श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना ने पद्मावत फिल्म को बैन करने की केंद्र सरकार से मांग की है।
जयपुर। श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना ने पद्मावत फिल्म को बैन करने की केंद्र सरकार से मांग की है। राजपूत सभा भवन में रविवार को सेना के अध्यक्ष सुखदेव सिंह गोगामेड़ी ने कहा, हरियाणा सरकार ने सेना के संगठन महामंत्री सूरजपाल सिंह अम्मू को रिहा नहीं किया तो दिल्ली कूच किया जाएगा। साथ ही सिनेमेटोग्राफी एक्ट 6 के अंतर्गत पद्मावत फिल्म पर केंद्र सरकार से अध्याधेश लाकर फिल्म को बैन करें।
उन्होंने कहा कि जिस दिन संजय लीला भंसाली को जयपुर में थप्पड़ मारा था और अगले ही दिन करणी सेना के संस्थापक की ओर से फिल्म बनाने का अनुमति पत्र नहीं दिया गया होता तो पद्मावत फिल्म कभी बनती ही नहीं। इस दौरान श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना जयपुर के जिलाध्यक्ष महिपालसिंह सामेर को मनोनीत किया गया।
राजपूतों ने ब्राह्मणों को कभी नहीं दिया मृत्युदंड
गोगामेड़ी ने कहा कि फिल्म में इतिहास को तोड़-मरोड़कर प्रदर्शित किया गया है। इतिहास में एक भी राजपूत राजा ने ब्राह्मणों को मृत्युदंड नहीं दिया है। इस फिल्म में ब्राह्मण हत्या करते हुए दिखाया गया है। ब्राह्मणों के बिना राजपूतों के धर्म का कार्य नहीं होता। इसमें कंट्रोवर्सी दिखाने के लिए यह सीन डाला गया है।
उधर, संगठन के संरक्षक लोकेन्द्र सिंह कालवी ने शनिवार को एक संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि यह फिल्म एक 'साम्प्रदायिक गुंडागर्दी' है जिसका आखिरी दम तक विरोध किया जाएगा। गणतंत्र दिवस के सम्मान में विरोध प्रदर्शन स्थगित रखे गए थे लेकिन अब फिर से विरोध शुुरू कर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि विरोध प्रदर्शनों के नाम पर आगजनी और तोडफ़ोड़ तथा विशेष रूप से गुडग़ांव में एक स्कूल बस पर पथराव की जो घटना हुई है उसके पीछे करणी सेना का कोई हाथ नहीं है।
कालवी ने दावा किया कि स्कूल बस के ड्राइवर ने खुद कहा है कि करणी सेना के कार्यकर्ताओं को जब यह पता चला की बस में स्कूली बच्चे हैं तो उन्होंने बस को सुरक्षित आगे जाने में मदद की लेकिन इसी दौरान पीछे से मोटरसाइकिल पर सवार कुछ लोग आए और बस पर पत्थर फेंक कर भाग गए।