जयपुर

विश्वधरोहर में शामिल हुए ‘जयपुर‘ का रक्षा कवच है कंगूरेदार परकोटा, ये सात दरवाजे सुंदरता में लगाते हैं चारचांद

Jaipur gets UNESCO World Heritage Tag : वास्तु व ज्योतिष के सिद्धांत पर नव गृहों की कल्पना के आधार पर नौ वर्ग मील में बना परकोटा मास्को में क्रेमलिन की दीवारों जैसा है। बिशप हेपर ने गुलाबी नगर के रक्षा कवच और इस ऐतिहासिक कंगूरेदार परकोटे की तुलना मास्को में क्रेमलिन की दीवारों से करते हुए बहुत सुंदर बताया था...
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Jul 07, 2019
Old Jaipur

जयपुर/जितेन्द्र सिंह शेखावत। वास्तु व ज्योतिष के सिद्धांत पर नव गृहों की कल्पना के आधार पर नौ वर्ग मील में बना परकोटा मास्को में क्रेमलिन की दीवारों जैसा है। कभी जयपुर ( UNESCO World Heritage Tag" target="_blank">Jaipur gets UNESCO world heritage Tag ) आए बिशप हेपर ने गुलाबी नगर के रक्षा कवच और इस ऐतिहासिक कंगूरेदार परकोटे की तुलना मास्को में क्रेमलिन की दीवारों से करते हुए बहुत सुंदर बताया था।

18 नवम्बर 1727 को जयपुर की नींव रखने के बाद वास्तुविद् विद्याधर की योजना के अनुरूप पहाड़ के बजाय जमीन पर बने राजमहल सिटी पैलेस और प्रजा की दुश्मनों से रक्षा के लिए परकोटे का निर्माण कराया गया। परकोटे पर सैनिक घुड़सवार संगीनों के साथ रात दिन पहरा देते थे। परकोटे में बुर्ज बनाई गईं, जहां पर सैनिक छावनी कायम की गई। बड़ी बुर्ज व बड़ी व छोटी बुर्जियों पर छोटी तोपें रहती थी। बुर्ज के बीच में तोप को चारों तरफ घुमाने के लिए गोलाकर चबूतरे बनाए गए। दुश्मन पर गोलीबारी करने के लिए बने मोर्चों के मोखे बनाए गए, जिनमें बंदूक डालकर दुश्मन पर वार किया जाता। सवाई राम सिंह द्वितीय ने रेजीडेंट सर्जन डॉ.टी.एच.हैंडले के सुझाव पर सफेद रंग के परकोटे पर गुलाबी रंग करवाया। बाहर से आने वालों को चूने पत्थर से बना यह परकोटा गुलाबी पत्थर से बनी दीवार जैसा दिखाई देता है।

वर्ष 1872 से 1874 व 1942 से 1943 के बीच रियासत के प्रधानमंत्री सर मिर्जा इस्माइल ने सार्वजनिक निर्माण विभाग के माध्यम से परकोटे का सुधार कराया। चारों तरफ बने परकोटे के अलावा चौकड़ी सरहद में बने राजमहलों की सुरक्षा के लिहाज से दूसरा परकोटा बनाकर दोहरी सुरक्षा व्यवस्था को अंजाम दिया गया।

परकोटे में सप्त ऋषि नक्षत्र मंडल और सूर्य भगवान के रथ में चलने वाले सात घोड़ों की तर्ज पर सात दरवाजे बनाए गए। अन्दर के परकोटे में हीदा मीणा की मोरी व श्रीजी की मोरी के नाम से छोटे दरवाजे मोरी के नाम से मशहूर हैं। सूर्य ग्रह के सामने सूरजपोल और चन्द्र के सामने चांदपोल दरवाजा बना। धु्रव तारे के सामने धु्रवपोल बना, जो जोरावर सिंह दरवाजे के नाम से जाना जाता है।
गंगा की स्मृति में गंगापोल, अजमेरी गेट पर कृष्ण के नाम पर किशनपोल व इसके आगे सांगानेरी गेट का नाम रामपोल और घाटगेट का नाम शिवपोल है। सर मिर्जा इस्माइल ने चौड़ा रास्ता के परकोटे को तोडकऱ न्यूगेट के नाम से आठवां दरवाजा बनवाया। इस का शहर के वास्तुविदों और विद्वानों ने विरोध भी किया था।

Published on:
07 Jul 2019 07:29 am