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जयपुर एयरपोर्ट लैंड डील में नया मोड़: 32 करोड़ की जमीन 300 करोड़ की कैसे हुई? हाईकोर्ट ने बोलीदाता को आवंटन पर लगाई रोक

राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने जयपुर शहर में एयरपोर्ट के पास स्थित बेशकीमती जमीन उच्चतम बोलीदाता को सौंपने के एकलपीठ के आदेश की क्रियान्विति पर अंतरिम रोक लगा दी। साथ ही मूल याचिकाकर्ता और बोलीदाता फर्म से जवाब भी मांगा है।
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जयपुर

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Arvind Rao

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Updated: 21 Jul 2026, 7:58 AM IST

Jaipur Airport Land Deal

जयपुर एयरपोर्ट लैंड डील में नया मोड़ (फोटो-एआई)

Jaipur Airport Land Deal: जयपुर: राजधानी जयपुर में एयरपोर्ट के पास स्थित बेशकीमती जमीन के आवंटन मामले में राजस्थान हाईकोर्ट से जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) को बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने एकलपीठ के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसमें जेडीए को उच्चतम बोलीदाता फर्म के पक्ष में नई डिमांड जारी कर जमीन का कब्जा सौंपने के निर्देश दिए गए थे।

बता दें कि दशकों पुराने इस विवादित मामले में जमीन की कीमत में भारी उछाल आया है, जिस समय इस जमीन की नीलामी की प्रक्रिया शुरू हुई थी, तब इसकी कीमत करीब 32 करोड़ रुपए आंकी गई थी। लेकिन वर्तमान समय में इस प्राइम प्रॉपर्टी का बाजार मूल्य उछलकर लगभग 300 करोड़ रुपए तक पहुंच चुका है।

जानें क्या है पूरा मामला?

न्यायाधीश इन्द्रजीत सिंह और न्यायाधीश संदीप तनेजा की खंडपीठ ने यह आदेश जयपुर विकास प्राधिकरण की ओर से दायर विशेष अपील पर सुनवाई करते हुए दिया। इससे पहले इसी वर्ष मई महीने में हाईकोर्ट की एकलपीठ ने जेडीए को निर्देश दिए थे कि वह एयरपोर्ट के पास की इस बेशकीमती जमीन के लिए उच्चतम बोली लगाने वाली कंपनी 'एएमबी होटल्स प्राइवेट लिमिटेड' के पक्ष में नई डिमांड राशि जारी करे और भुगतान मिलने पर जमीन का भौतिक कब्जा फर्म को सौंप दे।

JDA ने कोर्ट में दी यह दलील

जेडीए की ओर से पैरवी करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अमित कुडी ने एकलपीठ के फैसले को चुनौती दी और खंडपीठ के समक्ष तर्क प्रस्तुत किए। एकलपीठ ने अपने क्षेत्राधिकार से बाहर जाकर आदेश जारी किया है। उच्चतम बोलीदाता फर्म (एएमबी होटल्स) मुख्य याचिकाकर्ता ही नहीं थी, और न ही याचिका में जमीन का कब्जा सौंपने की कोई मांग या गुहार की गई थी। नीलामी प्रक्रिया को कंफर्म करने का अंतिम कानूनी अधिकार जेडीए का है, न कि याचिकाकर्ता का।

इन मजबूत तर्कों को सुनने के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने एकलपीठ के आदेश की क्रियान्विति पर तुरंत प्रभाव से अंतरिम रोक लगा दी। इसके साथ ही अदालत ने मूल याचिकाकर्ता और उच्चतम बोलीदाता फर्म को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

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