ज्वैलरी शोरूम के पीछे की दीवार में सुराख कर छत के जरिए नकबजन शोरूम में पहुंचे और फिर चार किलो सोने और तीस किलो चांदी के आभूषण चुराए।
जयपुर
राजधानी की 2015 में चर्चित वारदात से अभी भी पर्दा पूरी तरह नहीं उठ पा रहा। एक ज्वैलरी शोरूम के पीछे की दीवार में सुराख कर छत से एक और छेद कर नकबजन शोरूम में पहुंचे और फिर चार किलो सोने और तीस किलो चांदी के आभूषण और बर्तन चुरा लिए। पुलिस को जानकारी मिली तो एक ही व्यक्ति तक वह पहुंच पाई, जबकि करीब ढाई साल बाद एक और बदमाश पुलिस की गिरफ्त में आया है। पकड़ा गया आरोपी अन्तर्राज्यीय नकबजन गिरोह का सदस्य है। अभी भी मुख्य सरगना समेत अन्य नकबजनों की तलाश जारी है।
कोतवाली पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी झारखंड के साहिबगंज में उधवा मिश्री टोला है। ज्वैलर बनवारीलाल ने 5 अक्टूबर 2015 को मामला दर्ज कराया कि उसकी किशनपोल स्थित एस. डी. ज्वैलर्स में चोरों ने दुकान की छत में बडा छेद कर निकालकर सोने चांदी के आभूषण चुराए है मामले की जांच की गई तो एक आरोपी साहिब शेख को उसी दौरान गिरफ्तार कर लिया गया।
बदमाशों की तलाशी करते हुए पता चला कि एक आरोपी अशोक तलोजा जेल मुम्बई में है। इसके बाद उसे प्रोडक्शन वारंट पर लेकर गिरफ्तार किया गया। आरोपी इन्टर स्टेट नकबजनी गैंग का सदस्य है जिसने पूछताछ में अपने अन्य साथियों सद्दाम, रहीम शेख, याकूब, राहुल व राकेश के साथ मिलकर गिरोह बनाया। इसके बाद एक महीने तक जयपुर में डेरा डाला और कई दुकानों की रैकी की। मौका देखकर बदमाशों ने वारदात को अंजाम दे दिया।
गिरोह में पांच-छह लोग शामिल रहते हैं, जो किसी भी बडे शहर मे पहुंचकर दस पन्द्रह दिन उसी शहर में रूककर ज्वैलरी की दुकानों की रैकी करते हैं। वारदात करने के स्थान का चयन करते समय वहां की भौगोलिक स्थिति की जानकारी जुटाते हैं, ताकि वारदात करने के समय किसी को दिखाई नहीं दे।
ज्वैलरी शॉप के पीछे कोई सुनसान जगह हो या फिर ज्वैलरी शॉप के नजदीक कोई रहने के लिये कमरा किराए पर उपलब्ध करवाने पर गिरोह के लोग छत या दीवार में गैस कटर मशीन से बडा छेद कर दुकान में रखे कीमती सामान चुराकर फरार हो जाते हैं। वारदात करने के बाद ये लोग अपने निवास को भी छोड़ देते है। जिससे उनके बारे में पुलिस को कोई जानकारी न मिल पाए।