
जयपुर। राज्य में शनिवार को विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने से ठीक पहले मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने किसानों के लिए बड़ी घोषणा करते हुए 13 लाख किसानों के बिजली बिल में सब्सिडी देने का फैसला किया। इसके ठीक बाद ऊर्जा विभाग का आदेश भी बाहर आ गया, जिस पर 5 अक्टूबर की तिथि अंकित थी। इसमें सामान्य श्रेणी के किसानों के बिल राशि में 833 रुपए (प्रति माह) राज्य सरकार वहन करेगी। सब्सिडी 1 नवंबर से से प्रभावी होगी।
अजमेर में हुई प्रधानमंत्री की सभा में मुख्यमंत्री ने यह घोषणा की। उधर, कांग्रेस ने सरकार के इस आदेश और उसके जारी होने के समय पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि भाजपा चुनाव आयोग से भी ऊपर हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि आचार संहिता लागू होने के एक घंटे पहले घोषणा का क्या मतलब रह गया। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट ने कहा, सैकड़ों किसानों को मरने के लिए मजबूर कर चुकी मुख्यमंत्री की यह घोषणा सिर्फ थोथा दावा है।
इस फैसले के तहत सरकार हर किसान के बिजली बिल में से सालाना अधिकतम 10 हजार रुपए का पुनर्भरण करेगी। यह राशि बैंक खाते में सब्सिडी के रूप में आएगी। चिह्नित 13 लाख में से 5-6 लाख किसानों को तो बिजली पूरी तरह मुफ्त मिलेगी। इससे सरकार पर सालाना 1300 करोड़ रुपए तक भार बढ़ेगा।
यों मिलेगा फायदा
- सभी चिह्नित किसानों को बिल जमा कराना होगा। फिर सब्सिडी राशि पुनर्भरण के रूप में बैंक खाते में आएगी। इसमें वे किसान भी शामिल होंगे, जिनका प्रतिमाह बिल 833 रुपए या इससे कम आ रहा है।
- राज्य में सब्सिडी के दायरे में आने वाले 13 लाख सामान्य कृषि कनेक्शन उपभोक्ताओं (नए कनेक्शन भी होंगे) में 5 लाख ऐसे भी हैं जिनका मासिक बिल 833 रुपए से कम आता है। सरकार ने अधिकतम 833 रुपए मासिक सब्सिडी देने का फैसला किया है। इससे हर माह 41.65 करोड़ रुपए और सालाना 499.80 करोड़ रुपए का आर्थिक भार आएगा।
- लगभग 8 लाख कृषि उपभोक्ता ऐसे हैं, जिनका मासिक बिल 833 रुपए से ज्यादा आता है। इन्हें बिल राशि तो पूरी जमा करानी होगी लेकिन बाद में 833 रुपए बैंक खाते में सब्सिडी के रूप में आएंगे। इससे सरकार पर 800 करोड़ रुपए सालाना भार पड़ेगा।
आदेश एक दिन पहले का, बाहर आया आचार संहिता से ठीक पहले
ऊर्जा विभाग के इस आदेश में तिथि 5 अक्टूबर अंकित है लेकिन इसका खुलासा चुनाव आचार संहिता लागू होने से ठीक पहले हुआ।
बैंक खातों की जानकारी जुटाना चुनौती
सब्सिडी राशि बैंक खाते में आएगी लेकिन इसकी प्रक्रिया स्पष्ट नहीं की गई है। अब नवम्बर का बिल दिसम्बर में आ जाएगा, तब तक बैंक खातों की जानकारी जुटाना और यह प्रक्रिया पूरी करना चुनौती ही होगा।
—सरकार के इस फैसले से करीब 13 लाख किसानों को राहत मिलेगी। करीब ५ लाख किसान उपभोक्ताओं का बिजली बिल तो पूरी तरह नि:शुल्क हो जाएगा। अनुदान राशि सब्सिडी के रूप में बैंक खाते में जमा होगी। राशि भेजने की प्रक्रिया सरकार के स्तर पर ही होगी।
आरजी गुप्ता, अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक, राजस्थान डिस्कॉम्स
ये उठ रहे सवाल
फैसला पहले हो चुका था और आदेश भी 5 अक्टूबर को निकल गए तो इसे तब ही सार्वजनिक क्यों नहीं कर दिया गया?
सरकार ने आखिरी वक्त पर ही यह राहत क्यों दी, पहले क्यों नहीं?
सरकार पहले ही किसानों की बिल राशि में सालाना 9500 करोड़ रुपए वहन कर रही है। अब 1200 करोड़ का अतिरिक्त भार आएगा, इस चुनौती से कैसे निपटा जाएगा?