
निलेश कांठेड़ की रिपोर्ट..
नवाबों के गांव के नाम से मशहूर निम्बाहेड़ा की पहचान अब क्षेत्र में आए दिन फायरिंग की घटनाओं और हथियार तस्करी केंद्र के रूप में होने लगी है। इस नई छवि से निम्बाहेड़ावासी परेशान है। इनके चेहरों पर दहशत के भाव छुपाए नहीं छुपते।
चित्तौडग़ढ़ से करीब 15 किलोमीटर दूर शंभूपुरा गांव की सरहद निकलते ही निम्बाहेड़ा विधानसभा क्षेत्र शुरू हो जाता है। निम्बाहेड़ा की सीमा के समीप पहुंचते ही वातावरण में बदलाव का अहसास होने लगता है।
निम्बाहेड़ा शहर से कुछ पहले चित्तौड़ रोड पर रामस्वरूप जाट से क्षेत्र की समस्या के बारे में पूछा तो गुस्सा कर बोला, समस्याओं से तो निपट लेंगे लेकिन ये रोज-रोज जो फायरिंग और दंगा-फसाद की घटनाएं होती उसका सामना कैसे करे। आसपास के अपराधी भी यहां आकर पनाह लेते है और पुलिस को पता नहीं चलता। रामस्वरूप की बात का वहां बैठे कुछ अन्य लोग रतनलाल शर्मा, जीवनलाल चौधरी आदि भी समर्थन करते दिखते है।
जब उनसे कहता हूं कि विधायक श्रीचंद कृपलानी के नगरीय विकास जैसा महत्वपूर्ण महकमा संभालने का लाभ तो मिला होगा तो रतनलाल बोलता है कि विकास से ज्यादा जरूरी शांति लगती है। शांति ही नहीं होगी तो विकास का क्या करेंगे। निम्बाहेड़ा शहर में शायद ऐसा नहीं हो ये सोच शहर के ह्रदय स्थल मंडी चौराहे पर एक दुकान पर बैठे सोहनलाल वैष्णव से पूछा कि कृपलानी के मंत्री बनने का क्या लाभ हुआ तो पहले तो बोलते है कि हम क्या कहें सब सामने दिखता है, फिर कहा सड़कों की दशा सुधरी और नए गार्डन भी बने लेकिन महंगाई ने सारे विकास ही को बेकार कर दिया।
वहीं नजदीक खड़े अनुज शर्मा भी चर्चा में शामिल होकर कहते है कि सरकार ने काम तो किया लेकिन पेट्रोल-डीजल की निरन्तर बढ़़ती कीमतों और निम्बाहेड़ा में बढ़़ते अपराध से उपलब्धियां लोगों को नजरों में गौण हो गई है। जब उनसे कहता हूं क्या पिछली बार कांग्रेस शासन में अच्छा काम हुआ तो कहता है कि राज कोई भी करें हालात ज्यादा नहीं बदलते लेकिन लोगों को शांति चाहिए। सड़क पर निकलते समय घर सुरक्षित हीं लौटने का डर होगा तो कोई भी विकास काम नहीं आएगा।
मध्यप्रदेश की सीमा से सटे निम्बाहेड़ा विधानसभा क्षेत्र पर वहां के माहौल का असर भी साफ दिखता है। निम्बाहेड़ा मण्डी में प्रतिदिन मध्यप्रदेश के सैकड़ों लोग भी व्यापार के लिए आते है। मण्डी में काम करने वाले श्रमिक दीनदयाल रेगर से जब पूछा कि क्या उनको मंत्री के क्षेत्र में रहने का लाभ मिला है? तो दीनदयाल का कहना था कि हम तो रोज कमाने और रोज खाने वाले है। नेताओं की बातें हमारे अधिक पल्ले नहीं पड़ती। अगले चुनाव में क्या होगा पूछने पर दीनदयाल और उसके साथ काम में लगे श्रमिक रामप्रसाद व शिव छीपा कहते है कि हर बार वो ही दो नेता हमारे सामने है। चुनाव का समय पास में आएगा तो सोचेंगे कि क्या करना है।
प्रतापगढ़ जिले की छोटीसादड़ी पंचायत समिति का क्षेत्र भी इसमें शामिल है। ये क्षेत्र टीएसपी एरिया होने से विकास की मुख्य धारा में आने के लिए अब भी संघर्ष करता प्रतीत होता है। पूरे विधानसभा क्षेत्र में किसानों के बड़े वर्ग के लिए अफीम नीति भी महत्वपूर्ण मुद्दा बनती आई है। इस बार घोषित नीति से तो किसान कुछ संतुष्ट है लेकिन पिछले दो-तीन साल उनकी समस्याओं की अनदेखी करने से नाराज भी लगते हैं। निम्बाहेड़ा से तीसरी बार विधायक निर्वाचित हुए भाजपा के श्रीचंद कृपलानी ने चुनाव के दौरान क्षेत्र के लिए विकास का कोई अलग से बड़ा वादा करने की बजाय उन्हीं को अपना मुद्दा बनाया था जो पार्टी के घोषणापत्र में थे।
करीब दो वर्ष पहले नगरीय विकास मंत्री बनने के बाद कृपलानी ने क्षेत्र में विकास की गति तो बढ़ाई लेकिन अपराधों के बढ़ते ग्राफ के कारण नाराजगी बढ़ी है। कृपलानी मंत्री बनने के बावजूद क्षेत्र में लोगों से निरन्तर जुड़े रहे। पिछला चुनाव तीन हजार से कुछ अधिक वोटों से हारने वाले कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी उदयलाल आंजना भी क्षेत्र में निरन्तर सक्रिय तो रहे लेकिन वे समस्याओं को लेकर लोगो के बीच कोई बड़ा आंदोलन खड़ा करते नहीं दिखे।