
जयपुर। पाकिस्तानी हैंडलर्स को जानकारी देने वाले जासूस झबरा राम के मामले में राजस्थान सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी सफलता मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने पाकिस्तानी जासूस झबराराम की जमानत रद्द कर दी है। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की पीठ ने आरोपी को दो सप्ताह के भीतर ट्रायल कोर्ट या फिर जांच एजेंसी के समक्ष सरेंडर करने का आदेश दिया है। ऐसा नहीं करने पर राजस्थान सरकार उसे हिरासत में लेने की कार्रवाई कर सकती है।
बता दें कि सीआईडी इंटेलिजेंस ने झबरा राम को इसी साल 30 जनवरी को जैसलमेर से गिरफ्तार किया था। लेकिन, मई 2026 में राजस्थान हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी में तकनीकी कमियों को आधार मानते हुए झबरा राम को जमानत दी थी। जिसे सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। लंबी बहस के बाद सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के जमानत आदेश को रद्द करते हुए आरोपी झबरा राम को 2 सप्ताह में सरेंडर करने के लिए निर्देश दिए है।
राजस्थान इंटेलिजेंस को सूचना मिली थी जैसलमेर निवासी झबरा राम सोशल मीडिया के जरिए लगातार पाकिस्तान को खुफिया जानकारी भेज रहा है। इसके बाद इसी साल जनवरी में सुरक्षा एजेंसियों ने झबरा राम को गिरफ्तार किया था। झबरा राम से पूछताछ के दौरान सुमित कुमार का नाम सामने आया था। इसके बाद राजस्थान इंटेलीजेंस की टीम ने एयरफोर्स इंटेलीजेंस नई दिल्ली के साथ मिलकर आरोपी सुमित कुमार को चबुआ से गिरफ्तार किया था।
इंटेलिजेंस की जांच में सामने आया कि आरोपी झबरा राम ने जैसलमेर, जोधपुर सहित सीमावर्ती इलाकों में जाकर भारतीय सेना की रेकी की और सेना से जुड़ी गोपनीय जानकारियां पाकिस्तान भेजीं। आरोपी एमएड डिग्रीधारी है और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए दूसरे गांव में कोचिंग करने जाता था। इसी दौरान रास्ते में वह सेना की गतिविधियों और मूवमेंट की तस्वीरें खींचकर पाकिस्तानी एजेंटों को भेजने लगा। आरोपी ने अपने नाम से सिमकार्ड खरीदा था। वॉट्सऐप चलाने के लिए उसने ओटीपी पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के एजेंटों को दे दिया था। वह अपने नंबर के अलावा दो अन्य मोबाइल नंबरों के जरिए भी पाकिस्तानी एजेंटों के संपर्क में रहता था।