
भाई—बहन और घूमने का उत्साह
घूमने जाने की बात हो और बच्चों में उत्साह न हो। हो ही नहीं सकता। घूमनेभर के नाम पर ही बच्चों का मन दुनिया के जाने कौन—कौनसे कोनों में घूम आता है। उनकी आंखों की पुतलियां चमक उठती हैं। बैग पैक करने की जल्दबाजी में वे अपना सारा सामान समेट लेना चाहते हैं। इसी घूमने पर परिवार परिशिष्ट के 19 अगस्त के अंक में एक चित्र दिया गया और बच्चों को कहानी लिखने को कहा गया। देशभर से बच्चों की कई कहानियां मिलीं। चुनिंदा बच्चों की कहानियां परिवार परिशिष्ट के पेज चार पर लगाई गई और शेष यहां दी जा रही हैं। सभी बच्चे कहानियां लिखते रहें। हमारी कोशिश यही है कि वे सीखना और लिखना कभी न छोड़ें।
यात्रा की खुशी
अजलीन फातिमा अंसारी, 8 वर्ष
गर्मियों की छुट्टियां शुरू होते ही राहुल, रीता और उनका छोटा भाई सोनू बहुत खुश थे। इस बार उनके माता-पिता ने उन्हें नानी के घर ले जाने का वादा किया था। सुबह से ही घर में पैकिंग की तैयारियां चल रही थीं। रीता और राहुल ने मिलकर अपने सारे कपड़े दो बड़े सूटकेस में बंद किए। जैसे ही टैक्सी आने का समय हुआ दोनों भाई-बहनों ने भारी सूटकेस उठाए और बाहर की तरफ चल दिए। सूटकेस थोड़े भारी थे, लेकिन नानी के घर जाने का उत्साह इतना ज्यादा था कि उन्हें कोई थकान महसूस नहीं हो रही थी। सोनू सबसे छोटा था, इसलिए वह सामान तो नहीं उठा सकता था। वह दौड़कर राहुल के कंधों पर बैठ गया और हाथ हिलाकर खुशी से चिल्लाने लगा। रीता आगे चलते हुए हाथ के इशारे से रास्ता दिखा रही थी और सोनू को संभाल रही थी। तीनों बच्चे हंसते-गाते हुए घर से बाहर निकले। उनके चेहरों पर नानी के घर जाकर आम खाने, नदी में नहाने और ढेर सारी मस्ती करने की खुशी साफ चमक रही थी। उनका यह सफर बहुत ही मजेदार और यादगार होने वाला था।
परिवार के साथ पहाड़ों की सैर
रिद्धिमा पंवार, 11 वर्ष
गर्मी की छुट्टियों में हमारे परिवार ने दो-तीन दिनों के लिए पहाड़ों पर घूमने जाने का कार्यक्रम बनाया। हम सभी इस यात्रा को लेकर बहुत उत्साहित थे। पिताजी ने कार में हमारा सामान रखा और सुबह-सुबह हम पहाड़ों की ओर निकल पड़े। रास्ते में ऊंचे-ऊंचे पहाड़, घने पेड़, हरे-भरे जंगल और सुंदर घाटियां देखकर हम बहुत खुश हुए। पहाड़ों पर पहुंचकर हमने एक सुंदर होटल में कमरा लिया। वहां का मौसम बहुत सुहावना और ठंडा था। पहले दिन हम आसपास की प्राकृतिक सुंदरता देखने गए। हमने पहाड़ों पर घूमते हुए कई तस्वीरें खिंचवाईं और ठंडी हवा का आनंद लिया। शाम को परिवार के सभी सदस्यों ने मिलकर स्वादिष्ट खाना खाया। दूसरे दिन हम सुबह जल्दी उठे और पहाड़ी रास्ते पर घूमने निकले। रास्ते में हमें सुंदर फूल और हरियाली दिखाई दी। हम सभी ने मिलकर खूब मस्ती की। मेरे भाई-बहन ने रास्ते में खेलते हुए खूब आनंद लिया। शाम को हमने बैठकर चाय पी और पूरे दिन की बातें कीं। तीसरे दिन घर लौटने का समय आ गया। हम सभी का मन वापस आने का नहीं था। रास्ते में हमने पहाड़ों की सुंदर यादों को तस्वीरों में कैद किया। यह दो-तीन दिनों की यात्रा हमारे परिवार के लिए बहुत आनंददायक और यादगार रही। हमें समझ आया कि परिवार के साथ बिताया समय ही सबसे अनमोल होता है।
नानी के घर जाना है...
