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राजस्थान के सबसे बड़े SMS मेडिकल कॉलेज में अजब हाल: कोई छोड़ रहा नौकरी, तो कोई रिटायरमेंट के बाद लौट रहा

SMS मेडिकल कॉलेज में दोहरी तस्वीर सामने आई है। जहां एक ओर वरिष्ठ डॉक्टर वीआरएस मांग रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सेवानिवृत्ति के बाद कुछ विशेषज्ञों को पुनर्नियुक्ति दी जा रही है। इससे मरीजों के इलाज और मेडिकल छात्रों के प्रशिक्षण पर असर पड़ रहा है।
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जयपुर

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Arvind Rao

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Updated: 5 Nov 2026, 7:52 AM IST

jaipur sms medical college

Jaipur SMS Medical College (Patrika File Photo)

Jaipur SMS Medical College: जयपुर: राजस्थान के सबसे बड़े सरकारी चिकित्सा संस्थान एसएमएस मेडिकल कॉलेज में विशेषज्ञ डॉक्टरों को लेकर दो अलग-अलग तस्वीरें सामने आ रही हैं। एक ओर वरिष्ठ चिकित्सक सरकारी सेवा छोड़कर निजी क्षेत्र में जाने के लिए वीआरएस मांग रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ विशेषज्ञों को सेवानिवृत्ति के बाद भी संस्थान में सेवाएं देने के लिए पुनर्नियुक्ति दी जा रही है। नेफ्रोलॉजी और कार्डियोलॉजी के कुछ वरिष्ठ डॉक्टर पुनर्नियुक्ति की सूची में हैं। दूसरी ओर मेडिसिन, न्यूरोसर्जरी, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी और नेफ्रोलॉजी जैसे विभागों के चिकित्सकों के वीआरएस लेने, आवेदन करने या इच्छा जताने के मामले सामने आए हैं।

बीते कुछ वर्षों में औसतन हर साल एक-दो डॉक्टर वीआरएस ले चुके हैं। सवाल है कि जिस संस्थान पर पूरे राजस्थान के गंभीर मरीजों के उपचार का भार है, वहां अनुभवी डॉक्टर सेवानिवृत्ति से पहले ही बाहर क्यों जाना चाहते हैं?

एक तरफ विदाई, दूसरी तरफ पुनर्नियुक्ति

एसएमएस में सेवानिवृत्ति के बाद भी विशेषज्ञों की सेवाएं लेने की जरूरत इस तस्वीर का दूसरा पहलू है। नेफ्रोलॉजी में डॉ. धनंजय अग्रवाल और डॉ. शशिमोहन शर्मा जैसे वरिष्ठ चिकित्सकों की पुनर्नियुक्ति बताती है कि कुछ महत्वपूर्ण विभागों में अनुभवी विशेषज्ञों की आवश्यकता बनी हुई है।

कई आवेदन चर्चा में

सरकारी सेवा छोड़ने वालों में डॉ. सुधीर मेहता, डॉ. प्रकाश केसवानी, डॉ. स्वाति श्रीवास्तव, डॉ. गिरीश चौहान, डॉ. हेमेन्द्र भारद्वाज, डॉ. रणधीर सिंह राव और डॉ. सीमा मेहता शामिल हैं। न्यूरोसर्जरी के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. अचल शर्मा भी वीआरएस ले चुके हैं। साल 2025 में एसएमएस अस्पताल के तत्कालीन कार्यवाहक अधीक्षक डॉ. सुशील भाटी ने वीआरएस मांगा था। नेफ्रोलॉजी के वरिष्ठ प्रोफेसर और सुपर स्पेशियलिटी के अधीक्षक रह चुके डॉ. विनय मल्होत्रा वीआरएस मांग चुके हैं। कार्डियोलॉजी के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. राजीव बगरहट्टा का नाम वीआरएस की इच्छा रखने वालों में सामने आया है। जयपुरिया और आरयूएचएस के अधीक्षक रहने के दौरान डॉ. महेश मंगल भी वीआरएस मांग चुके हैं।

डॉक्टरों के जाने का असर मरीजों और प्रशिक्षण पर

एसएमएस में प्रदेशभर से गंभीर मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। वरिष्ठ विशेषज्ञों का सेवानिवृत्ति से पहले जाना केवल पद रिक्त होने तक सीमित नहीं है। इससे जटिल बीमारियों के इलाज, मेडिकल विद्यार्थियों और रेजिडेंट डॉक्टरों के प्रशिक्षण तथा सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं की निरंतरता प्रभावित हो सकती है।

एसएमएस में अनुभवी और नए, दोनों तरह के चिकित्सकों की जरूरत है। हमारा प्रयास रहता है कि सेवानिवृत्ति से पहले कोई वरिष्ठ चिकित्सक अस्पताल नहीं छोड़े। साथ ही, सेवानिवृत्ति के बाद भी नियमानुसार ऐसे चिकित्सकों की सेवाओं का लाभ अस्पताल को मिलता रहे। हम चाहते हैं कि अनुभवी और युवा, दोनों तरह के चिकित्सकों का लाभ एसएमएस में आने वाले मरीजों को मिलता रहे।
-डॉ. दीपक माहेश्वरी, प्राचार्य एवं नियंत्रक, एसएमएस मेडिकल कॉलेज