
जयपुर: राज्य सरकार ने समझाइश से मुकदमों का निस्तारण करने के लिए नियुक्त मध्यस्थों का मानदेय तीन हजार से बढ़ाकर सात हजार रुपए प्रति केस कर दिया है। सरकार ने हाईकोर्ट की मध्यस्थ एवं सुलह प्रोजेक्ट कमेटी की ओर से तीन साल पहले भेजे गए प्रस्ताव पर यह निर्णय किया है।
राज्य सरकार की ओर से जारी आदेश के अनुसार, मध्यस्थ को अब सफल निस्तारण पर सात हजार रुपए प्रति केस एवं उससे जुड़े प्रत्येक केस के लिए एक हजार रुपए अतिरिक्त दिए जाएंगे। यह राशि अधिकतम नौ हजार रुपए तक हो सकेगी। इसके अलावा मध्यस्थ के केस का निपटारा कराने में विफल रहने पर भी उसके प्रयास की मेहनत के रूप में तीन हजार रुपए का भुगतान किया जाएगा।
राजस्थान पत्रिका ने कमेटी की सिफारिश ठंडे बस्ते में डाल दिए जाने को लेकर तीन जुलाई को केस 5 हजार में दायर, 3 हजार में सरकार करवा रही निपटारा शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया।
समाचार में कहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सहित देशभर में मीडिएशन के माध्यम से अदालतों में केस कम करने का अभियान शुरू किया है, लेकिन राज्य सरकार मीडिएशन को प्रभावी बनाने के लिए मध्यस्थों का मानदेय बढ़ाने की सिफारिश पर तीन साल से निर्णय नहीं कर रही है।