चार्वी शर्मा, 9 वर्ष
सुरभि और राहुल गर्मियों की छुट्टी का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। छुट्टियां शुरू होते ही मम्मी और पापा के साथ नाना—नानी के घर जाने की खुशी इतनी थी कि मत पूछो और नाना—नानी के यहां पहुंचते ही नानी के हाथों का खाना और उनकी कहानियां सुनने का मजा लेने के बारे में सोचकर ही खुश हो रहे थे। अब उनके रिजल्ट भी आने वाला था। उन्होंने मन लगा के पढ़ाई की थी। अब अपने घर जाने का समय आ चुका था। मन तो उनका नहीं हो रहा था, पर उनको पता है कि पढ़ाई भी बहुत जरूरी है। उनका रिजल्ट आया और दोनों के बहुत ही अच्छे नंबर से पास हुए।
नेकी का सफर
आराध्या पाटीदार, 7 वर्ष
एक दिन छुट्टियों में आरव अपने परिवार के साथ गांव जाने के लिए तैयार हुआ। उसकी छोटी बहन अनाया भी यात्रा को लेकर बहुत उत्साहित थी। दोनों ने मिलकर अपना सामान पैक किया और खुशी-खुशी घर से निकल पड़े। रास्ते में अचानक तेज बारिश होने लगी। तभी एक पेड़ के नीचे रुक गए। तभी आरव ने देखा कि पास में एक छोटा बच्चा बारिश में भीग रहा था। आरव ने अपना छाता उसे दे दिया और अनाया ने उसे अपना रुमाल दिया। माता-पिता ने दोनों बच्चों की खूब तारीफ की। थोड़ी देर बाद बारिश रुक गई और वे फिर अपनी यात्रा पर निकल पड़े। उस दिन दोनों ने सीखा कि सफर की खूबसूरत याद किसी की मदद करने से बनती है।
गर्मियों की छुट्टी
किंजल व्यास, 9 वर्ष
एक दिन सुहाना मौसम था जब रूही और उसका भाई ध्रुव वह दोनों अपने माता-पिता के साथ गर्मियों की छुट्टी बनाने दिल्ली घूमने गए थे। बहुत सी जगह भी घूमी जैसे इंडिया गेट, जंतर मंतर, पार्लियामेंट हाउस और इंदिरा गांधी का घर भी देखा। झटपट जैसे ट्रेन पकड़ी थी, दिल्ली आने के लिए वैसे ही झटपट ट्रेन पकड़ी घर जाने के लिए। इन दोनों दिनों में उन्होंने बहुत मजे भी किए और बहुत सी चीज देखी। उन दोनों की छुट्टी भी पूरी हो चुकी थी।
परिवार संग मंगलमय यात्रा
वेदांत अग्रवाल, 10 वर्ष
गर्मियों की छुट्टियां आने से पहले ही परिधि पराग ने मम्मी पापा के साथ मिलकर मनाली जाने का प्रोग्राम बनाया। अब जब टिकट्स बुक हो गए तो बच्चे जाने के लिए तैयारी को लेकर उत्साहित हो रहे थे। परिधि ने यात्रा के लिए कुछ किताबें, कुछ गेम्स जैसे सांप सीढ़ी, शतरंज आदि इकट्ठे किए। मम्मी ने रास्ते में खाने की सामग्री तैयार की जैसे बिस्किट्स, फल, जूस, पूरी, सब्जी आदि। पापा और पराग कपड़ों की पैकिंग करने लगे। यात्रा के लिए जरूरी दस्तावेज जैसे आधार कार्ड वगैरह सब रखें। मम्मी ने जरूरी दवाइयां भी रखी। परिधि कहने लगी मम्मा में ट्रेन में कॉमिक पढ़ूंगी। पराग बोला मम्मी ट्रेन में भेल भी बनाकर खाएंगे। यात्रा का दिन भी आ गया। ट्रेन शाम को 5:00 बजे थी। पापा ने ऑटो बुक किया। यात्रा का सामान लेकर परिधि और पराग मम्मी पापा के साथ एक खुशनुमा सफर के लिए निकल पड़े।
छुट्टियों में यात्रा
जयनाम डांगी, 12 वर्ष
