
गदग. श्री राजस्थान जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक संघ के तत्वावधान में आयोजित चातुर्मास प्रवेश महोत्सव शुक्रवार को अद्भुत श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के बीच संपन्न हुआ। दादावाड़ी से प्रारंभ हुई भव्य शोभायात्रा ने पूरे शहर को जिनभक्ति के रंग में रंग दिया। साध्वी हर्षपूर्णा, प्रियनंदिता, विनयप्रभा, गीतार्थप्रभा एवं सिद्धार्थप्रभा के पावन सान्निध्य में निकली शोभायात्रा विभिन्न प्रमुख मार्गों से होते हुए स्टेशन रोड स्थित श्री पाश्र्वनाथ जैन मंदिर पहुंची। मार्गभर श्रद्धालुओं ने गहुली, पुष्पवर्षा और मंगलगान के साथ साध्वीवृंद का भावपूर्ण स्वागत किया, जबकि युवाओं का उत्साह और जय जिनेन्द्र के उद्घोष पूरे वातावरण को धर्ममय बनाते रहे।
चातुर्मास आत्मपरिवर्तन का श्रेष्ठ अवसर
पाश्र्वनाथ जैन मंदिर में सांभेला के साथ साध्वीवृंद का भव्य स्वागत किया गया। इसके बाद आयोजित धर्मसभा में श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति रही। धर्मसभा को संबोधित करते हुए साध्वी हर्षपूर्णा ने कहा कि चातुर्मास आत्मचिंतन, संयम, स्वाध्याय, तप, त्याग और धर्म आराधना का स्वर्णिम काल है। उन्होंने श्रद्धालुओं से नियमित प्रवचन, सामायिक, प्रतिक्रमण तथा धार्मिक आयोजनों में सहभागिता कर जीवन को संस्कारमय एवं आध्यात्मिक बनाने का आह्वान किया। अनेक वक्ताओं ने भी साध्वीवृंद का स्वागत करते हुए चातुर्मास को आत्मपरिवर्तन का श्रेष्ठ अवसर बताया।
Bबड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहेB
इस अवसर पर संघ के ट्रस्टी दलिचंद कवाड़, निर्भयलाल हुंडिया, जवाहरलाल बंदा, गौतमचंद कवाड़, जितेंद्र शाह, अध्यक्ष इंदरकुमार बाफना, उपाध्यक्ष मदनलाल ओसवाल, कार्यदर्शी विनोद फोलामुथा, सह-कार्यदर्शी सचिन पोरवाल, खजांची निर्मल पारेख, सह-खजांची मुकेश गादिया सहित महिला मंडल, युवक मंडल एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। कर्नाटक सहित विभिन्न शहरों से आए गुरु भक्तों की उपस्थिति ने आयोजन को राष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया। चातुर्मास प्रवेश के साथ आगामी चार महीनों तक मंदिर में धर्म, साधना, संस्कार और आध्यात्मिक जागरण से जुड़े विविध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
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