
सीएम भजनलाल शर्मा, पत्रिका फाइल फोटो
जयपुर। नगरीय निकाय चुनाव की घोषणा से ठीक पहले राज्य सरकार ने शहरी सेवा शिविर के तहत पट्टों के नामांतरण को लेकर बड़ा फैसला किया है। अब कच्ची बस्तियों में तीन साल पुराने अहस्तांतरणीय पट्टों का भी हस्तांतरण किया जा सकेगा। यानि, जिन भूखंडों के पट्टे पर अभी बिक्री या हस्तांतरण की रोक थी, पट्टा जारी होने के तीन साल पूरे होने के बाद उन्हें खरीदार के नाम किया जा सकेगा। नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार यह उन कच्ची बस्तियों के मामलों में लागू होगी, जिनमें 29 जून, 2022 के आदेश के तहत अहस्तांतरणीय शर्त पर पट्टे जारी किए गए थे।
यदि मूल पट्टेदार ने भूखंड को पंजीकृत विक्रय पत्र के जरिए आगे बेच दिया है और वह भूखंड कई बार बिक चुका है, तो अंतिम खरीदार के नाम पर नामांतरण किया जा सकेगा। इसके लिए भूमि निष्पादन नियम के अनुसार निर्धारित राशि जमा करानी होगी। मसलन, किसी कच्ची बस्ती में किसी व्यक्ति को अहस्तांतरणीय पट्टा मिला। उसने बाद में वह भूखंड रजिस्टर्ड दस्तावेज के जरिए किसी दूसरे व्यक्ति को बेच दिया। इसके बाद वह भूखंड आगे भी बिक गया। ऐसे मामले में अब तीन साल की अवधि पूरी होने के बाद वर्तमान यानि अंतिम खरीदार अपने नाम रिकॉर्ड में नामांतरण करा सकेगा। इसके लिए राजस्थान सरकार की ओर से निर्धारित राशि जमा करनी होगी।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि कच्ची बस्तियों के अलावा अन्य अहस्तांतरणीय पट्टों के मामलों में पट्टे में लिखी शर्तों का पालन करना जरूरी होगा। यानि, 3 साल पूरे होने से हर तरह के अहस्तांतरणीय पट्टे को स्वतः हस्तांतरित करने का अधिकार नहीं मिलेगा। संबंधित पट्टे की शर्तों और लागू नियमों के आधार पर ही कार्रवाई होगी।
सरकार ने यूआइटी, प्राधिकरण और निकायों की ओर से जारी पट्टों के नाम हस्तांतरण के मामलों में मुख्तारनामा और गिफ्ट डीड जैसे दस्तावेजों को भी आधार बनाने के निर्देश दिए हैं। 8 जनवरी, 2020 के आदेश और 15 जनवरी, 2020 की अधिसूचना में निर्धारित दस्तावेज के आधार पर ऐसे मामलों का निस्तारण किया जाएगा। वहीं, जिन मामलों में पट्टा जारी होने से पहले ही पूर्व आवंटन के आधार पर भूखंड बेच दिया गया था, उनमें वित्त विभाग की 10 जुलाई, 2024 और 12 सितंबर 2024 की अधिसूचनाओं के अनुसार प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
Updated on:
19 Aug 2026 07:00 am
Published on:
19 Aug 2026 07:00 am
