
जयपुर। राजस्थान पुलिस के सात अधिकारियों ने अनुसंधान के क्षेत्र में अपनी कार्यकुशलता और पेशेवर दक्षता से राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने वर्ष 2026 के लिए केंद्रीय गृह मंत्री दक्षता पदक की घोषणा की है। इसमें राजस्थान के छह आईपीएस और एक आरपीएस अधिकारी को शामिल किया गया है। सभी सातों अधिकारियों का चयन उत्कृष्ट अनुसंधान श्रेणी में हुआ है। सम्मानित होने वालों में आईपीएस अनुष्ठा कालिया, कांबले शरण गोपीनाथ, अजेय सिंह राठौड़, मनीष कुमार, जतिन जैन और रोशन मीणा के साथ आरपीएस अधिकारी प्रेम कुमार शामिल हैं।
इन अधिकारियों को अपराधों की जांच, साक्ष्यों के विश्लेषण और प्रभावी अनुसंधान के क्षेत्र में किए गए उल्लेखनीय कार्यों के लिए चुना गया है। खास बात यह है कि आरपीएस प्रेम कुमार को झालावाड़ में तैनाती के दौरान साइबर अपराध के खिलाफ चलाए गए अभियान में महत्वपूर्ण सफलता हासिल करने के लिए यह सम्मान मिलेगा।
आरपीएस प्रेम कुमार ने झालावाड़ जिले में भवानीमंडी वृत्ताधिकारी के पद पर रहते हुए ऑपरेशन शटरडाउन का नेतृत्व किया था। इस अभियान के तहत पुलिस ने बड़े साइबर फ्रॉड नेटवर्क का खुलासा करते हुए करोड़ों रुपए के घोटाले का पर्दाफाश किया था। साइबर अपराधियों के नेटवर्क को उजागर करने और मामले के अनुसंधान में उनकी भूमिका को इस राष्ट्रीय सम्मान के लिए महत्वपूर्ण माना गया है। प्रेम कुमार चौधरी की वर्तमान तैनाती राजस्थान पुलिस अकादमी जयपुर में सहायक निदेशक (इनडोर)/डीएसपी लीव रिजर्व के पद पर है। अगस्त 2026 में हुए पुलिस विभाग के तबादलों में उन्हें भवानीमंडी से जयपुर भेजा गया था। इससे पहले प्रशिक्षण काल में उनकी पोस्टिंग बीकानेर में भी रही है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से जारी घोषणा के अनुसार, इस वर्ष देश के 26 राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और केंद्रीय पुलिस संगठनों के कुल 490 अधिकारियों एवं कर्मचारियों को दक्षता पदक के लिए चुना गया है। इनमें 358 को विशेष अभियान, 123 को उत्कृष्ट अनुसंधान और नौ को फॉरेंसिक साइंस के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया जाएगा।
केंद्रीय गृह मंत्री दक्षता पदक की शुरुआत गृह मंत्रालय ने 1 फरवरी 2024 को की थी। इसके तहत विशेष अभियान, अनुसंधान, आसूचना और फॉरेंसिक विज्ञान के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले पुलिसकर्मियों और विशेषज्ञों को सम्मानित किया जाता है। इसका उद्देश्य पुलिस बलों में पेशेवर दक्षता को बढ़ावा देना और बेहतर कार्य करने वाले कर्मियों का मनोबल बढ़ाना है। इसकी घोषणा प्रतिवर्ष 31 अक्टूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर की जाती है।