हाल ही में उपचुनावों के नतीजों से लोगों का मिजाज तो सरकार ने समझ ही लिया है।
जयपुर। हाल ही में उपचुनावों के नतीजों से लोगों का मिजाज तो सरकार ने समझ ही लिया है। नौकरी नहीं मिलना, कोई भर्ती नहीं निकलने से प्रदेश में जो बेरोजगारी बढ़ी है, उससे न केवल युवाओं में तो जबरदस्त नाराजगी है ही, इसके साथ-साथ आम जनता भी सरकार से खफा दिकाई दे रही है। एेसे में मुख्यमंत्री के पास इस बार का बजट ही है, जो उनके ब्रहमास्त्र का काम कर सकता है। हालांकि राजस्थान लोक सेवा आयोग की नजर से एेसा कुछ भी नहीं हुआ, जिससे लोगों को राहत मिल सके। इस बार के बजट से युवाओँ को उम्मीद है कि बंपर भर्तियों की घोषणा होगी औऱ युवाओं को बड़ेपदों पर आसीन होने का मौका मिल सकेगा।
सरकार की दुविधा
सरकार अगर चाहे, तो भी उसे कई मुसीबतों का सामना करना पड़ेगा। भर्तियों के मामले में सरकार पूरी तरह से राजस्थान लोक सेवा आयोग पर निर्भर है। अब अगर हम आयोग के नजरिये से देखें तो भतियों में आयु सीमा बढ़ाने पर फैसला हुआ है।
एमबीसी आरक्षण को लेकर कार्मिक विभाग आदेश जारी कर चुका है, लेकिन पुरानी सहित कई नई भर्तियां अटकी हुई हैं। कई अटकी हुई भर्तियों और परिणाम जारी करने को लेकर आयोग को तकनीकी निर्णय लेने हैं।
राजस्थान लोक सेवा आयोग को आरएएस एवं अधीनस्थ सेवा भर्ती परीक्षा-2017, द्वितीय श्रेणी शिक्षक सहित संस्कृत शिक्षा, कृषि, पुस्तकालय और अन्य विभागों के लिए भर्ती परीक्षाएं करानी हैं। प्रदेश में विशेष पिछड़ा वर्ग को नौकरियों और दाखिलों में 1 प्रतिशत आरक्षण दिया जाना है।
कार्मिक विभाग इसके आदेश जारी कर चुका है। सरकार ने दिसम्बर 2017 में 1.40 लाख भर्तियां करने की घोषणा की थी। इनमें कई भर्तियां आयोग और कई राजस्थान अधीनस्थ एवं मंत्रालयिक सेवा चयन बोर्ड स्तर पर होनी हैं। सबसे अहम भर्तियां राजस्थान लोक सेवा आयोग के पास हैं।
निबटना होगा आरक्षण मामले से
आयोग को गुर्जर सहित चार जातियों को अतिरिक्त पिछड़ा वर्ग वर्ग (एसबीसी) में 1 फीसदी आरक्षण के मामले में भी फैसला लेना है। कार्मिक विभाग की मानें तो वह इसकी अधिसूचना जारी कर चुका है। आयोग को इसके आधार पर अटके हुए परिणाम और नई भर्तियों के विज्ञापन जारी करने हैं। तकनीकी पहलुओं पर विचार किए बिना आयोग फैसला नहीं ले सकता है।
आरएएस-2017 की भर्ती सबसे अहम
आयोग के लिए आरएएस एवं अधीनस्थ सेवा भर्ती परीक्षा-2017 सबसे अहम है। इसमें करीब 750 पदों पर भर्ती होनी है। साल 2012 के बाद हुई आएरएएस एवं अधीनस्थ सेवा भर्ती परीक्षाएं आयोग सहित अभ्यर्थियों के लिए सिरदर्द साबित हुई हैं। इनमें 2013 की परीक्षा ने सरकार, आयोग और अभ्यर्थियों को सर्वाधिक परेशान किया।
2016 की परीक्षा में भी एसबीएसी और जाट आरक्षण मामले को लेकर पेंच फंसे। काफी मशक्कत के बाद आयोग साक्षात्कार और अंतिम परिणाम जारी कर पाया। कार्मिक विभाग से आयोग को आरएएस एवं अधीनस्थ सेवा भर्ती परीक्षा-2017 की जिम्मेदारी मिल चुकी है। अब उसे बढ़ी हुई उम्र सीमा और आरक्षण मामले से निबटना होगा।
1-राजस्थान लोक सेवा आयोग ने वर्ष 2008 से 2013 तक निकाली भर्तियां
-शिक्षक ग्रेड तृतीय 2008 (1358)
