जयपुर

PODCAST : तंत्र ही स्व और पर का निर्धारक

तंत्र ही ‘स्व’ और ‘पर’ का निर्धारक है। इसमें अन्तर इतना ही है कि आत्मभाव प्रबल है अथवा मन का कामना भाव।

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Feb 26, 2026

Gulab Kothari Articles : स्पंदन : तंत्र ही स्व और पर का निर्धारक : स्वतन्त्रता और परतन्त्रता की व्यवहार शैली में भेद है, किन्तु परिणाम दृष्टि से दोनों समान हैं। परतन्त्रता में पुरुष द्वारा ‘पशुभाव’ में परिणत हो रही है, वही स्वेच्छा से भी मनमानी करके पशुभाव में जी रही है। मन की कामना पर किसी अन्य का अंकुश नहीं चाहिए। इसमें सुधार लाना सहज नहीं है।

Published on:
26 Feb 2026 06:30 pm
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