
तिरुचि. तमिलनाडु पुलिस ने बढ़ते साइबर अपराधों से निपटने के लिए शैक्षणिक संस्थानों और तकनीकी संगठनों के साथ सहयोग की पहल की है। सोमवार को तिरुचिरापल्ली स्थित राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी-टी) में आयोजित साइबर सुरक्षा केंद्र और फैकल्टी अपग्रेडेशन कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर केंद्रीय ज़ोन के पुलिस महानिरीक्षक वी. बालकृष्णन ने कहा पुलिस, एनआईटी-टी और सेंटर फॉर डवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (सीडेक) के बीच साझेदारी से जांच क्षमता और तकनीकी दक्षता बढ़ेगी। उन्होंने बताया यह सहयोग तीन प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित होगा—जांचकर्ताओं का प्रशिक्षण: नवीनतम डिजिटल फॉरेंसिक उपकरणों का उपयोग सिखाना, हैकथॉन आयोजन: उभरती चुनौतियों के समाधान विकसित करना तथा जनजागरूकता अभियान: आम जनता को साइबर सुरक्षा के प्रति सचेत करना। बालकृष्णन ने कहा एनआइटी-टी ने कई स्वदेशी साइबर सुरक्षा उपकरण विकसित किए हैं, लेकिन वे अभी व्यावसायिक स्तर तक नहीं पहुंचे हैं।
पुलिस के वास्तविक मामलों से जुड़ने पर इनका उपयोग और प्रसार संभव होगा। कार्यक्रम में उन्होंने यह भी बताया कि वर्ष 2025 में साइबर धोखाधड़ी से लगभग 1,200 करोड़ रुपए की शिकायतें दर्ज हुईं, जबकि वास्तविक नुकसान इससे कहीं अधिक हो सकता है क्योंकि कई घटनाएं रिपोर्ट ही नहीं होती। इस अवसर पर सी-डैक के साइबर फॉरेंसिक विभाग प्रमुख ए. आर. विनुकुमार और एनआईटी-टी के डीन (फैकल्टी वेलफेयर) आर. जेयापॉल ने भी विचार साझा किए। यह पांच दिवसीय फैकल्टी अपग्रेडेशन कार्यक्रम 3 से 7 अगस्त तक आयोजित किया जा रहा है। इसे एनआइटी-टी के इंस्ट्रूमेंटेशन एंड कंट्रोल इंजीनियरिंग तथा कंप्यूटर साइंस विभाग ने सीडेक, तिरुवनंतपुरम के सहयोग से सूचना सुरक्षा शिक्षा एवं जागरूकता (आइएसईए) फेज़-तृतीय योजना के अंतर्गत आयोजित किया है।