
जयपुर. नगर निगम चुनाव में मतदान खत्म होने के साथ ही अब सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि किस पार्टी को कितने वोट मिले, बल्कि यह है कि किसके पक्ष में बढ़ा हुआ मतदान गया और किसके वोटर घर से बाहर निकले। 150 वार्डों के आंकड़ों की विधानसभावार पड़ताल बताती है कि जयपुर में इस बार किसी एक दल के लिए बहुमत की राह आसान नहीं है। बढ़े हुए मतदान प्रतिशत के बाद शुरुआती आंकलन में भाजपा करीब 70, कांग्रेस 60 और निर्दलीय, बागी 20 वार्डों में निर्णायक स्थिति बना सकते हैं। यह मतदान पैटर्न और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों पर आधारित अनुमान है।
जयपुर नगर निगम में बहुमत का आंकड़ा 76 है। ऐसे में यदि भाजपा और कांग्रेस दोनों बहुमत से नीचे रह जाती हैं तो निर्दलीय और बागी पार्षद मेयर चुनाव में असली किंग मेकर बन सकते हैं। शहर में इस बार दोनों ही दलों के करीब 30 मजबूत बागी निर्दलीय के तौर पर मैदान में हैं। भाजपा 26 बागियों को पार्टी से निष्काषित भी कर चुकी है। बागी और निर्दलीय कई वार्डों में भाजपा-कांग्रेस दोनों के अधिकृत प्रत्याशियों के वोट काट रहे हैं।
त्रिकोणीय मुकाबले में बागी 8-10 प्रतिशत वोट भी काटते हैं तो कम अंतर वाली सीटों का पूरा समीकरण बदल सकता है। कांग्रेस के लिए सबसे महत्वपूर्ण संकेत आदर्श नगर, हवामहल और किशनपोल से आए हैं। आदर्श नगर में 17 में 16 वार्ड 60% से अधिक है। किशनपोल के 12 वार्ड 60% से ऊपर हैं। हवामहल में भी करीब करीब ऐसे ही समीकरण बन रहे हैं।
| निगम | कांग्रेस | भाजपा | निर्दलीय | कुल वार्ड |
|---|---|---|---|---|
| हेरिटेज निगम | 47 | 42 | 11 | 100 |
| ग्रेटर निगम | 48 | 79 | 13 | 150 |
गत निगम चुनाव में यहां 42 वार्ड में से 25 पर भाजपा, 15 कांग्रेस और 2 पर निर्दलीय ने जीत दर्ज की थी। इस बार 22 में से 17 वार्ड का मतदान 60% से अधिक रहा। यह परंपरागत तौर पर भाजपा के वर्चस्व वाला इलाका है। यहां भाजपा का पारंपरिक वोटर बड़ी संख्या में निकला है तो पार्टी को फायदा मिल सकता है। लेकिन यहां इस बार बागी निर्दलीयों ने पार्टी की नींद उड़ा रखी है। पार्षद प्रत्याशियों की किलेबंदी में इस क्षेत्र के प्रत्याशियों को अलग रिसोर्ट में ठहराया गया है। विधानसभा में यहां से कांग्रेस कभी नहीं जीती। गत चुनाव में उपमुख्यमंत्री दियाकुमारी ने यहां से बड़ी जीत दर्ज की थी।
गत चुनाव में यहां 25 वार्ड में से 13 कांग्रेस, 10 भाजपा और 2 निर्दलीयों ने जीते थे। इस बार अल्पसंख्यक आबादी वाले इस इलाके में अच्छा मतदान हुआ है। हालांकि विधानसभा में यहां से मामूली अंतर से ही जीत हार होती आई है। इस क्षेत्र में इस बार बराबरी का मुकाबला रहने और हार-जीत का अंतर एक दो वार्ड में ही रहने की संभावना है। अभी यहां से कांग्रेस के रफीक खान विधायक हैं।
गत चुनाव में यहां 26 में से 12 भाजपा, 10 कांग्रेस और 4 वार्ड अन्य ने जीते थे। इस बार यहां 13 वार्ड 60 प्रतिशत से अधिक मतदान वाले हैं। यहां भाजपा विधायक बालमुकुंदाचार्य मामूली हैं। अल्पसंख्यक इलाके में कांग्रेस की आगे रहने की संभावना है।
