
हावेरी. हावेरी जिले में कमजोर मानसून ने किसानों के साथ आम लोगों और पशुधन के सामने भी गंभीर जल संकट खड़ा कर दिया है। 1 जून से 17 अगस्त तक जिले में अपेक्षित 36.69 सेंटीमीटर के मुकाबले केवल 20.86 सेंटीमीटर बारिश हुई, जिससे 43.15 प्रतिशत वर्षा की कमी दर्ज की गई है। खेतों में खड़ी फसलें मुरझा रही हैं और उत्पादन प्रभावित होने के संकेत हैं।
B2,058 तालाबों में जलसंकट गहरायाB
जिले के 2,058 तालाबों में से 198 पूरी तरह सूख चुके हैं, जबकि 1,138 तालाबों में केवल 1 से 30 प्रतिशत पानी बचा है। 440 तालाबों में 31 से 50 प्रतिशत तथा 268 तालाबों में 51 से 99 प्रतिशत पानी है। केवल 14 तालाब पूरी तरह भरे हैं। प्रशासन को आशंका है कि कम जलस्तर वाले तालाबों का पानी आने वाले दिनों में तेजी से घट सकता है।
Bरट्टीहल्ली में सबसे अधिक बारिश की कमीB
ब्याडगी, हानगल, हावेरी, हिरेकेरूर, राणेबेन्नूर, सवणूर, शिग्गावी और रट्टीहल्ली सभी तालुकों में बारिश की कमी दर्ज हुई है। रट्टीहल्ली में सबसे अधिक 65.99 प्रतिशत कमी रही। इससे किसानों पर आर्थिक संकट और गहरा गया है।
Bसूखाग्रस्त जिला घोषित करने की तैयारीB
जिला प्रशासन के अधिकारी सूखाग्रस्त जिला घोषित करने के मानदंडों के आधार पर रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। अधिकारी खेतों और प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर वास्तविक स्थिति का आकलन कर रहे हैं। हावेरी के अतिरिक्त जिलाधिकारी नागराज ने बताया कि बारिश की कमी से हुए प्रभावों का अधिकारियों के माध्यम से सर्वेक्षण कराया जा रहा है और आवश्यक जानकारी जुटाई जा रही है। शीघ्र ही प्रशासन की ओर से ठोस कदम उठाए जाएंगे।
Bकुछ तालाब पूरी तरह लबालबB
हिरेकेरूर के निडणेगिलु, हानगल के हुलगड्डी और सागरवल्ली सहित कुल 14 तालाब शत-प्रतिशत भरे हैं। पश्चिमी घाट क्षेत्रों में अच्छी बारिश के कारण वरदा और तुंगभद्रा नदियों में जलप्रवाह बढ़ा है। सवणूर के कलसूर के पास वरदा नदी पर बने छोटे पुल पर पानी बहने से आवागमन रोकना पड़ा है।
Updated on:
19 Aug 2026 06:02 am
Published on:
19 Aug 2026 06:01 am
