केंद्र सरकार तैयार करा रही विशेष फोरेंसिक किट
शैलेंद्र शर्मा/जयपुर. केंद्र सरकार ऐसा विशेष फोरेंसिक किट तैयार करा रही है, जिससे यौन उत्पीडऩ व दुष्कर्म जैसे संगीन अपराधों के सबूतों से छेड़छाड़ नहीं की जा सकेगी। ये सबूत एफएसएल में सुरक्षित पहुंचाए जा सकेंगे।
यह किट जुलाई तक देश के पुलिस थानों व सरकारी अस्पतालों को उपलब्ध कराया जाएगा। यह गृह मंत्रालय व महिला-बाल विकास मंत्रालय की संयुक्त पहल पर तैयार हो रहा है। सीएफएसएल चंडीगढ़ में इसका प्रमाणीकरण किया गया है।
फोरेंसिक किट में यह रहेगा खास
- फोरेंसिंक प्रयोगशाला भेजने से पहले उस पर व्यक्ति का नाम, दिनांक और किट बंद करने का समय दर्ज किया जाएगा।
- किट में लिए गए नमूनों की पूरी सूची होगी।
- लैब भेजने से पहले किट पूरी तरह सील कर दिया जाएगा।
- सबूत इकट्ठा करने के खास उपकरण।
- चिकित्सीय जांच और जैविक साक्ष्य सुरक्षित रखने के लिए परखनली और बोतलों का सेट।
90 दिन आदर्श समय सीमा
यौन उत्पीडन मामलों में जांच कर रिपोर्ट सौंपने की आदर्श समय सीमा 90 दिन है। जैविक अपराध से संबंधित सबूतों को वैज्ञानिक तरीके से संरक्षित करना जरूरी है। कई बार अनुसंधान अधिकारी को जैविक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की जानकारी नहीं होती, जिससे अदालत में चालान पेश करने के दौरान मामला कमजोर पड़ जाता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार की ओर से यह कदम उठाया गया है।
यह किट ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एवं डेवलमेंट से अप्रूव हो गया है। अब गृह मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा गया है। इसकी राशि निर्भया फंड से दी जाएगी। इससे दुष्कर्म के आरोपियों को सजा दिलाने में मदद मिलेगी।
- राकेश श्रीवास्तव, सचिव, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय
राज्य में यह है स्थिति
जयपुर रेंज — 2017 में कुल 135 केस दर्ज हुए।
वहीं इस साल 2018 में इनकी संख्या में करीब 35.55 प्रतिशत के इजाफे के साथ संख्या 183 तक पहुंच गई। वहीं उदयपुर, अजमेर, कोटा, भरतपुर, बीकानेर, जोधपुर, जयपुर कमिश्नरेट और जोधपुर कमिश्नरेट में भी पिछले वर्ष के मुकाबले बढोतरी दर्ज की गई।