गत चुनाव में यहां 21 वार्ड में से 9 कांग्रेस, 8 भाजपा और 4 पर अन्य जीते थे। इस बार यहां 12 वार्ड में 60 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ है। इस बार यहां बराबरी का मुकाबला रहने की संभावना है। यहां कांग्रेस से अमीन कागजी विधायक हैं।
गत चुनाव में यहां 26 में से 16 वार्ड भाजपा, 8 कांग्रेस और 2 पर निर्दलीयों ने जीते थे। पारंपरिक तौर पर भाजपा के मजबूत क्षेत्र में गत निगम चुनाव में भाजपा को यहां कांग्रेस से दोगुनी सफलता मिली थी। लेकिन इस बार यहां कम वोटिंग भाजपा की राह कुछ खराब कर सकती है। यहां से भाजपा को ही अच्छी बढ़त मिलने की पूरी संभावना है। भाजपा के कालीचरण सराफ लगातार विधायक चुने जाते रहे हैं।
गत चुनाव में 39 वार्ड में से 22 भाजपा, 15 कांग्रेस और 2 निर्दलीय ने जीते थे। भाजपा यहां सभी बड़े चुनाव बड़े अंतर से जीतती रही है। लेकिन पार्षदी के चुनाव में गत बार भी यहां से कांग्रेस फाइट में रही थी। इस बार पूरे जयपुर में यही इलाका है, जहां गत चुनाव से कम वोटिंग हुई है। इस फैक्टर ने भाजपाइयों की नींद उड़ाई हुई है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा यहां से विधायक हैं।
गत चुनाव में 24 वार्ड में से कांग्रेस 13, 10 भाजपा और अन्य ने 1 जीता था। इस बार यहां 7 वार्ड में ही बंपर वोटिंग हुई है। इस क्षेत्र में गत चुनाव में कांग्रेस को बढ़त थी। विधानसभा में एक बार कांग्रेस तो एक बार भाजपा का वर्चस्व रहता आया है। यह इलाका इस बार भाजपा के लिए मुसीबत भरा नजर आ रहा है। यहां इस बार कांग्रेस भाजपा पर भारी पड़ सकती है। अभी गोपाल शर्मा भाजपा विधायक हैं।
गत चुनाव में 4 वार्ड में से 2 पर भाजपा और 2 में कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी। इस बार सभी वार्ड में मतदान प्रतिशत अच्छा रहा है। विधानसभा में भाजपा के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया यहां से चुनाव हार गए थे। इस बार भी यहां बराबरी का मुकाबला रह सकता है।
गत चुनाव में 21 वार्ड में से 10 कांग्रेस, 9 भाजपा अन्य ने 2 जीते थे। इस बार यहां 5 वार्ड में ही 60 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ है। यह कभी एक पार्टी के वर्चस्व वाला इलाका नहीं रहा। अभी भाजपा के कैलाश वर्मा विधायक हैं। अधिकांश वार्ड में मतदान कम रहने से यहां से कांग्रेस इस बार फायदे में रह सकती है।
गत निगम चुनाव में 22 वार्ड में से 15 भाजपा, 4 कांग्रेस और 3 निर्दलीय ने जीते थे। इस बार 15 में से 12 वार्ड में 60 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ है। विधानसभा में यहां कभी कांग्रेस तो कभी भाजपा का दबदबा रहता आया है। कैबिनेट मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ विधायक हैं। इस क्षेत्र में भी भाजपा के लिये निर्दलीय-बागी कई वार्ड में मुसीबत बने हुए हैं। इनकी वोट कटिंग से भाजपा कुछ नुकसान में रह सकती है।
सांगानेर, मालवीय नगर और सिविल लाइंस में कई वार्डों में मतदान 50-60 प्रतिशत के बीच रहा। कम मतदान में अक्सर मजबूत संगठन और पक्का वोट बैंक ज्यादा प्रभावी होता है। इसलिए ऐसे वार्डों में कम मतदान किसी एक दल के खिलाफ स्वतः संकेत नहीं है। उलटे, यदि किसी दल का कोर वोटर ज्यादा अनुपात में बाहर निकला तो वह कम मतदान में भी सीट निकाल सकता है।