जयपुर

आवासीय कॉलोनियों में बनेगी बहुमंजिला इमारतें, कुछ बंदिश लगाकर सरकार ने खोली राह

-यूडीएच ने जारी की गाइडलाइन-गाइडलाइन्स में पहली बार रि डवलपमेंट का नया प्रावधान भी-मौजूदा विकसित कॉलोनी में ही रि डवलपमेंट कर एक बड़ी ग्रुप हाउसिंग योजना विकसित की जा सकेगी-मास्टर प्लान को लेकर जोधपुर हाइकोर्ट के आदेश के तहत गाइडलाइन जारी करने का दिया तर्क
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Jan 21, 2020
आवासीय कॉलोनियों में बनेगी बहुमंजिला इमारतें, कुछ बंदिश लगाकर सरकार ने खोली राह
आवासीय कॉलोनियों में बनेगी बहुमंजिला इमारतें, कुछ बंदिश लगाकर सरकार ने खोली राह

जयपुर। राज्य सरकार ने पूर्व में बसी कॉलोनियों या नई बसाई जाने वाली कॉलोनियों में बनाई जाने वाली मल्टीस्टोरी बिल्डिंगों के लिए नई गाइडलाइन जारी कर दी है। सरकार के इस निर्णय से चिन्हित कॉलोनियों में मल्टीस्टोरी प्रोजेक्ट्स बनाने की राह आसान हो गई है। नई गाइड लाइन के मुताबिक अब 60 फीट से कम चौड़ी और 1500 वर्गमीटर से छोटे भूखण्ड पर मल्टीस्टोरी बिल्डिंग नहीं बनाई जा सकेगी।

बताया जा रहा है कि मास्टर प्लान को लेकर जोधपुर हाइकोर्ट ने 12 जनवरी 2017 को आदेश जारी किया था। इस आदेश में था कि शहरों में कहां-कहां बहुमंजिला इमारतें बनाई जा सकेगी, इसके लिए राज्य सरकार जोनल डवलपमेंट प्लान या मास्टरप्लान में स्थान निर्धारित करें। साथ ही मौजूदा कॉलोनियों में रह रहे निवासियों के अधिकार पर प्रतिकूल असर डालते हुए इन इमारतों की स्वीकृति नहीं दी जाए। इस आदेश के बाद शहरी निकायों ने बहुमंजिला इमारतों की स्वीकृति देना बंद सा कर दिया है।

यूँ भी समझें....
नगरीय विकास विभाग की ओर से लागू की गई इन गाइडलाइन्स में पहली बार रि डवलपमेंट का नया प्रावधान भी शामिल किया गया है। इसके मुताबिक मौजूदा विकसित कॉलोनी में ही रि डवलपमेंट कर एक बड़ी ग्रुप हाउसिंग योजना विकसित की जा सकेगी। लेकिन यह अहम शर्त होगी कि इस योजना का उस कॉलोनी में रह रहे अन्य लोगों के हितों पर किसी भी प्रकार से प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़े।

ये रहेंगे प्रावधान
गाइडलाइन के मुताबिक शहरों में पहले से विकसित या अनुमोदित कॉलोनियों में मौजूद भूखण्डों को पुनर्गठित करने के बाद कम से कम 1500 वर्गमीटर से छोटे भूखण्ड पर बहुमंजिला इमारत (15 मीटर ज्यादा ऊंचाई या जी प्लस तीन से ज्यादा मंजिल) के निर्माण की अनुमति नहीं दी जाएगी। यदि किसी भूखण्ड का पुनर्गठन हाईकोर्ट के आदेशों से पहले हो चुका है तो उस स्थिति में न्यूनतम 1000 वर्गमीटर भूखण्ड पर भी अनुमति दी जा सकेगी। इसके लिए भूखण्ड के सामने रोड की चौड़ाई कम से कम 18 मीटर होनी चाहिए।
- 24 मीटर तक चौड़ाई वाली सड़कों पर भवन की अधिकतम ऊंचाई 24 मीटर ही दी जाएगी। 24 मीटर से ज्यादा चौड़ाई वाले भूखण्डों पर रोड की चौड़ाई का डेढ़ गुना ऊंचाई तक भवन निर्माण की अनुमति दी जाएगी।
- पुनर्गठित भूखण्डों पर ग्रीन बिल्डिंग ही बन सकेंगी। भूखण्ड पर ग्रीन एरिया अब पहले से अधिक 20 प्रतिशत तक रखना जरूरी होगा। जबकि ग्राउण्ड कवरेज अधिकतम 30 प्रतिशत ही रखा गया है।
- इन प्रकरणों में 12 मीटर या इमारत की ऊंचाई का एक चौथाई, जो भी अधिक होगा उसके अनुसार सेटबैक छोडऩे होंगे। तथा अग्निशमन वाहन के आवागमन के लिए 4.5 मीटर चौड़ा रास्ता रखना होगा।
- अतिरिक्त बिल्टअप एरिया लेने के लिए ली जाने वाली बेटरमेंट लेवी सामान्य लेवी (चार्ज) से 25 प्रतिशत अधिक वसूल की जाएगी। निकाय की ओर से वसूली गई इस लेवी एक डेडिकेटेड फंड में जमा होगी। इस फंड का उपयोग कॉलोनी में इन्फ्रास्ट्रक्चर के अपग्रेडेशन में किया जाएगा। जिस एरिया से बेटरमेंट लेवी वसूली गई है, उसे उसी इलाके के इन्फ्रास्ट्रक्चर अपग्रेडेशन में खर्च के लिए निकाय प्लान बनाएगा।

Published on:
21 Jan 2020 08:34 am