जयपुर

सरकारी संविदा वाले 1500 को 30 प्रतिशत बोनस अंक, निजी में लगे 25000 को नहीं

- प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में फार्मासिस्ट के लिए 1736 पदों पर हो रही भर्ती, 1500 अभ्यर्थियों को मिलेंगे 30 प्रतिशत तक बोनस अंक  
2 min read
Aug 21, 2018
jaipur
सरकारी संविदा वाले 1500 को 30 प्रतिशत बोनस अंक, निजी में लगे 25000 को नहीं

जयपुर। चिकित्सा विभाग की ओर से प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में फामार्सिस्टों के लिए 1736 पदों के लिए की जाने वाली भर्ती में 30 प्रतिशत बोनस अंकों का लाभ सरकारी अस्पतालों में ऐजेंसयिों के जरिये लगे संविदा फार्मासिस्टों को ही मिलेगा। इस समय सरकारी अस्पतालों में इस तरह के संविदा फार्मासिस्ट करीब 1500 होने का अनुमान है। जबकि निजी अस्पतालों में काम करने वाले फार्मासिस्टों की संख्या करीब 25 हजार बताई जा रही है। भर्ती के लिए 70 अंक की लिखित परीक्षा का आयोजन अक्टूबर में राजस्थान अधीनस्थ बोर्ड के माध्यम से प्रस्तावित है। इसके अलावा 30 अंक बोनस के दिए जाएंगे, ये बोनस अंक सरकारी योजनाओं में और एजेंसियो में काम करने वालों को ही दिए जाएंगे।

वर्ष 2018 में नियमों में संशोधन करते हुए राज्य सरकार ने फिर नियमों को मेरिट से परीक्षा करते हुए बोनस अंक 10, 20, 30 व अधिकतम तीन वर्ष कर दिए। इस भर्ती में करीब 25 हजार आवेदन आने की संभावना है। इसका कारण सामान्य में भी आयु सीमा 40 वर्ष किया जाना है।

पहले की भर्तियां इस तरह

प्रदेश में पहली बार वर्ष 2011 में फार्मासिस्ट के 1478 पदों पर भर्ती जारी की गई थी। जिसकी परीक्षा का आयोजन राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश् वविद्यालय की ओर से वर्ष 2012 में किया गया था। इस भर्ती में करीब 18 हजार आवेदन आए थे। बोनस अंक 4, 8, 12, 16 व 20 अंक प्रति वर्ष एवं अधिकतम पांच वर्ष के लिए अनुभव के आधार पर दिए गए थे। वहीं वर्ष 2013 में राजस्थान मेडिकल एंड हैल्थ एंड सबोर्डिनेट सर्विस रूल्स 1965 में तत्कालीन सरकार ने नियमों में संशोधन करते हुए परीक्षा से मेरिट के नियम बना दिए और 1209 पदों पर सरकार ने मेरिट से सीधी भर्ती का विज्ञापन जारी कर दिया। इस भर्ती में करीब 12000 आवेदन प्राप्त हुए। जिस पर 5, 10, 15 बोनस अंक तीन वर्ष के लिए दिए गए। इस भर्ती में पदस्थापन वर्ष 2016 में दिया गया।

सरकार 5 हजार करे पदों की संख्या

फ़ार्मा यूथ वेलफ़ेयर संस्थान के प्रदेशाध्यक्ष प्रवीण सेन कहना है कि इससे निजी क्षेत्र में काम करने वाले फार्मासिस्टों में रोष भी व्याप्त हो गया है। उन्होंने बताया कि जब सरकार का उदेश्य इतने कम पदों पर भर्ती निकाल कर सिर्फ़ संविदा कर्मियों को नियमित करना मात्र है तो इन सभी संविदा कर्मियों को सरकार को सीधे ही नियमित कर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार जल्द से जल्द फ़ार्मासिस्ट पदों की संख्या बढ़ाकर 5000 नहीं करती है तो प्रदेश भर में इसका विरोध किया जाएगा। इस समय प्रदेश में 17000 निशुल्क दवा वितरण केंद्रो पर सरकार ने सिर्फ़ 2500 नियमित फ़ार्मासिस्ट नियुक्त किए हुए हैं।

Published on:
21 Aug 2018 06:00 am