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Bगदग. Bपारंपरिक खेती से हटकर आधुनिक और लाभकारी कृषि की ओर बढ़ते किसानों के बीच गदग जिले के गजेंद्रगढ़ के निकट नागरासकोप्प गांव के प्रगतिशील किसान कुबेरप्पा मलियप्पा बडिगेर ने अनार की खेती से उल्लेखनीय सफलता हासिल कर क्षेत्र में नई मिसाल कायम की है। उनके 13 एकड़ मसीरी भूमि में महाराष्ट्र की जैन कंपनी की ‘केसर’ किस्म के अनार के बागान में इस समय भरपूर फलन दिखाई दे रहा है।
Bसहफसली खेती से शुरू हुआ सफरB
कुबेरप्पा ने वर्ष 2016 में सहफसली खेती के रूप में नुगे के साथ लगभग दो हजार अनार के पौधे लगाए थे। प्रारंभिक वर्ष में उन्हें लगभग 3 लाख रुपए की आय हुई, जो दूसरे वर्ष बढक़र 22 लाख रुपए तक पहुंच गई। इसके बाद लगातार उत्पादन और बाजार मांग बढऩे से वार्षिक आय 50 लाख से 70 लाख रुपए के बीच पहुंच गई। बढ़ते लाभ को देखते हुए उन्होंने धीरे-धीरे अनार की खेती का क्षेत्र भी विस्तार किया।
B111 प्रति किलो की दर से सीधी खरीदB
वर्तमान में चेन्नई और बेंगलूरु के व्यापारी उनके बाग से सीधे 111 प्रति किलो की दर से अनार खरीद रहे हैं और खेत से ही माल का उठाव कर रहे हैं। यदि यही बाजार दर बनी रहती है तो इस वर्ष खर्च घटाने के बाद लगभग 1 करोड़ रुपए तक का शुद्ध लाभ मिलने की उम्मीद है।
Bश्रमिकों को मिला नियमित रोजगारB
आठ एकड़ क्षेत्र में अनार की खेती पर 35 से 40 लाख रुपए का निवेश किया गया है, जबकि उत्पादन 100 क्विंटल से अधिक पहुंच चुका है। बागान में 20 से अधिक स्थानीय श्रमिकों को नियमित रोजगार मिला है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली है।
Bपरिवार का साथ, किसानों के लिए प्रेरणाB
कुबेरप्पा के साथ उनके भाई और परिवार के सदस्य भी खेती कार्य में सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। उनकी सफलता आधुनिक तकनीक, मेहनत और वैज्ञानिक कृषि के समन्वय की प्रेरक मिसाल बन गई है। आसपास के किसान उनके बागान में पहुंचकर अनार उत्पादन की तकनीक और प्रबंधन की जानकारी भी ले रहे हैं।