
शिखर अग्रवाल। फोटो: पत्रिका
जयपुर। विला खरीद प्रकरण सुर्खियों में आने के बाद एपीओ किए गए अतिरिक्त मुख्य सचिव शिखर अग्रवाल के कार्यकाल का एक और मामला सामने आया है। मामला रणथम्भौर बाघ परियोजना क्षेत्र में फार्म हाउस के लिए भू-रूपान्तरण से जुड़ा है, जिसमें रणथम्भौर के उप वन संरक्षक ने राज्य सरकार के मार्गदर्शन का हवाला देकर सवाई माधोपुर के नगर सुधार न्यास को लिखा कि निजी आवासीय प्रयोजन के लिए भू-रूपान्तरण किया जा सकता है। रणथम्भौर बाघ परियोजना के उप वन संरक्षक एवं उप क्षेत्र निदेशक (प्रथम) ने एक नवम्बर 2023 को सवाई माधोपुर नगर सुधार न्यास को पत्र लिखा।
इसमें कहा कि राजस्थान सरकार ने जून 2023 में स्पष्ट किया कि निजी आवासीय प्रयोजन के लिए भू-रूपांतरण किया जा सकता है। प्रतिबंध केवल वाणिज्यिक एवं औद्योगिक गतिविधियों को लेकर ही है। खैरदा निवासी प्रेमचंद पुत्र प्रहलाद रैगर ने फॉर्म हाउस के लिए भू-रूपान्तरण की अनुमति मांगी थी, जिस पर उप वन संरक्षक ने 2022 के नगर सुधार न्यास के पत्र का हवाला देकर यह सूचना दी। इसमें कहा कि प्रेमचंद ने अपनी आलनपुर स्थित खातेदारी भूमि के फॉर्म हाउस की अनुमति मांगी है, जो रणथम्भौर टाइगर रिजर्व क्षेत्र में शामिल है।
इधर, एसीबी ने आईएएस अधिकारी शिखर अग्रवाल के खिलाफ पद का दुरुपयोग कर निजी कंपनी गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड को लाभ पहुंचाने व परिजन के नाम कम कीमत पर रिसॉर्ट में विला खरीदने के आरोपों की जांच शुरू कर दी है। इसके लिए राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत जांच की अनुमति दे दी है। प्रारंभिक जांच के अनुसार, शिखर अग्रवाल ने उदयपुर कलक्टर, राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अध्यक्ष और अतिरिक्त मुख्य सचिव, उद्योग सहित महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए कंपनी के निदेशकों से कथित मिलीभगत की। आरोप है कि कंपनी को रिसॉर्ट निर्माण की शर्तों में छूट, जरूरी प्रमाण-पत्रों की जांच के बिना स्वीकृतियां और विशेष रियायती आर्थिक पैकेज दिलवाया गया। इससे राज्य सरकार को भारी आर्थिक नुकसान होने की आशंका है।
जांच में उदयपुर के बुझड़ा स्थित अनंता रिसॉर्ट में मार्च 2026 में अग्रवाल और उनकी पत्नी के नाम पर 10-10 विला खरीदे जाने की जानकारी सामने आई है। इनकी कीमत 15-15 लाख रुपए बताई गई है। वहीं, अलवर जिले के अजबगढ़ स्थित अनंता रिसॉर्ट में अग्रवाल और उनकी पत्नी के नाम पर आठ विला 16.5-16.5 लाख रुपए में, दोनों बेटों के नाम पर चार विला करीब 15-15 लाख रुपए में और सास-ससुर के नाम पर चार विला 16.5-16.5 लाख रुपए में खरीदे जाने की जानकारी मिली है। एसीबी के अनुसार, ये कीमतें बाजार मूल्य से काफी कम थीं।
राजस्थान पत्रिका में 29 अक्टूबर को खुलासा किया कि वित्त विभाग ने कंपनी को 27 मार्च 2026 को विशेष रियायती आर्थिक पैकेज जारी किया और इसी दिन अग्रवाल की ओर से 20 विला की रजिस्ट्री हुई। इन तथ्यों के आधार पर एसीबी अब अग्रवाल, कंपनी के निदेशकों और अन्य संबंधित लोगों की भूमिका की जांच करेगी। साथ ही खुद और परिजनों के नाम कथित आय से अधिक संपत्तियां अर्जित करने के पहलू की भी पड़ताल होगी।
Updated on:
31 Oct 2026, 7:22 AM IST
Published on:
31 Oct 2026, 7:22 AM IST
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