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Animal Safety: जयपुर. राजस्थान में लगातार बढ़ रही भीषण गर्मी और लू के खतरे को देखते हुए राज्य सरकार ने पशु-पक्षियों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने सभी जिला कलेक्टरों, स्थानीय निकायों और संबंधित विभागों को निर्देश जारी करते हुए दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक पशुओं के भारवहन और कृषि कार्यों में उपयोग पर प्रतिबंध सुनिश्चित करने को कहा है।
मुख्य सचिव द्वारा जारी परिपत्र में कहा गया है कि प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में तापमान लगातार 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना हुआ है। ऐसे में घोड़े, गधे, खच्चर, बैल और भैंसा जैसे भारवाहक पशुओं को तेज धूप और गर्मी में काम कराने से उनके स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। अत्यधिक गर्मी के कारण पशुओं में हीट स्ट्रोक, निर्जलीकरण, अत्यधिक थकान और मृत्यु जैसी स्थितियां उत्पन्न होने का खतरा रहता है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि “भार ढोने वाले एवं माल ढोने वाले पशुओं के प्रति क्रूरता निवारण नियम, 1965” के तहत 37 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान वाले क्षेत्रों में दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक पशुओं से कार्य नहीं लिया जा सकता। वहीं “पशुओं के प्रति क्रूरता निवारण (पशुओं का पैदल परिवहन) नियम, 2001” के अनुसार 30 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान में पशुओं का पैदल परिवहन भी प्रतिबंधित है।
मुख्य सचिव ने जिला प्रशासन, स्थानीय निकाय, पुलिस प्रशासन और संबंधित विभागों को संयुक्त रूप से नियमित मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए हैं ताकि इन नियमों की प्रभावी पालना सुनिश्चित हो सके। साथ ही पशु मालिकों को भी जागरूक करने के निर्देश दिए गए हैं कि वे पशुओं के लिए पर्याप्त छाया, स्वच्छ और ठंडे पेयजल तथा पौष्टिक चारे की व्यवस्था करें।
इसके अलावा सरकार ने जन-सहभागिता के माध्यम से पशु-पक्षियों के लिए जल व्यवस्था मजबूत करने पर भी जोर दिया है। मुख्य सचिव ने गौशालाओं, पशु आश्रय स्थलों, चारागाहों और प्रमुख मार्गों के आसपास जलकुंड स्थापित करने तथा उनमें नियमित रूप से स्वच्छ पानी भरवाने के निर्देश दिए हैं।
पक्षियों को गर्मी से राहत देने के लिए स्कूलों, सरकारी कार्यालयों, सार्वजनिक स्थलों और घरों में परिंडे लगाने के अभियान को बढ़ावा देने की बात भी कही गई है। स्वयंसेवी संस्थाओं, सामाजिक संगठनों और आमजन से अपील की गई है कि वे इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाएं। सरकार का मानना है कि भीषण गर्मी के इस दौर में पशु-पक्षियों की सुरक्षा और पेयजल व्यवस्था के लिए सामूहिक प्रयास बेहद जरूरी हैं।
Updated on:
25 May 2026 08:15 pm
Published on:
25 May 2026 08:09 pm
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