जयपुर

(फ्लेयर पेज 2) सरकारी स्कूलों से मुंह मोड़ रहे अभिभावक, 34 स्कूलों में पहली कक्षा सूनी

Jul 25, 2026
Rajasthan

BमेंगलूरुB. दक्षिण कन्नड़ जिले में सरकारी प्राथमिक स्कूलों में घटती छात्र संख्या शिक्षा विभाग के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई है। चालू शैक्षणिक वर्ष में जिले के 34 स्कूलों में पहली कक्षा में एक भी विद्यार्थी ने प्रवेश नहीं लिया, जिससे कई स्कूलों के भविष्य पर सवाल खड़े हो गए हैं। शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार शून्य प्रवेश वाले इन 34 स्कूलों में 23 सरकारी स्कूल, 6 अनुदानित (एडेड) स्कूल और 5 गैर-अनुदानित (अनएडेड) स्कूल शामिल हैं। सभी सरकारी स्कूल प्राथमिक स्तर के हैं, जिनमें निम्न प्राथमिक और उच्च प्राथमिक दोनों श्रेणियां शामिल हैं। हालांकि किसी भी सरकारी हाईस्कूल में ऐसी स्थिति सामने नहीं आई है।B
B
B
B
Bसुल्लिया तालुक सबसे अधिक प्रभावितB
सुल्लिया तालुक के पेट्टाजे, कल्पतबैलु, अचरप्पाडी, मुट्टलाजे, पैका, हडिकल्लु, कोटेगुड्डे और कमिला स्थित निम्न प्राथमिक स्कूलों में पहली कक्षा में एक भी बच्चा दाखिल नहीं हुआ। इसी तरह मेंगलूरु उत्तर ब्लॉक के मेल्कार, अथिकारिबेट्टु, किलपाडी स्थित जिला पंचायत निम्न प्राथमिक स्कूलों तथा उल्लांजे सरकारी उच्च प्राथमिक स्कूल में भी प्रवेश शून्य रहा।B
B
B
B
B
B
Bअनुदानित और निजी स्कूल भी प्रभावितB
अनुदानित स्कूलों में कंकनाडी का कैपिटानियो हाईयर प्राइमरी स्कूल, मूडबिद्री का अनेगुड्डे एडेड हाईयर प्राइमरी स्कूल, पालाडका का सेंट इग्नेशियस हाईयर प्राइमरी स्कूल और निड्डोडी का श्री सत्यनारायण हाईयर प्राइमरी स्कूल शामिल हैं, जहां पहली कक्षा में कोई प्रवेश नहीं हुआ। गैर-अनुदानित स्कूलों में पिल्या का गुड फ्यूचर चाइल्ड इंग्लिश मीडियम स्कूल, कोलंबे का पाना ग्लोबल स्कूल, निड्डोडी का एसएन पब्लिक स्कूल, सर्या का लक्ष्मी वेंकटरमण हाईयर प्राइमरी स्कूल और नेट्टाना का माउंट सियॉन पब्लिक स्कूल शामिल हैं।B
B
B
B
B
B
Bएक साल में दोगुनी हुई समस्याB
वर्ष 2025-26 में केवल 20 स्कूलों (8 सरकारी, 10 अनुदानित और 2 निजी) में पहली कक्षा में शून्य प्रवेश दर्ज हुआ था। इस वर्ष यह संख्या बढ़कर 34 हो गई है, जो स्थिति के तेजी से बिगडऩे का संकेत है।B
B
B
B
Bअंंग्रेजी माध्यम की ओर झुकावB
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का मानना है कि अभिभावक तेजी से अंग्रेजी माध्यम शिक्षा को प्राथमिकता दे रहे हैं। यही कारण है कि ग्रामीण क्षेत्रों के कई छोटे सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या लगातार घट रही है। हालांकि विभाग का कहना है कि इस वर्ष जिले के सभी सरकारी स्कूलों में द्विभाषी शिक्षा व्यवस्था शुरू की गई है, जिसमें कन्नड़ के साथ अंग्रेजी में भी पढ़ाई कराई जाएगी। अधिकारियों को उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में इससे सरकारी स्कूलों में प्रवेश बढ़ेंगे।B
B
B
B
Bतीन साल लगातार शून्य प्रवेश तो स्कूल बंदB
दक्षिण कन्नड़ के डीडीपीआई शशिधर जी.एस. ने कहा कि यदि किसी स्कूल में पहली कक्षा में प्रवेश नहीं होता है, तो भी वह अधिकतम तीन वर्ष तक चल सकता है। लेकिन यदि लगातार तीन वर्षों तक शून्य प्रवेश रहता है, तो ऐसे स्कूल को बंद करने की कार्रवाई की जाएगी।


Bक्या कहते हैं विशेषज्ञB
शिक्षाविदों का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन, कम जन्मदर, निजी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों का विस्तार और छोटे गांवों में घटती आबादी भी सरकारी स्कूलों में प्रवेश कम होने के प्रमुख कारण हैं। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में और अधिक स्कूल बंद होने की स्थिति पैदा हो सकती है।B
B
B
B
B
B
Bआंकड़ों में स्थितिB
श्रेणी शून्य प्रवेश वाले स्कूल
सरकारी स्कूल 23
अनुदानित स्कूल 6
गैर-अनुदानित स्कूल 5
कुल 34


.........B
B
Bसरकारी स्कूलों के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाए B
सरकारी विद्यालय आज केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं, बल्कि बच्चों के समग्र विकास का सशक्त माध्यम बन चुके हैं। यहां विद्यार्थियों को नि:शुल्क पाठ्यपुस्तकें, यूनिफॉर्म, जूते-मोजे, छात्रवृत्ति, दूध, केला और अंडा जैसी पोषण संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। इसके अलावा विशेष कक्षाएं, कंप्यूटर लैब, विज्ञान प्रयोगशाला तथा अन्य आधुनिक शैक्षणिक संसाधनों की व्यवस्था भी है। शिक्षक भी मेरिट के आधार पर नियुक्त किए जाते हैं, जिससे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित होती है। इसके बावजूद अनेक अभिभावकों को सरकारी विद्यालयों में उपलब्ध इन सुविधाओं की पर्याप्त जानकारी नहीं है। इसलिए आवश्यक है कि सरकारी स्कूलों के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाए, ताकि अधिक से अधिक बच्चे इन सुविधाओं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लाभ उठा सकें।B
B
B— डॉ. रेणुकाताई संतबा रेमासं, उप प्राचार्य, एसआरएस कर्नाटक पब्लिक स्कूल, रायनाल।B

Updated on:
25 Jul 2026 06:01 am
Published on:
25 Jul 2026 06:01 am