
जयपुर। सरकारी शिक्षक अब ट्यूशन नहीं कर सकेंगे। विभाग ने ट्यूशन करने और कोचिंग संस्थानों में सरकारी शिक्षकों द्वारा पढ़ाने को शिक्षण व्यवस्था में बुराई माना है। ये आदेश हाल ही निदेशक माध्यमिक शिक्षा ने जारी किए हैं। लेकिन प्रदेश के कई बड़े ऐसे कोचिंग संस्थान में जिनमें सिर्फ सरकारी शिक्षक ही पढ़ा रहे हैं। यहां वे लाखों रुपए महीने कमा रहे हैं। हालात ये हैं कि वे खुदके स्कूल तो जाते ही नहीं हैं। कोचिंग संस्थानों में सुबह से ही बैच शुरू हो जाते हैं, जो रात तक चलते हैं। इनमें मोटे दामों में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराई जाती है। इन ट्यूशन और कोचिंग सेंटर्स पर अधिकांश फैकल्टी सरकारी स्कूल और कॉलेजों की ही है। इनमें कई प्रिंसिपल, व्याख्याता और अन्य शिक्षक लगे हुए हैं।
ट्यूशन नहीं करने का देना होगा शपथ पत्र
सभी विषयाध्यापकों से ट्यूशन नहीं कराने और कोचिंग संस्थानों में अध्ययन नहीं कराने के संबंध में शपथ पत्र लेना होगा। ये शपथ पत्र सत्रारंभ में ही लिया जाएगा।
विभाग को पता फिर भी कार्रवाई नहीं
विभाग के अधिकारी हर कभी ऐसे आदेश निकाल कर पल्ला झाड़ लेते हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं करते। राजधानी सहित प्रदेशभर में ऐसे सैंकड़ों शिक्षक हैं जो निजी कोचिंग संस्थानों में पढ़ा रहे हैं, विभाग के अधिकारियों को पता भी है, लेकिन वे कोई कार्रवाई नहीं करते। कई जगह तो स्कूलों के प्रधानाचार्यों ने ही कोचिंग का धंधा शुरू कर रखा है। आए दिन वे अपने ब्रोशर भी बंटवाते हैं, जिनमें उनका फोटो भी लगा होता है, लेकिन उसके बाद भी अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं।
पहले चेतावनी फिर कार्रवाई
माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने अब इस संबंध में कार्रवाई करने के आदेश जारी किए हैं। ट्यूशन कराने वाले और कोचिंग संस्थानों में अध्ययन कराने वाले शिक्षकों को पहले चेतावनी दी जाएगी। नहीं मानने पर राजस्थान सिविल सेवा वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील नियम 1958 तथा राजस्थान सिविल सेवा आचरण नियम 1971 के तहत अविलम्ब अनुशास्नात्मक कार्रवाई प्रारंभ की जाएगी।