
Rajasthan Inflation : अमरीका-इजरायल और ईरान के रिश्तों में सीजफायर एग्रीमेंट के बाद भी उतार-चढ़ाव जारी है। इससे अभी भी वैश्विक बाजार में आशंकाएं बनी हुई है। बाजार की दूसरी चिंता अलनीनो के प्रभाव के कारण कमजोर मानसून ने बढ़ा दी है। मौसम विभाग ने आशंका जताई है कि इस बार मानसून के दौरान बारिश में 24 फीसदी तक की कमी हो सकती है। मानसून आधारित कृषि अर्थव्यवस्था होने के कारण राजस्थान पर कमजोर मानसून का गहरा असर हो सकता है। पैदावार घटने से किसानों की आय में कमी के साथ उपभोक्ताओं को महंगाई की मार झेलनी पड़ सकती है।
राजस्थान चैंबर के वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. अरुण अग्रवाल का कहना है कि ईरान, अमरीका और इजरायल के बीच सीजफायर एग्रीमेंट के बाद भी तनाव कायम है। 28 फरवरी के बाद से इस संघर्ष के कारण औद्योगिक उत्पादन की लागत में 20 प्रतिशत तक का इजाफा हो चुका है। अब कमजोर मानसून से समस्या और गहरी हो सकती है।
कमजोर मानसून के कारण उत्पादन में कमी होने पर दाल, खाद्य तेल और खाद्यान्न की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका रहती है, जिससे आम उपभोक्ता का घरेलू बजट गड़बड़ा सकता है।
25.74 फीसदी राजस्थान की अर्थव्यवस्था में कृषि क्षेत्र की भागीदारी।
60 फीसदी राजस्थान में कृषि आधारित रोजगार।
70 फीसदी राजस्थान में मानसून आधारित कृषि।
खाद्य उत्पादन विशेषज्ञ अनूप खंडेलवाल का कहना है कि राजस्थान जैसे मरू प्रदेश की अर्थव्यवस्था में दक्षिण-पश्चिम मानसून का गहरा प्रभाव है। यह कमजोर होता है तो ग्रामीण क्षेत्र की 75 फीसदी आबादी की आय सीमित हो जाती है, किसानों की खरीद क्षमता कम होने से बाजार में बिक्री धीमी हो जाती है। प्रदेश के कुल कृषि क्षेत्र का 70 फीसदी भाग जुलाई से सितंबर तक मानसून के दौरान होने वाली बारिश पर निर्भर करता है।
दो सप्ताह का पूर्वानुमान (26 जून-2 जुलाई)
पूर्वी राजस्थान : कोटा, उदयपुर, भरतपुर और जयपुर संभाग के हिस्सों में हल्की से मध्यम वर्षा। पश्चिमी राजस्थान : कहीं-कहीं मेघगर्जन और बौछारें संभव हैं, लेकिन भारी वर्षा के संकेत नहीं।
50 से 60 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से तेज हवा चलने की संभावना।
3 से 9 जुलाई तक पूर्वानुमान
पूर्वी राजस्थान : कोटा, बारां, झालावाड़, बूंदी तथा उदयपुर संभाग में वर्षा गतिविधियां बढ़ने के संकेत।
पश्चिमी राजस्थान : अधिकांश भागों में वर्षा का वितरण सीमित रहने की संभावना है।