जयपुर

Jaipur: सरकार ने संवारने की बजाय करोड़ों की जमीन कौड़ियों में दी…ऐतिहासिक स्थान की भी अनदेखी

Mansagar Lake controversy: जयपुर की शान और पर्यटन की पहचान मानसागर (जलमहल) झील के आसपास भूमि आवंटन और विकास कार्यों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
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Feb 24, 2026
जलमहल झील का विहंगम दृश्य, पत्रिका फोटो
जलमहल झील का विहंगम दृश्य, पत्रिका फोटो

Mansagar Lake controversy: जयपुर की शान और पर्यटन की पहचान मानसागर (जलमहल) झील के आसपास भूमि आवंटन और विकास कार्यों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इनकी वजह से न सिर्फ पानी की आवक प्रभावित हो रही है, बल्कि झील का दायरा भी सीमित कर दिया गया है। इतना ही नहीं, सरकार ने झील से सटी जमीन को कौड़ियों के भाव दे दिया।

इस क्षेत्र की ऐतिहासिक और पर्यावरणीय संवेदनशीलता की अनदेखी की गई, जिसका असर सीधे तौर पर मानसागर झील की सेहत पर दिखाई देने लगा है। गंदा पानी और किनारों पर फैली गंदगी बदहाली बताने के लिए काफी है। कभी-कभार नगर निगम रस्म अदायगी के तौर पर सफाई अभियान चला देता है।

पर्यावरणीय संतुलन से समझौता

विशेषज्ञों का कहना है कि झील क्षेत्र वेटलैंड इकोसिस्टम का हिस्सा है, जहां किसी भी प्रकार का निर्माण या व्यावसायिक गतिविधि पर्यावरणीय संतुलन को प्रभावित कर सकती है। बीते वर्षों में आसपास हुए विकास कार्यों, अव्यवस्थित निर्माण और बढ़ते मानवीय दबाव ने झील की प्राकृतिक संरचना पर असर डाला है। जलभराव क्षेत्र सिमट गया है और प्रदूषण का स्तर बढ़ गया है।

ऐतिहासिक महत्व की अनदेखी

जलमहल न केवल पर्यटन स्थल है, बल्कि जयपुर की स्थापत्य विरासत का अहम हिस्सा भी है। इतिहासकारों का मानना है कि इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का विकास कार्य अत्यंत सावधानी और दीर्घकालिक दृष्टि से होना चाहिए।

ऐसे चला जमीन को खुर्द-बुर्द करने का खेल

-अगस्त 2004 में नगर निगम के तत्कालीन सीईओ भास्कर ए. सावंत ने झील से सटी निगम की जमीन को बिना किसी प्रस्ताव के आरटीडीसी को हस्तांतरित कर दी। उस समय इस जमीन की कीमत ढाई हजार करोड़ रुपए आंकी गई थी, जबकि सरकार ने इसे चहेतों को मात्र ढाई करोड़ रुपए सालाना लीज पर दे दिया।

एनजीटी की फटकार का भी असर नहीं

पर्यावरणीय मुद्दों पर दायर याचिकाओं की सुनवाई के दौरान एनजीटी ने नगर निगम को फटकार लगाई थी। झील क्षेत्र में पर्यावरण मानकों के पालन और जवाबदेही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि, निगम ने इस पर कोई ठोस काम नहीं किया।

समिति अध्यक्ष का बयान…

मानसागर झील जयपुर के जल-संतुलन और पर्यटन अर्थव्यवस्था दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। यदि अनियंत्रित विकास जारी रहा तो आने वाले वर्षों में इसके गंभीर दुष्परिणाम सामने आ सकते हैं। जिम्मेदार एजेंसियां केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रहीं तो झील इतिहास बनकर रह जाएगी।
-राजेंद्र तिवाड़ी, अध्यक्ष, नाहरगढ़ वन एवं वन्यजीव सुरक्षा एवं सेवा समिति

Updated on:
24 Feb 2026 11:58 pm
Published on:
24 Feb 2026 11:58 pm