
जयपुर एयरपोर्ट के बाहर ऑटो चालकों की मनमानी (पत्रिका फोटो)
Jaipur Auto Drivers: जयपुर एयरपोर्ट के टर्मिनल-2 से बाहर निकलते ही सामने 60-70 ऑटो की कतार। मोबाइल पर एप खोलकर ऑटो बुक किया, किराया तय हुआ और चालक ने बुकिंग भी स्वीकार कर ली। मंजिल दूर होने की बात पता चलते ही चालक का रुख बदल गया। अकेले जाना है तो नहीं ले जाएंगे, शेयरिंग में चलना है तो बैठिए…कुछ ऐसा ही जवाब यात्रियों को मिल रहा है। विरोध करो तो राइड कैंसिल करने का दबाव। रास्ते में दो-तीन सवारियां और बैठाकर उनसे अलग नकद वसूली। यानी एप पर बुकिंग के नियम अलग और सड़क पर कानून ऑटो चालक का। पत्रिका ने एयरपोर्ट के बाहर इस पूरे खेल की पड़ताल की तो मनमानी के कई चेहरे सामने आए।
'राजस्थान मोटर व्हीकल एग्रीगेटर रूल्स-2025' के तहत कंपनियों के पंजीकरण की प्रक्रिया के बावजूद प्रावधानों की पालना पर सवाल खड़े हो रहे हैं। एयरपोर्ट जैसे संवेदनशील स्थान पर ऐप आधारित वाहनों के संचालन को लेकर सवाल यह है कि नियम बनाने के बाद उनकी पालना सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी है? एयरपोर्ट के बाहर खड़े 60-70 ऑटो चालकों की गतिविधियों पर कौन नजर रखता है? ऐप कंपनियों और परिवहन विभाग के बीच जवाबदेही आखिर किसकी है?
जयपुर अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल है। यहां रोजाना देश-विदेश से पर्यटक और कारोबारी पहुंचते हैं। खासकर देर रात पहुंचने वाली महिला यात्रियों और सोलो ट्रैवलर्स के लिए अनजान लोगों को जबरन साथ बैठाने का दबाव सुरक्षा संबंधी गंभीर चिंता पैदा करता है। वहीं, एयरपोर्ट से निकलते ही यदि उन्हें जबरन शेयरिंग, अतिरिक्त सवारियों और मनमाने किराये का सामना करना पड़े तो शहर की छवि पर सवाल भी उठता है। यात्री ने अकेले सफर के लिए बुकिंग की है तो उसकी सहमति के बिना दूसरे लोगों को बैठाने की स्थिति क्यों बनाई जा रही है?
यात्रियों के मुताबिक, ऐप पर इंडिविजुअल राइड का पूरा किराया तय होने के बावजूद कुछ चालक रास्ते में दो से तीन अन्य सवारियां बैठा लेते हैं। इनसे अलग से नकद पैसे वसूले जाते हैं। मूल बुकिंग करने वाला यात्री पूरा किराया देने के बाद भी साझा सफर की परेशानी झेलता है। उसे न सुविधा मिलती है और न ही वह निजता, जिसके लिए उसने इंडिविजुअल राइड बुक की थी।
शेयरिंग से इनकार करने पर चालक कहते हैं- 'जाना है तो बैठो, वरना राइड कैंसिल करो।' यात्रियों का आरोप है कि चालक खुद राइड कैंसिल करने के बजाय यात्री पर ही ऐप में बुकिंग रद्द करने का दबाव बनाते हैं, ताकि उन पर कैंसिलेशन पेनल्टी न लगे। यात्री के सामने दो ही विकल्प बचते हैं, या तो चालक की शर्त मानकर सफर करे या फिर नया ऑटो तलाशने के लिए अपना समय और मेहनत बर्बाद करे।
एयरपोर्ट के बाहर 60 से 70 ऑटो खड़े रहते हैं। यहां ऑटो चालकों की कार्यशैली का एक पैटर्न सामने आया है। 5 से 7 किलोमीटर तक की दूरी की बुकिंग चालक आसानी से स्वीकार कर लेते हैं, लेकिन ज्यादा दूरी होने पर कई चालक अकेले यात्री को ले जाने से इनकार कर देते हैं।
मनमानी और बदसलूकी की शिकायत प्रादेशिक परिवहन अधिकारी (आरटीओ) या ट्रैफिक पुलिस के हेल्पलाइन नंबर और कंट्रोल रूम पर कर सकते हैं। ऐप आधारित वाहनों से जुड़ी ऐसी घटनाओं के लिए शिकायत की व्यवस्था भी स्पष्ट नहीं है।
किसी भी यात्री को कैब या ऑटो से संबंधित शिकायत है तो वह कार्यालय में साक्ष्य के साथ शिकायत पेश कर सकता है। संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। कैब कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ समय-समय पर बैठक भी की जाती है।
-चंपालाल, आरटीओ प्रथम, जयपुर
Updated on:
5 Nov 2026, 8:20 AM IST
Published on:
5 Nov 2026, 8:20 AM IST
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