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Rajasthan News: भजनलाल सरकार का एक और बड़ा एक्शन, IAS शिखर अग्रवाल के बाद IPS पत्नी प्रशाखा माथुर पर भी गाज, जानिए बड़ी वजह

IAS Shikhar Agrawal & IPS Prashakha Mathur Controversy: राजस्थान में प्रशासनिक महकमे से बड़ी खबर। वरिष्ठ आईएएस शिखर अग्रवाल के बाद उनकी पत्नी, आईपीएस अधिकारी डॉ. प्रशाखा माथुर को भी कार्मिक विभाग ने किया APO।
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जयपुर

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Nakul Devarshi

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Updated: 31 Oct 2026, 2:14 PM IST

rajasthan government apo senior ips prashakha mathur after ias shikar agrawal

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राजस्थान की भजनलाल सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ ज़ीरो टॉलरेंस की नीति लगातार जारी है। हाल के दिनों में सुर्ख़ियों पर बने हुए एक हाई-प्रोफ़ाइल मामले में सख्त कार्रवाई का सिलसिला जारी है। इसी क्रम में एक निजी कंपनी से कथित तौर पर कम कीमत पर बड़े पैमाने पर कॉटेज और लक्जरी विला खरीदने और फिर उसी कंपनी को भारी-भरकम राशि पर लीज पर देने के मामले में एक के बाद एक दूसरी बड़ी कार्रवाई हुई है। इस मामले के खुलासे के बाद सवालों के घेरे में आये भारतीय प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी आईएएस शिखर अग्रवाल के बाद अब उनकी पत्नी वरिष्ठ आईपीएस अफसर डॉ. प्रशाखा माथुर (1995 बैच) पर भी आगाज गिर गई है। सरकार के कार्मिक विभाग ने शनिवार को एक आदेश जारी करते हुए उन्हें APO (अवेटिंग पोस्टिंग ऑर्डर / पदस्थापन आदेशों की प्रतीक्षा में) कर दिया है। बता दें प्रशाखा माथुर वर्तमान में पुलिस मुख्यालय (PHQ) में एडीजी पुलिस (कल्याण) के पद पर तैनात थीं। इस हाई-प्रोफाइल अधिकारी दंपती पर हुई लगातार प्रशासनिक कार्रवाइयों से प्रदेश की सियासत और नौकरशाही में हड़कंप मच गया है।

देखें आईपीएस डॉ प्रशाखा के APO आदेश

दो दिन पहले ही IAS शिखर अग्रवाल हुए थे एपीओ

क्या है पूरा मामला और क्यों घिरे हैं अधिकारी दंपती?

सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह पूरा विवाद एक निजी कंपनी से कथित तौर पर कम कीमत पर बड़े पैमाने पर कॉटेज और लक्जरी विला खरीदने और फिर उसी कंपनी को भारी-भरकम राशि पर लीज पर देने के मामलों से जुड़ा हुआ है।

आरोप है कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान इस दंपती, उनके बेटों और अन्य परिजनों के नाम पर अलवर के अजबगढ़ और उदयपुर के बुझड़ा में करीब 40 लक्जरी विला और कॉटेज खरीदे गए थे।

इस मामले में हाल ही में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) द्वारा प्रिलिमिनरी इंक्वायरी (PE) दर्ज किए जाने और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं के संकेत मिलने के बाद सरकार ने सख्त रुख अपनाया है।

इन 40 विला और कॉट्रेजों में से कुछ संपत्तियां आईपीएस प्रशाखा माथुर के नाम पर भी संयुक्त रूप से या व्यक्तिगत तौर पर होने की चर्चा है, इसलिए प्रशासनिक गलियारों में यह कयास लगाए जा रहे थे कि इस मामले की जांच का दायरा अब उन तक भी पहुंच सकता है।

कार्मिक विभाग ने जारी किए आदेश

राज्य सरकार के कार्मिक विभाग द्वारा जारी ताजा आदेश के बाद डॉ. प्रशाखा माथुर को पुलिस मुख्यालय में उनके वर्तमान दायित्वों से मुक्त कर दिया गया है। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच और आगे की कानूनी व विभागीय समीक्षा को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है।

पति-पत्नी दोनों शीर्ष अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों के खिलाफ एक साथ इस तरह की प्रशासनिक कार्रवाई राजस्थान के प्रशासनिक इतिहास में एक बड़ा और दुर्लभ घटनाक्रम माना जा रहा है। फिलहाल, मामले से जुड़े सभी दस्तावेजों, संपत्तियों के ब्योरे और वित्तीय लेन-देन की गहन जांच किए जाने की संभावना जताई जा रही है।