
Public Ka Panna : जयपुर शहर में विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच तमाम परेशानियां आज भी बरकरार हैं। रोड लाइट बंद, पेयजल कनेक्शन का इंतजार, सीवरेज की समस्या, सड़क जैसी तमाम समस्याओं के बीच शहरवासियों ने अपनी उपलब्धियां भी पत्रिका से साझा की हैं। पत्रिका के Public Ka Panna पर जनता का विश्वास लगातार कायम हो रहा है। इस बार जयपुर के चार 'असली हीरो' की उपलब्धियों के बारे में भी जानें।
जयपुर. दिल्ली में आयोजित केवीएस आर्चरी नेशनल टूर्नामेंट में जयपुर रीजन का प्रतिनिधित्व करते हुए केंद्रीय विद्यालय 3 की छात्रा प्रिया शर्मा ने स्वर्ण पदक जीता। प्रिया ने कंपाउंड वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रथम स्थान हासिल किया। प्रिया अपने कोच अर्जुन यादव के मार्गदर्शन में आगामी प्रतियोगिताओं की तैयारी पूरे मेहनत और अनुशासन से कर रही हैं।
पिंक सिटी के नाम से मशहूर जयपुर के अभिनेता और फिल्म निर्माता राहुल सूद की डॉक्यूमेंट्री फिल्म 'शाहराह- द रॉयल रूट' ने हाल ही आयोजित 11वें दुर्गापुर इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल-2026 में डॉक्यूमेंट्री कैटेगरी में प्रथम पुरस्कार जीता है। कोलकाता में आयोजित इस फेस्टिवल में करीब 100 चयनित फिल्मों का प्रदर्शन हुआ।
राहुल सूद ने बताया कि इस डॉक्यूमेंट्री को तैयार करने में करीब आठ वर्ष लगे। गहन शोध और भौतिक सर्वेक्षण के जरिए आमेर से अजमेर तक के करीब 450 वर्ष पुराने मुगल कालीन व्यापार मार्ग को खोजा। इस मार्ग पर 49 कोस मीनारें बनाई गई थीं, जिनमें से अब 30 कोस मीनारें और तीन सराय मौजूद हैं।
गोनेर. स्थानीय निवासी पीयूष शर्मा ने यूजीसी नेट जेआरएफ जून-2026 की परीक्षा योग विषय से पहले ही प्रयास में अच्छे नंबरों से पास कर इतिहास रच दिया। उन्होंने 300 में से 270 अंक हासिल कर ऑल इंडिया पहली रैंक हासिल की है। पीयूष ने तैयारी के दौरान न तो सोशल मीडिया से दूरी बनाई और न ही दिनचर्या में कोई बड़ा बदलाव किया। उनका मानना है कि सफलता के लिए सबसे आवश्यक है ‘निरंतरता’। सही रणनीति और समय के प्रबंधन के साथ तैयारी की जाए तो यूजीसी नेट की परीक्षा में सफल होना आसान है।
जयपुर. अस्पताल की भीड़ में जब किसी मरीज के साथ उसका अपना कोई नहीं होता, तब एसएमएस अस्पताल के वरिष्ठ नर्सिंग ऑफिसर बलदेव चौधरी उसका सहारा बन जाते हैं। वर्ष 2000 से अब तक वे ऐसे करीब 15 हजार मरीजों की देखभाल कर चुके हैं। अस्पताल में लावारिस मरीज के भर्ती होने की सूचना मिलते ही वे उसकी मदद में जुट जाते हैं। इलाज के दौरान भोजन, कपड़े और अन्य जरूरतों का इंतजाम करने के साथ स्वस्थ होने पर उसे घर या सुरक्षित ठिकाने तक भी पहुंचाते हैं।
इसके लिए बलदेव ने वर्ष 2012 में संजीवनी सेवा समिति का गठन किया। इसके माध्यम से वे अब तक सैकड़ों मरीजों को उनके परिजन से मिलवा चुके हैं और हर महीने 8 से 10 मरीजों को ‘अपना घर’ की धर्मशाला तक पहुंचाते हैं।