
जयपुर। नीरजा मोदी स्कूल में नौ वर्षीय छात्रा अमायरा की संदिग्ध मौत के करीब आठ महीने बाद पुलिस द्वारा न्यायालय में चार्जशीट पेश किए जाने के बाद परिजनों और संयुक्त अभिभावक संघ ने सभी जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठाई। जयपुर के पिंकसिटी प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में अमायरा के पिता विजय मीणा, माता शिवानी, संयुक्त अभिभावक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अरविंद अग्रवाल और प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन 'बिट्टू' ने कहा कि मामले में स्कूल प्रबंधन, प्रिंसिपल और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय कर उनकी गिरफ्तारी की जाए। साथ ही एबेटमेंट (उकसावे) से जुड़ी धाराएं और जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की धारा-75 सहित अन्य प्रासंगिक प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाए।
अमायरा के पिता ने कहा कि चार्जशीट न्याय की दिशा में पहला कदम है, लेकिन दोषियों को सजा मिलने तक न्याय अधूरा रहेगा। वहीं, माता शिवानी ने आरोप लगाया कि बच्ची द्वारा दिए गए मदद के संकेतों को स्कूल प्रशासन ने गंभीरता से नहीं लिया। अभिभावक संघ ने निजी विद्यालयों में एंटी-बुलिंग सिस्टम, प्रशिक्षित काउंसलर, सीसीटीवी निगरानी और बाल सुरक्षा मानकों को कानूनी रूप से अनिवार्य बनाने की मांग करते हुए सरकार, न्यायपालिका और प्रशासन से निष्पक्ष कार्रवाई की अपील की।
वहीं, अमारया की मां शिवानी ने कहा कि हम पुलिस की जांच से असंतुष्ट हैं, पुलिस ने बहुत प्रताड़ित किया। तरह-तरह के सवाल पूछे। नीरजा मोदी वाले बड़े लोग हैं, जहां हम जाते हैं उससे पहले इनके पैसे पहुंच जाते हैं। माता-पिता ने मीडिया के सामने घटना के दिन का एक वीडियो जारी किया जिसमें अमायरा की मौत से पहले का पूरा घटनाक्रम रिकॉर्ड है।
जयपुर के मानसरोवर इलाके की रहने वाली चौथी क्लास की छात्रा अमायरा ने पिछले साल 1 नवंबर को नीरजा मोदी स्कूल बिल्डिंग की चौथी मंजिल से कूदकर जान दे दी थी। इस दर्दनाक घटना का लाइव सीसीटीवी वीडियो भी सामने आया था, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। परिजनों का आरोप था कि उनकी बेटी अमायरा को स्कूल के कुछ बच्चे लगातार परेशान करते थे। इस बारे में क्लास टीचर से कई बार शिकायत भी की गई थी, लेकिन स्कूल प्रशासन ने कोई ध्यान नहीं दिया। इसी प्रताड़ना और अनदेखी से दुखी होकर बेटी ने ऐसा कदम उठाया था। परिजनों का यह भी आरोप है कि जहां बच्ची गिरी, वहां से खून के धब्बे को स्कूल प्रशासन ने साफ करवा दिए थे। घटना के बाद मौके से सबूत सुरक्षित रखना कानूनन जरूरी होता है, लेकिन स्कूल प्रशासन ने सबूत मिटा दिए थे।