
जयपुर। देश में अभी विधानसभा चुनाव का माहौल चरम पर है। इसका बाद शुरू होगा लोकसभा चुनाव का काउंटडाउन। ऐसे में विधानसभा चुनाव वर्तमान सांसदों के लिए अग्नि परीक्षा साबित होगी। सांसदों की राजनीतिक जमीन का हाल बताएंगे विधानसभा चुनाव के नतीजे। राजस्थान पत्रिका ने विधानसभा चुनाव में प्रदेश के सभी 25 लोकसभा सांसदों की सक्रियता की पड़ताल की। कई ‘माननीय’ जी-जान से लगे हुए हैं, तो कुछ को इस चुनाव से कोई सरोकार नहीं। कुछ स्थानों पर तो ऐसा भी मिला जहां सांसद खुद ही विधानसभा चुनाव लडऩे के लिए मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं। आज बता रहे हैं जयपुर, करौली-धौलपुर, अलवर और भरतपुर के सांसदों का हाल...
जयपुर : रामचरण बोहरा (भाजपा)
- अब लगा रहे हैं कार्यक्रमों में हाजिरी
- 66.95 प्रतिशत वोट बोहरा को मिले
संगठन की बैठकों में कभी-कभार दिखने वाले बोहरा अब पार्टी और सामाजिक कार्यक्रमों में हाजिरी लगा रहे हैं। बताया जा रहा है कि सांसद बोहरा सांगानेर विधानसभा सीट से मुकाबले में उतरने के इच्छुक हैं। उपलब्धि के नाम पर जयपुर को स्मार्ट सिटी योजना में शामिल करवाना है, लेकिन यह काम भी अधूरा पड़ा है। भाजपा लहर में बोहरा ने 2014 में कांग्रेस के महेश जोशी को करीब पांच लाख वोटों से हराया था। आठों विधानसभा क्षेत्रों में बोहरा ने बढ़त बनाई थी। उधर, महेश जोशी भी क्षेत्र में बराबर से सक्रिय हैं और किशनपोल से दावेदारी जता रहे हैं।
करौली-धौलपुर: डॉ. मनोज राजोरिया (भाजपा)
- पत्नी के लिए टिकट के प्रयास में
- 47.89 प्रतिशत वोट राजोरिया को मिले
सांसद डॉ. मनोज राजौरिया चुनाव की घोषणा के बाद से सक्रिय हैं। चर्चा है कि वह अपनी पत्नी को बसेड़ी या हिण्डौन से टिकट दिलाने के लिए प्रयासरत हैं। राजोरिया ने कांग्रेस के लक्खीराम बैरवा को करीब 27 हजार वोटों से हराया था। धौलपुर में केंद्रीय विद्यालय खुलवाना उनकी प्रमुख उपलब्धि है। जबकि करौली-धौलपुर रेल परियोजना के काम बंद किए जाने के मामले में वे आरोपों के घेरे में भी हैं। इधर, कांग्रेस प्रत्याशी रहे लक्खीराम कभी कभार किसी बैठक में ही नजर आते हैं।
भरतपुर: बहादुर सिंह कोली (भाजपा)
- वैर से चुनाव लडऩे को आतुर
- 47.89 प्रतिशत वोट राजोरिया को मिले
सांसद डॉ. मनोज राजौरिया चुनाव की घोषणा के बाद से सक्रिय हैं। चर्चा है कि वह अपनी पत्नी को बसेड़ी या हिण्डौन से टिकट दिलाने के लिए प्रयासरत हैं। राजोरिया ने कांग्रेस के लक्खीराम बैरवा को करीब 27 हजार वोटों से हराया था। धौलपुर में केंद्रीय विद्यालय खुलवाना उनकी प्रमुख उपलब्धि है। जबकि करौली-धौलपुर रेल परियोजना के काम बंद किए जाने के मामले में वे आरोपों के घेरे में भी हैं। इधर, कांग्रेस प्रत्याशी रहे लक्खीराम कभी कभार किसी बैठक में ही नजर आते हैं।
भरतपुर: बहादुर सिंह कोली (भाजपा)
वैर से चुनाव लडऩे को आतुर
60.57 प्रतिशत वोट कोली को मिले
सांसद बहादुर सिंह कोली इन दिनों अपने पुराने वैर विधानसभा क्षेत्र में खासे सक्रिय हैं। सांसद कोली ने पार्टी के आला पदाधिकारियों को पत्र लिख वैर से चुनाव लडऩे की इच्छा जताई है। हालांकि इसके लिए उन्हें पार्टी में चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। कोली वैर से 2008 एवं 2013 में विधायक रहे। लोकसभा चुनाव 2014 में कोली ने कांग्रेस के डॉ.सुरेश यादव को करीब 2.66 लाख से अधिक मतों से अंतर से पराजित किया था। कोली के सांसद बनने से रिक्त हुई वैर विधानसभा सीट पर उपचुनाव में कांग्रेस के भजनलाल जाटव ने जीत हासिल की थी।
अलवर: डॉ.करणसिंह यादव (कांग्रेस)
मुंडावर से उतार सकती है पार्टी मैदान में
57.73 प्रतिशत वोट यादव को मिले
जनवरी 2018 में हुए उपचुनाव में डॉ.करणसिंह यादव ने जीत दर्ज की। जिम्मेदारी और बड़ी है, जीत का सिलसिला बनाए रखना होगा। डॉ. यादव भी चुनावी मोड में हैं। लगातार टिकट के दावेदारों से मिल रहे हैं। जयपुर में चयन समिति एवं चुनाव प्रचार समिति की बैठक में शामिल हुए। चर्चा है कांग्रेस उन्हें मुंडावर से मैदान में उतार सकती है। यादव 1.96 लाख मतों से जीते थे। लोकसभा उपचुनाव में यादव के प्रतिद्वंदी और बहरोड़ विधायक डॉ. जसवंत यादव भी अपने विधानसभा क्षेत्र में व्यस्त हैं। जसवंत अपने पुत्र को विधानसभा चुनाव लड़ाने की तैयारी कर चुके हैं।