
राष्ट्रीय स्तर पर नीट (NEET) परीक्षा धांधली को लेकर मचे सियासी घमासान के बीच राजस्थान में वर्ष 2021 की रीट (REET-2021) परीक्षा पेपर लीक का मामला एक बार फिर राजनीति के केंद्र में आ गया है। राजस्थान सरकार के कैबिनेट मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को एक अत्यंत संवेदनशील पत्र भेजकर पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुए तमाम पेपर लीक मामलों की केंद्रीय एजेंसियों से व्यापक जांच कराने की मांग की है। मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने अपने इस पत्र में पूर्व शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा और पूर्व तकनीकी शिक्षा मंत्री डॉ. सुभाष गर्ग का नाम लेते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के अधिकारियों, आरपीएससी (RPSC) के पूर्व पदाधिकारियों और राजीव गांधी स्टडी सर्किल से जुड़े बड़े नामों पर गंभीर आरोप मढ़े हैं।
केंद्रीय गृह मंत्री को भेजे गए पत्र में डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने आरोप लगाया है कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के दौरान बेरोजगार युवाओं के भविष्य के साथ संस्थागत खिलवाड़ किया गया।
मंत्री किरोड़ी मीणा ने दावा किया कि कांग्रेस के पांच साल के कार्यकाल के दौरान आयोजित कुल 18 प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं में से 17 के प्रश्नपत्र सुनियोजित तरीके से लीक कराए गए थे।
पत्र में गंभीर खुलासा करते हुए लिखा गया है कि कांग्रेस सरकार के एक पूर्व मंत्री ने सीकर में अपने बेटे के राजनीतिक और व्यक्तिगत प्रोजेक्ट्स के लिए पेपर लीक गिरोह के माध्यम से लगभग 40 करोड़ रुपये की अकूत राशि एकत्र की थी।
डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने अपने पत्र के साथ कई गोपनीय दस्तावेज, संदिग्ध तस्वीरें और प्रमाण संलग्न कर केंद्रीय गृह मंत्रालय को सौंपे हैं। पत्र में उल्लेख किया गया है कि राजीव गांधी स्टडी सर्किल की स्थापना कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी की प्रेरणा से हुई थी। इसके शीर्ष पदाधिकारियों के तार सीधे कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से जुड़े हुए हैं और रीट सहित कई पेपर लीक की कड़ियां इसी संस्था के कारिंदों तक पहुंचती हैं।
रीट-2021 परीक्षा की गोपनीयता पर सवाल उठाते हुए मीणा ने लिखा कि तत्कालीन शिक्षा मंत्री, RPSC अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिकारियों के दबाव में माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने नियम ताक पर रखकर प्रश्नपत्र छपाई का कार्य कोलकाता की 'सरस्वती प्रिंटिंग प्रेस' को दिया। आरोप है कि यह प्रेस इस प्रकार के गोपनीय कार्य के लिए अधिकृत ही नहीं थी, फिर भी नियमों को दरकिनार कर उसे लगातार दूसरी बार भी काम सौंपा गया।
डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने पत्र में इस बात पर भी निराशा जताई कि पर्याप्त सबूत होने के बावजूद प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी। किरोड़ी मीणा ने स्पष्ट किया कि उन्होंने इस पूरे फर्जीवाड़े को लेकर पूर्व में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से व्यक्तिगत मुलाकात की थी। पीएमओ (PMO) के कड़े निर्देशों के बाद ही यह मामला जांच के लिए ईडी (ED) तक पहुंचा था।
उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह से आग्रह किया है कि चूंकि अब ठोस सबूत, कागजात और तस्वीरों की फाइल केंद्रीय गृह मंत्रालय को सौंप दी गई है, इसलिए ईडी और सीबीआई (CBI) जैसी केंद्रीय एजेंसियों को निर्देश देकर इस पूरे सिंडिकेट के आकाओं को तुरंत गिरफ्तार किया जाए।