जयपुर

PM Modi Rajasthan Visit : ‘एपस्टीन से भी बड़ी है उदयपुर फाइल्स’, प्रधानमंत्री दौरे से ऐन पहले कांग्रेस का ‘बड़ा धमाका’

एक तरफ जहां अजमेर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भव्य स्वागत और 16,686 करोड़ रुपये की सौगातों का 'काउंटडाउन' शुरू हो चुका है, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष ने 'फाइलों' की राजनीति के जरिए सरकार की घेराबंदी तेज कर दी है। Congress ने 'उदयपुर फाइल्स' का मुद्दा उछालकर राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है।

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Feb 28, 2026

जयपुर/अजमेर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कुछ ही देर में राजस्थान की धरती पर कदम रखने वाले हैं, लेकिन उनके आने से ऐन पहले कांग्रेस ने एक ऐसा दांव खेला है जिसने सत्तापक्ष को रक्षात्मक मुद्रा में ला दिया है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने 'उदयपुर फाइल्स' का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि यह मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित 'एपस्टीन फाइल' से भी बड़ा और गंभीर है। जूली ने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को चुनौती देते हुए इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

'दिल्ली से सीधा IG को फोन': जूली का सनसनीखेज दावा

टीकाराम जूली ने विधानसभा में बोलते हुए आरोप लगाया कि उदयपुर के एक हाई-प्रोफाइल मामले में जयपुर (प्रदेश मुख्यालय) को अंधेरे में रखकर सीधा दिल्ली से हस्तक्षेप किया गया। उन्होंने कहा:

  • सीधा हस्तक्षेप: "मुख्यमंत्री जी, आपको तो पता ही नहीं है कि क्या हो रहा है। दिल्ली से सीधा उदयपुर आईजी को फोन जाता है, जबकि जयपुर को इसकी खबर तक नहीं होती।"
  • जांच पर सवाल: जूली ने पूछा कि आखिर ऐसा कौन सा दबाव है कि जांच की कमान दूसरे सर्कल के डीएसपी को सौंप दी गई और स्थानीय अधिकारियों को दरकिनार किया गया?

'उदयपुर फाइल्स' का सच क्या है? आरोपी और पीड़ित पर खुलासे

नेता प्रतिपक्ष ने मामले को 'बीजेपी बनाम बीजेपी' बताते हुए कई गंभीर आरोप लगाए:

  • दोनों पक्ष बीजेपी के: जूली ने दावा किया कि जिस महिला ने आरोप लगाए हैं (पीड़िता) और जिस पर आरोप हैं (आरोपी), दोनों का संबंध भारतीय जनता पार्टी से है।
  • आधी रात का 'एक्शन': उन्होंने आरोप लगाया कि रात 11 बजे रिपोर्ट दर्ज होती है, 2 बजे पुलिस रेकी करती है और 3 बजे हथौड़े लेकर बीजेपी कार्यकर्ताओं के साथ बिना लेडीज पुलिस के किसी के घर का दरवाजा तोड़कर गिरफ्तारी की जाती है।

'CCTV और मोबाइल का राज कहाँ है?'

कांग्रेस नेता ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस डिजिटल युग में सबूतों को सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा है?

  • गायब DVR और मोबाइल: जूली ने पूछा कि जो सीसीटीवी फुटेज (DVR) और मोबाइल पुलिस ने जब्त किए थे, वे अब कहाँ हैं?
  • साक्ष्य अपलोड न होना: उन्होंने कहा कि पुलिस को अपनी हर कार्रवाई उसी समय पोर्टल पर अपलोड करनी होती है, लेकिन इस मामले में ऐसा क्यों नहीं हुआ? क्या सरकार किसी सच को दबाना चाहती है?

'सदन की मर्यादा न होती, तो परतें खोल देता'

टीकाराम जूली ने बेहद कड़े शब्दों में कहा कि उनके पास 'उदयपुर फाइल' के इतने सबूत हैं कि अगर वे परतें खोलना शुरू करें, तो कई रसूखदार चेहरे बेनकाब हो जाएंगे। उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की कि वे 'सच्चाई का साथ देना चाहते हैं, तो उन्हें इस प्रकरण में शामिल अपने ही दल के लोगों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।

मोदी के दौरे पर 'सियासी छाया'

प्रधानमंत्री अजमेर में विकास की नई इबारत लिखने आ रहे हैं, लेकिन विपक्ष द्वारा उठाए गए इस मुद्दे ने राज्य की कानून-व्यवस्था और 'दिल्ली बनाम जयपुर' के सत्ता समीकरणों पर नई बहस छेड़ दी है। कांग्रेस का यह 'उदयपुर फाइल्स' कार्ड ऐसे समय में आया है जब बीजेपी उत्सव के माहौल में है।

Published on:
28 Feb 2026 09:45 am
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