |
| सीतापुरा | 389 | 463 |
| एमआइ रोड | 309 | 251 |
| क्षेत्र | पीएम 2.5 | पीएम 10 |
|---|---|---|
| मानसरोवर | 316 | 466 |
| सीतापुरा | 382 | 410 |
| एमआइ रोड | 259 | 225 |
| आदर्श नगर | 288 | 175 |
शहर में प्रदूषण बढ़ने के लिए सड़कों पर उड़ रही धूल मुख्य कारण है। इसके लिए जेडीए और नगर निगम जिम्मेदार हैं। प्रदूषण कम करने के लिए हम भी नियमानुसार कार्रवाई कर रहे हैं।
- कपिल चंद्रावल, सदस्य सचिव, प्रदूषण नियंत्रण मंडल
प्रदूषण बढ़ने से हवा में माइक्रो अल्ट्रा फाइन पार्टिकल की मात्रा भी बढ़ जाती है, जो फेफड़ों तक पहुंच जाते हैं। इससे हृदयघात व कैंसर जैसी बीमारियां होने की आशंका बनी रहती है। पीएम 10 का स्तर बढ़ना चिंताजनक है।
- डॉ. वीरेन्द्र सिंह, अस्थमा रोग विशेषज्ञ