
Jaipur Nagar Nigam Election: करीब आठ महीने से महापौर विहीन चल रहे जयपुर नगर निगम में अब फिर से लोकतांत्रिक हलचल लौटने वाली है। राज्य निर्वाचन आयोग और राज्य सरकार की ओर से संभावित चुनाव कार्यक्रम हाईकोर्ट में पेश होने के साथ ही राजधानी की स्थानीय राजनीति ने रफ्तार पकड़ ली है। संभावित कार्यक्रम के अनुसार 19 सितंबर को जयपुर को नया महापौर मिलेगा, जबकि 20 सितंबर को उप महापौर का चुनाव होगा। इससे पहले 150 वार्डों के लिए पार्षदों का चुनाव कराया जाएगा और 11 सितंबर को मतगणना होगी। पूरी चुनाव प्रक्रिया की शुरुआत 22 अगस्त को लोक सूचना जारी होने के साथ हो जाएगी।
तय कार्यक्रम के अनुसार चुनाव होते हैं तो जयपुर नगर निगम को 253 दिन बाद महापौर मिलेगा। वहीं वर्तमान तारीख से देखें तो 61 दिन बाद शहर के प्रथम नागरिक के रूप में नया चेहरा जिम्मेदारी संभालेगा। चुनाव की घोषणा के साथ ही राजनीतिक दलों और दावेदारों ने वार्डों में सक्रियता बढ़ाएंगे। भाजपा और कांग्रेस सहित अन्य दलों में टिकट के दावेदारों की दौड़ तेज होने की संभावना है। सामाजिक समीकरण, वार्ड परिसीमन और नए क्षेत्रों के जुड़ने से इस बार मुकाबला पहले की तुलना में अधिक दिलचस्प माना जा रहा है।
नए नगर निगम का स्वरूप भी बदला हुआ है। अब निगम क्षेत्र 13 जोन और 10 विधानसभा क्षेत्रों में विभाजित है। सीमा विस्तार के बाद हवामहल और आमेर विधानसभा को मिलाकर नया हवामहल-आमेर जोन बना है। सबसे अधिक 22 वार्ड विद्याधर नगर और मुरलीपुरा जोन में हैं। सांगानेर-मानसरोवर में 21, आदर्श नगर में 17, सिविल लाइंस में 16, मालवीय नगर और हवामहल-आमेर में 15-15 और किशनपोल में 12 वार्ड शामिल हैं।
इस बार का नगर निगम बोर्ड पिछले कार्यकाल से पूरी तरह अलग होगा। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने जयपुर को दो नगर निगम-ग्रेटर और हैरिटेज में विभाजित कर 250 वार्ड बनाए थे। अब मौजूदा भाजपा सरकार ने दोनों निगमों का फिर से एकीकरण कर एक नगर निगम और 150 वार्डों की व्यवस्था लागू कर दी है। इसके साथ ही निगम की सीमा का विस्तार भी किया गया है और अब इसका दायरा रिंग रोड तक पहुंच गया है।
नया नगर निगम 787.60 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है और इसकी आबादी 47.87 लाख से अधिक है। निगम सीमा में 15 लाख से अधिक घर आते हैं। सबसे अधिक आबादी हवामहल (5.44 लाख), आदर्श नगर (4.42 लाख) और सांगानेर (4.14 लाख) जोन में है, जबकि किशनपोल (2.26 लाख), विद्याधर नगर (2.76 लाख) और सिविल लाइंस (3.15 लाख) सबसे कम आबादी वाले जोन हैं।
पिछले कार्यकाल में दोनों नगर निगमों में महापौर का पद ओबीसी महिला के लिए आरक्षित था। ग्रेटर नगर निगम में सौम्या गुर्जर और बाद में कार्यवाहक महापौर के रूप में शील धाभाई ने जिम्मेदारी संभाली। वहीं हैरिटेज नगर निगम में मुनेश गुर्जर के बाद राज्य सरकार ने कुसुम यादव को कार्यवाहक महापौर बनाया था। अब नई आरक्षण व्यवस्था के अनुसार इस पद पर कौन बैठेगा, इस पर भी राजनीतिक नजरें टिकी हैं।