-पीटीआऐई ग्रेड द्वितीय 2008 (230)
कॉलेज व्याख्याता भर्ती-2010 (456)
यूनानी-होम्योपैथी चिकित्साधिकारी-2011 (67)
प्रधानाचार्य भर्ती परीक्षा-2011(2093)
सहायक आचार्य रेडियोथैरेपी भर्ती-2011 (48)
सहायक आचार्य भर्ती-2011
(चिकित्सा विभाग)-55
चिकित्सा विभाग वरिष्ठ प्रदर्शक भर्ती-2011 (122)
कनिष्ठ लिपिक भर्ती परीक्षा -2011 (380)
जनसंपर्क अधिकारी (सूचना एवं जनसंपर्क विभाग)-2011 (6)
सांख्यिकी अधिकारी भर्ती परीक्षा-2011 (183 पद)
कृषि अनुसंधान अधिकारी-2011 (23 पद)
सहायक जनसंपर्क अधिकारी (सूचना एवं जनंसपर्क विभाग)-2011 (6)
आरएएस एवं अधीनस्थ सेवा भर्ती परीक्षा-2012 (1106)
सांख्यिकी अधिकारी (आयोजना विभाग)-2012 (25)
वरिष्ठ अध्यापक भर्ती परीक्षा (प्रारंभिक)-2013 (9124)
एनालिस्ट कम कंप्यूटर प्रोग्राम (एसीपी) 2013 (173)
2013 से 2017 तक भर्तियां
आरएएएस एवं अधीनस्थ भर्ती-2013 (990 पद)
वरिष्ठ प्रदर्शक (चिकित्सा शिक्षा विभाग)-2014 (196)
कृषि अनुसंधान अधिकारी (राजस्थान कृषि अधीनस्थ सेवा)-2014 (94)
प्रवक्ता (तकनीकी शिक्षा विभाग)-2014 (343)
सहायक लोक अभियोजक ग्रेड द्वितीय भर्ती-2015 (272)
सहायक लोक अभियोजक भर्ती (सहरिया क्षेत्र)-2015 (19)
प्राध्यापक स्कूल शिक्षा भर्ती-2015 (12 हजार)
वरिष्ठ अध्यापक विशेष शिक्षा भर्ती-2015 (211)
सहायक कृषि अधिकारी (कृषि विभाग)-2015 (257)
राजस्थान विधि, खान एवं भू विज्ञान, कृषि और नगर नियोजन विभाग में भर्ती-2015 (83)
आरएएस एवं अधीनस्थ भर्ती-2016 (725 पद)
वरिष्ठ अध्यापक माध्यमिक शिक्षा विभाग भर्ती-2016-17 (22)
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2013 से 2017 तक पदवार आए आवेदन
आरपीएससी के अनुसार करीब 90 लाख से ज्यादा (विभिन्न भर्तियों में) आवेदन प्राप्त हुए हैं।
भर्तियों का यह है सरकार का दावा......
भाजपा सरकार ने वर्ष 2013 में चुनाव घोषणा पत्र बनाया था। इसमें प्रदेश में 15 लाख लोगों को नौकरियां देने बात शामिल की गई थी। राज्य सरकार की मानें तो इसमें वर्ष 2013 से 2017 तक आरपीएससी के माध्यम से करीब 2.50 लाख भर्तियां हो चुकी हैं। इसके अलावा निजी और अन्य क्षेत्रों में भी रोजगार सृजन हुआ है। लघु, मध्यम एवं सूक्ष्म उद्योग, उद्यमिता और कौशल विकास और अन्य विभागों के जरिए भी भर्तियां हुई हंैं।
यूं गठित होता है आरपीएससी
नियमानुसार आरपीएससी में एक अध्यक्ष और सात सदस्य होते हैं। आरपीएससी में वर्ष 2014 में तत्कालीन अध्यक्ष हबीब गौरान के इस्तीफा देने के बाद स्थाई अध्यक्ष पद रिक्त हो गया। इस दौरान आयोग के वरिष्ठ सदस्य डॉ. आर. डी. सैनी ने अतिरिक्त कार्यभार संभाला। 10 जुलाई 2015 को सरकार ने डॉ. ललित. के. पंवार को आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया। उनका कार्यकाल 10 जुलाई 2017 को खत्म होने पर सरकार ने आयोग के सदस्य श्याम सुंदर शर्मा को अध्यक्ष नियुक्त किया। शर्मा का कार्यकाल 28 सितम्बर 2017 को खत्म हो गया। इसके बाद से आयोग में ढाई महीने स्थाई अध्यक्ष का पद खाली रहा। सरकार ने 18 दिसम्बर 2017 को डॉ. राधेश्याम गर्ग को अध्यक्ष नियुक्त किया।