ऑटो कार में ज़्यादा और जटिल फीचर्स बिगाड़ रहे ड्राइविंग का मज़ा -ड्राइविंग को एक सुखद एहसास और अधिक सुरक्षित बनाने के फेर में ऑटो कंपनियों ने इसकी तकनीक को बेहद जटिल बना दिया है जयपुर। वाहन चालकों की सुरक्षा, ज्यादा स्वचालित तकनीक और आरामदायक ड्राइविंग अनुभव के लिए बीते कुछ सालों में ऑटो इंडस्ट्री ने कार की तकनीक और प्रौद्योगिकी में व्यापक परिवर्तन किए हैं। लेकिन सहूलियत देने की बजाय ये तकनीक अब वाहन चालकों खासकर नए वाहन मालिकों के लिए मुसीबत बनती जा रही है। हाल ही जेडी पॉवर के एक वार्षिक सर्वे में सामने आया कि उन्नत चालक सहायता प्रणालियां कार के मालिकों के लिए परेशानी बढ़ रही है। जे डी पावर ने नए कार खरीदार के 90 दिनों के अनुभव के आधार पर यह सर्वे किया था। सर्वेक्षण में फर्म ने पाया कि नई कार के मालिक खुद को विभिन्न प्रणालियों और तकनीक के बीच खुद को फंसा हुआ महसूस करते हैं। स्वत: लेन परिवर्तन की चेतावनी, सड़कों पर गड्ढों और खतरों का पता लगाना, दूसरे वाहने से टकराव होने से बचाने वाली सुरक्षा प्रणाली और अन्य सुरक्षा-प्रौद्योगिकी इसमें शामिल हैं।
गुणवत्ता में पिछड़ा ऑटो उद्योग
बात करें इस साल के ऑटो उद्योग के गुणवत्ता अध्ययन की तो यह 93 शिकायतें प्रति 100 वाहनों की दर से बहुत खराब रहा है। इतना ही नहीं इसमें साल 2014 के बाद जीरो सुधार हुआ है। बीते 12 महीनों में ऑटो उद्योग के ज्यादातर ब्रांड इन समस्याओं को सुधारने की बजाय और पिछड़ते चले गए। वहीं 18 ब्रांड़ जहां इस समस्याओं से निपटने में बुरी तरह फेल रहे वहीं 13 ब्रांड्स में यह समस्या और बढ़ गई। फर्म ने कहा कि इनमें ब्रेक और सस्पेंशन का शोर, इंजन स्टार्ट नहीं होना, त्वरित 'चेक इंजन' संकेत और वाहन को पेंट करने की खामियां भी शामिल हैं।
सर्वे में यह भी सामने आया की दक्षिण कोरियाई ऑटो कंपनियां शुरुअताी गुणवत्ता के मामले में बाकी ब्रांड़्स से बेहतर हैं। कोरियाई कंपनियां जानती हैं की अमरीकी उपभोक्ता वाहन से क्या चाहते हैं और क्या नहीं। कोरियाई ऑटोमेकर अपने वाहनों को अब भी एकल ड्राइवर तकनीक पर डिजासयन करते हैं जबकि यूरोपीय वाहन निर्माता अपने वाहनों को दर्जनों ऑटो प्रौद्योगिकी से लाद देते हैं। यह देखने में आकर्षक तो लगता है लेकिन असल में इन्हीं से समस्याएं भी खड़ी हो रही हैं।