
दिल्ली/जयपुर/अहमदाबाद. संजय लीला भंसाली कृत फिल्म पद्मावती को लेकर घमासान जारी है। मूवी में दर्शाए गए सीन्स और कहानी को लेकर राजपूत संगठनों और हिंदूवादियों को आपत्ति है। चूंकि करणी सैनिकों, पूर्व राजघराने और राजपूत समाज का राजस्थान की राजनीति में अहम रोल रहा है, ऐसे में संभव है कि यहां सीधे तौर पर भंसाली को झटके लग सकते हैं।
दरअसल, 7 करोड़ से ज्यादा आबादी वाले देश के सबसे बड़े इस राज्य की राजनीति से जुड़े कई अहम चेहरे राजपूत समाज से हैं। इनमें से कई फिल्म को लेकर आपत्ति भी दर्ज करवा चुके हैं। मुख्यमंत्री, पंचायती राज मंत्री समेत कई विधायक राजपूत समाज से हैं। वहीं केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भी राजपूत समाज से हैं। उधर, CBFC प्रमुख प्रसून जोशी भी स्वंय के स्टाफ में सर्किय अर्जुन गुप्ता से परेशान हैं। क्योंकि, गुप्ता बीजेपी के नेता हैं और बतौर सीबीएफसी सदस्य उन्होंने केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह को एक पत्र में पद्मावती के लिए संजय लीला भंसाली को राजद्रोह के लिए सजा देने की मांग की थी, जिसके बाद सीबीएफसी के प्रमुख प्रसून जोशी ने ऐतराज जताया है।
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हालांकि, अब फिल्म की रिलीज बिना रुकावट होगी या कुछ संसोधन करना होगा ये अब सुप्रीम कोर्ट में नहीं बल्कि सेंसर बोर्ड में ही तय हो सकेगा। निसंदेह, अब भंसाली और उनके समर्थनों की निगाह फिल्म सेंसर बोर्ड के दरवाजे पर हैं। फिल्म 1 दिसंबर को आॅल इंडिया रिलीज होने जा रही है। देखना यह भी है कि सरकार इस मामले में क्या रूख अपनाती है, उसे राजपूतों की सुननी है अथवा फिल्म पास करनी है। हालांकि, गृहमंत्री का आश्वासन ये आया है कि कानून व्यवस्था से खिलवाड़ नहीं होने देंगे। वहीं उन्होंने विरोध को भी समर्थन दिया है।
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