
जयपुर। किसान कर्जमाफी के बाद बेरोजगारी भत्ता कांग्रेस की दूसरी बड़ी चुनावी घोषणा है। इसे पूरा करने को राज्य सरकार को हर साल एक से डेढ़ अरब रुपए का अतिरिक्त इंतजाम करना होगा।
बेरोजगारी भत्ता लगातार चार बार से चुनावी मुद्दा है और जुलाई 2007 में यह लागू भी हो चुका है। परन्तु बेरोजगारों को मिलने वाली राशि नाराजगी का बड़ा कारण रही है, इसी को देखते हुए कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दलों ने इस बार विधानसभा चुनाव में इसकी दरों में 7 से 10 गुणा तक बढ़ोतरी का वादा किया। कांग्रेस के घोषणा पत्र के हिसाब से अब बेरोजगारी भत्ता बढ़कर 3500 रुपए प्रतिमाह तक हो जाएगा, जबकि वर्तमान में पुरुषों को 650 रुपए और महिला व नि:शक्तजनों को 750 रुपए प्रतिमाह भत्ता दिया जा रहा है।
अब तक इनको मिलता है भत्ता
प्रदेश में वर्तमान में अक्षत योजना के तहत स्नातक या उससे अधिक पढ़े-लिखे बेरोजगार को भत्ता दिया जा रहा है, जिसके लिए परिवार की अधिकतम आय दो लाख रुपए सालाना से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। इस योजना के तहत दो साल तक 21 से 35 वर्ष तक के युवाओं को प्रतिमाह 650 से 750 रुपए दिए जा रहे हैं, जबकि अप्रेल 2017 तक महिला-पुरुषों के लिए 500 रुपए व नि:शक्तजनों के लिए 600 रुपए प्रतिमाह का भुगतान किया जाता था। 2012 से पहले तक पुरुषों के लिए 500 के बजाय 400 रुपए प्रतिमाह ही भत्ता दिया जाता था और केवल अधिकतम एक लाख रुपए सालाना आय वाले परिवार के युवकों को ही इसका लाभ मिलता था।
पंजाब में एक घर से एक को ही भत्ता
पंजाब में भी कांग्रेस सरकार ने बेरोजगारी भत्ते के लिए योजना लागू कर रखी है, जिसे हर घर केप्टन योजना नाम दिया गया है। इसके तहत 2500 रुपए प्रतिमाह भत्ता दिया जा रहा है, जो अधिकतम तीन साल तक मिल सकता है। राजस्थान की ही तरह मध्यप्रदेश में भी किसानों की कर्जमाफी का वादा किया है और वहां इसके लिए पंजाब मॉडल अपनाने की चर्चा है, ऐसे में राजस्थान में बेरोजगारी भत्ता के लिए पंजाब की योजना को मॉडल माना जाता है तो एक घर से एक ही युवा को भत्ता दिया जाएगा। वहां 10 वीं पास को भी यह भत्ता दिया जा रहा है।
हर माह 69444 कार्मिकों के वेतन जितनी होगी राशि
सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2017-18 में प्रदेश में 46701 युवाओं को बेरोजगारी भत्ता दिया गया। इन युवाओं को कुल 24.09 करोड़ रुपए दिए गए। दिसम्बर 2013 से जून 2018 तक 146437 युवाओं को 113.91 करोड़ रुपए भत्ता दिया गया। वर्तमान में 650 से 750 रुपए प्रतिमाह भत्ता दिया जा रहा है, ऐसे में कांग्रेस घोषणा पत्र लागू होने पर यह राशि करीब 5 गुणा अधिकतम 3500 रुपए प्रतिमाह हो जाएगी। इसके हिसाब से अनुमानित खर्च करीब सवा अरब रुपए पहुंच सकता है, जो 69444 कर्मचारियों को न्यूनतम 18 हजार रुपए के हिसाब से एक माह के वेतन के समान है।
यहां भी दिया जाता है बेरोजगारी भत्ता
राजस्थान के साथ ही मध्यप्रदेश, पंजाब, हरियाणा, बिहार व उत्तरप्रदेश राज्यों में भी बेरोजगारी भत्ता दिया जाता है। इसके तहत मप्र व बिहार में 12 वीं कक्षा, उत्तरप्रदेश में अधिकतम 36 हजार रुपए सालाना आय वालों को भत्ता देने का प्रावधान है।
2013 में दो लाख करोड़ रुपए कर्ज दिया जाता था, जो अब तीन लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। पांच साल बाद यह आंकड़ा चार लाख करोड़ रुपए पहुंच जाएगा। प्रदेश की वित्तीय स्थिति पहले से ही कमजोर है, अब कल्याणकारी योजनाओं के विस्तार के साथ आय के स्रोत नहीं बढ़ाए तो प्रदेश का आर्थिक ढांचा और बिगडऩे के पूरे आसार हैं। प्रदेश को हालात को देखते हुए राजस्थान नीति आयोग का तुरन्त गठन करना चाहिए।
-एल एन नाथूरामका, वरिष्ठ अर्थशास्त्री