
जयपुर। करवाचौथ… पति की लंबी उम्र, सुखी दांपत्य जीवन और अटूट विश्वास की कामना का पर्व। चांद देखकर व्रत खोलने की परंपरा के बीच राजस्थान में रिश्तों की दो ऐसी तस्वीरें सामने आती हैं, जो सोचने पर मजबूर करती हैं। एक तरफ प्रेम संबंधों के विवाद में पतियों की हत्या की साजिश रचने के आरोपों में पत्नियां गिरफ्तार हुईं, तो दूसरी तरफ ऐसे बुजुर्ग दंपती भी रहे, जिनमें एक की मृत्यु के कुछ घंटों बाद दूसरे ने भी दुनिया को अलविदा कह दिया। कहीं रिश्तों का विवाद अपराध तक पहुंचा, तो कहीं जीवनसाथी के बिछड़ने के बाद परिवार ने एक साथ दो मौतों का दुख झेला।
श्रीगंगानगर में जनवरी 2026 में आशीष कुमार की हत्या के मामले में पुलिस ने उसकी पत्नी अंजलि सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार किया था। पुलिस के अनुसार, हत्या की साजिश में पत्नी के कथित प्रेमी की भूमिका भी सामने आई। आशीष की शादी अक्टूबर 2025 में हुई थी। जांच में सामने आए आरोपों के मुताबिक, प्रेम संबंधों के विवाद के चलते हत्या की योजना बनाई गई थी। जयपुर में अगस्त 2026 में महेश मीणा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के मामले में उसकी पत्नी कविता और एक अन्य आरोपी को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार, महेश को जूस में जहरीला पदार्थ देने की साजिश रची गई थी। वहीं, मार्च 2025 में जयपुर के मुहाना क्षेत्र में धन्नालाल सैनी की हत्या के मामले में पुलिस ने उसकी पत्नी और कथित प्रेमी को गिरफ्तार किया था। पुलिस जांच में शव को जलाकर पहचान छिपाने की कोशिश का आरोप भी सामने आया।
उदयपुर जिले के झाड़ोल क्षेत्र के बदराणा गांव में अप्रैल 2025 में 74 वर्षीय सुखलाल लोहार की मृत्यु के करीब आठ घंटे बाद उनकी 70 वर्षीय पत्नी राधा देवी की भी मौत हो गई। परिजनों के अनुसार, पति की मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार की तैयारियों के दौरान राधा देवी की तबीयत अचानक बिगड़ गई। बाद में दोनों का एक ही चिता पर अंतिम संस्कार किया गया। सीकर जिले के नीमकाथाना क्षेत्र में अगस्त 2026 में पुष्कर सैनी की मृत्यु के करीब 23 घंटे बाद उनकी पत्नी कौशल्या देवी की भी मौत हो गई। परिजनों के अनुसार, पति की मृत्यु की खबर के बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई थी। इसी तरह अजमेर जिले के कलेड़ी गांव में अप्रैल 2022 में 105 वर्षीय भैरूसिंह रावत की मृत्यु के करीब पांच घंटे बाद उनकी 101 वर्षीय पत्नी हीरी देवी ने भी दम तोड़ दिया था। दोनों का अंतिम संस्कार एक ही चिता पर किया गया।
रिश्ते की कसौटी पर विश्वास और साथ
इन घटनाओं में परिस्थितियां अलग.अलग हैं, लेकिन करवाचौथ पर ये रिश्तों के महत्व और उनकी जटिलताओं पर विचार करने का अवसर देती हैं। दांपत्य जीवन केवल रस्मों और वादों से नहीं, बल्कि विश्वास, सम्मान, संवाद और जिम्मेदारी से मजबूत होता है। करवाचौथ का पर्व इसी रिश्ते को संवारने की याद दिलाता है।