
जयपुर
राजस्थान में इन दिनों मॉब लिंचिंग मामले में बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा। पूरे देश में मामला उजागर होने पर सरकार पर राजनीतिक और कानूनी दबाव बढ़ता जा रहा है। यही कारण है कि अब भीड़ के द्वारा होने वाली हिंसा पर सरकार अंकुश लगाने के लिए सख्ती करने जा रही है। यहीं कारण है कि गृह विभाग ने एक एडवाइजरी जारी कर पालना करने के लिए सभी जिलों को निर्देश दिए गए है।
दरअसल राजस्थान के गृह विभाग ने मॉब लिंचिंग रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश की पालना में एडवाईजरी जारी की है। पुलिस और प्रशासन को जारी इस एडवाईजरी में निर्देश हैं जिनकी पालना के लिए सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों व केन्द्र सरकार को निर्देशित किया है। सुप्रीम कोर्ट ने तहसीन पूनावाला की याचिका पर 17 जुलाई को यह आदेश दिया है।
आदेश में तीन तरह के निर्देश हैंं पहले भाग में निवारक कदम दूसरे में उपचारात्मक और तीसरे में दंडात्मक कार्रवाई करने को कहा गया है। लेकिन गृह विभाग ने अलवर के रामगढ़ में कथित गो-तस्कर की हत्या और सुप्रीम कोर्ट में लंबित याचिका के चलते एडवाईजरी जारी कर दी है।
एडवाईजरी के तहत प्रत्येक जिले में एसपी नोड़ल अधिकारी नियुक्त हों और उनकी सहायता के लिए डीएसपी स्तर के अधिकारी लगाए जाएं
तीन सप्ताह के भीतर पिछले पांच साल में मॉब लिंचिंग की घटना वाले जिलों, उपखंडों, गांवों की पहचान हो
मॉब लिंचिंग वाले संवेदनशील क्षेत्रों में थानाधिकारी विशेष सतर्कता बरतेंं
जिले का नोडल अधिकारी महीने में एक बार स्थानीय इंटेलीजेंस व थानाधिकारियों से बैठक करें
डीजीपी की प्रत्येक सोमवार को होने वाली वीडियो कांफ्रेंसिंग में मॉब लिंचिंग को शामिल किया जाए
मॉब लिंचिंग करने का संदेह होने पर अधिकारी भीड़ को तीतर—बितर करें
मॉब लिंचिंग वाले संवेदनशील इलाकों में गश्त की जाए
सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ आईपीसी की धारा 153ए के तहत मामला दर्ज किया जाएगा।
मॉब लिंचिंग की जानकारी मिलते ही पुलिस एफआईआर दर्ज करेगी। तय समय में चालान पेश किया जाए
दिशा निर्देशों की अवहेलना करने वाले पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए