स्नान आदि से निवृत्त होकर व्रत का संकल्प लें। फिर पूजा घर लकड़ी के पाट पर लाल वस्त्र बिछाकर उस पर माँ दुर्गा की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर लें। माता को अक्षत, सिन्दूर और लाल पुष्प अर्पित करें। प्रसाद के रूप में मौसमी लाल फल या मिठाई चढ़ाएं। घी का दीपक जलाएं और माता की आरती करें। अब हाथ जोड़कर देवी के समक्ष अपनी मनोकामना व्यक्त कर उसे पूरी करने की प्रार्थना करें।
जयपुर। हर महीने शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मासिक दुर्गाष्टमी मनाई जाती है. माता के भक्त इस दिन उपवास रखकर दुर्गाजी की पूजा अर्चना करते हैं। मान्यता है कि इस अष्टमी पर दुर्गापूजन का पुण्य फल आश्विन माह की अष्टमी के समतुल्य ही मिलता है।
24 सितंबर 2020 को गुरुवार के दिन मासिक दुर्गाष्टमी है। ज्योतिषाचार्य पंडित नरेंद्र नागर बताते हैं कि आज के दिन दुर्गाजी की पूजा करना शुभ फलदायक होगी। आज स्नान आदि से निवृत्त होकर व्रत का संकल्प लें। फिर पूजा घर लकड़ी के पाट पर लाल वस्त्र बिछाकर उस पर माँ दुर्गा की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर लें। माता को अक्षत, सिन्दूर और लाल पुष्प अर्पित करें। प्रसाद के रूप में मौसमी लाल फल या मिठाई चढ़ाएं। घी का दीपक जलाएं और माता की आरती करें। अब हाथ जोड़कर देवी के समक्ष अपनी मनोकामना व्यक्त कर उसे पूरी करने की प्रार्थना करें।
माता की पूजा में दुर्गासप्तशती का पाठ सर्वाधिक फलदायी होता है. दुर्गा चालीसा का पाठ भी कर सकते है। पूजा करते समय इन मंत्रों का जाप करना चाहिए:
सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सवार्थ साधिके।
शरण्येत्र्यंबके गौरी नारायणी नमोस्तुते॥
या देवी सर्वभूतेषु दुर्गा-रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