
- 12 साल से बीच में पढ़ाई छोड़ चुकी बेटियों को मुफ्त पढ़ाकर बोर्ड तक पहुंचा रहे नरेश मेहता, इस साल रक्षाबंधन पर ‘शिक्षाबंधन’ में उमड़ी बहनों की भीड़
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संदीप पाटिल. सूरत. रक्षाबंधन पर आमतौर पर भाई अपनी बहनों को उपहार देते हैं, लेकिन सूरत में इस बार एक शिक्षक को 300 से ज्यादा बहनों ने राखी बांधी और बदले में उन्हें मिला ऐसा उपहार, जो जिंदगी बदलने की ताकत रखता है-ज्ञान और किताबें। यह कहानी है मनपा की कतारगाम स्थित नगर प्राथमिक शिक्षा समिति की स्कूल नंबर 114 के शिक्षक नरेश मेहता की, जो पिछले 12 वर्षों से पढ़ाई छोड़ चुकी बेटियों को फिर से शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ रहे हैं।
नरेश मेहता उन बेटियों और बहनों को नि:शुल्क पढ़ाते हैं, जो किसी कारणवश दसवीं या बारहवीं की पढ़ाई बीच में छोड़ देती हैं और बोर्ड परीक्षा नहीं दे पातीं। वे केवल पढ़ाई ही नहीं कराते, बल्कि परीक्षा की तैयारी के लिए जरूरी किताबें और अध्ययन सामग्री भी अपनी ओर से उपलब्ध कराते हैं। उनके इस सेवा कार्य का 13वां वर्ष चल रहा है।
0- जिन बेटियों को पढ़ाया, वे हर साल राखी बांधने लौटती हैं
नरेश मेहता की इस पहल से पढ़कर अपने पैरों पर खड़ी हुई 300 से ज्यादा बेटियां आज भी उन्हें अपना भाई मानती हैं। रक्षाबंधन आते ही ये बहनें उन्हें राखी बांधने पहुंचती हैं। इस बार भी बड़ी संख्या में बहनें कतार में खड़ी होकर कार्यक्रम में शामिल हुईं और राखी बांधकर शिक्षक के प्रति आभार जताया।
0- बहनों को रिटर्न गिफ्ट में मिलीं किताबें
कार्यक्रम को ‘रक्षाबंधन से शिक्षाबंधन’ नाम दिया गया। खास बात यह रही कि नरेश मेहता ने बहनों को कोई महंगा या भौतिक उपहार देने के बजाय किताबें भेंट कीं। उनका संदेश साफ था कि रिश्ते को सिर्फ राखी तक सीमित रखने के बजाय शिक्षा से जोड़कर भविष्य मजबूत किया जाए।
0- 12 साल से जारी है शिक्षा की यह मुहिम
नरेश मेहता पिछले 12 वर्षों से बिना किसी शुल्क के बेटियों की पढ़ाई जारी रखने में मदद कर रहे हैं। कई ऐसी छात्राएं, जो परिस्थितियों के कारण पढ़ाई छोड़ने की कगार पर थीं, उनकी मदद से बोर्ड परीक्षा तक पहुंचीं और आगे बढ़ीं। इसी कारण रक्षाबंधन का यह आयोजन अब उनके लिए महज त्योहार नहीं, बल्कि शिक्षा और आत्मनिर्भरता के रिश्ते का प्रतीक बन गया है।