गर्मी की छुट्टियां शुरू होते ही हमारे परिवार ने घूमने जाने का कार्यक्रम बनाया। हम सभी बहुत खुश थे। मम्मी ने हमारे कपड़े और जरूरी सामान बैग में रखे। पापा ने सूटकेस उठाए और हम सब यात्रा के लिए घर से निकल पड़े। रास्ते में हम सभी हंसते-बोलते हुए जा रहे थे। बच्चों ने अपने मोबाइल से तस्वीरें भी खींचीं। रास्ते में हरे-भरे पेड़, खेत और सुंदर प्राकृतिक दृश्य देखकर हमारा मन प्रसन्न हो गया। कुछ घंटों बाद हम अपनी मंजिल पर पहुंच गए। वहां पहुंचकर हमने सामान रखा और थोड़ा आराम किया। इसके बाद हम आसपास घूमने गए। हमने बहुत सारी सुंदर जगहें देखीं और परिवार के साथ खूब आनंद लिया।
शाम को हम वापस आए और सभी ने मिलकर खाना खाया। उस दिन हमने बहुत मस्ती की। यह यात्रा हमारे लिए बहुत यादगार रही। हमें समझ आया कि परिवार के साथ बिताया समय सबसे अनमोल होता है।
रेलवे स्टेशन की सैर
प्रसून पारीक, 9 वर्ष
प्रसून इस बार छुट्टियों में अपने माता-पिता के साथ और अपनी छोटी बहन लाली के साथ घूमने गया। दोनों भाई-बहन मम्मी—पापा के साथ माउंट आबू घूमने गए। माउंट आबू के ऊंचे ऊंचे पहाड़ हरे भरे जंगल मंदिर और अन्य दर्शनीय स्थल देखकर दोनों बहुत खुश हुए। माउंट आबू से लौटते वक्त दोनों ने खूब खरीददारी की। प्रसून ने कहा कि इस बार वह स्कूल में अपने दोस्तों को माउंट आबू की शहर की बात बताएगा।
एक दिन का महत्व
आरोही कश्यप, 12 वर्ष
एक दिन मान्या और उसका भाई विवान के स्कूल की छुट्टी के साथ-साथ मान्या के पिता की भी ऑफिस की छुट्टी थी। तभी मान्या और विवान ने अपने परिवार के साथ कहीं घूमने जाने का प्लान बनाया। सब खुश थे। मान्या की माता ने दो बड़े अटैची में सबके कपड़े, कुछ खिलौने और खाने का सामान रख लिया। सब तैयार होकर निकल पड़े। ठंडी हवाएं, साफ़-सुथरी सड़कें, परिवार का साथ और हंसी-मजाक माहौल को और भी खूबसूरत बना रहे थे। विवान अपने पिता के कंधों पर बैठकर खुली हवाओं का नजारा ले रहा था, उधर मान्या अपनी माता की उंगली पकड़कर झूमते हुए चल रही थी। सब खूब हंसी-मजाक कर रहे थे, ऐसा लग रहा था मानो जीवन का सारा सुख परिवार ही है। इसी बीच मान्या ने चुटकी लेते हुए कहा, काश ये छुट्टी रोज़ आती तो कितना मज़ा आता। यह सुनकर विवान और मान्या के माता-पिता ठहाका मारकर हंसने लगे। यह कहानी हमें सिखाती है कि इस व्यस्त ज़िन्दगी की व्यस्तता से दूर हटकर एक दिन परिवार के साथ जरूर बिताएं।
हमारी प्यारी यात्रा
ईवा गोस्वामी, 7 वर्ष
एक दिन की बात है। मैं अपने परिवार के साथ घूमने जाने के लिए बहुत उत्साहित था। हमारे साथ मम्मी, पापा, मेरी छोटी बहन और बड़ा भाई भी था। हमने अपने कपड़े और जरूरी सामान सूटकेस में रख लिए। सुबह-सुबह हम सब घर से निकल पड़े। मेरी छोटी बहन बहुत खुश थी। वह रास्ते में तरह-तरह की बातें कर रही थी। मेरा बड़ा भाई भी खुशी से उछल रहा था। मम्मी ने हम सबको संभालते हुए कहा— बच्चों, आराम से चलो और एक-दूसरे का ध्यान रखना। हमारे पास दो बड़े सूटकेस थे। पापा एक सूटकेस उठा रहे थे और मम्मी दूसरा संभाल रही थीं। हम सब एक-दूसरे की मदद कर रहे थे। रास्ते में हम हंसते और मजेदार बातें करते हुए जा रहे थे। मुझे अपने परिवार के साथ समय बिताना बहुत अच्छा लग रहा था। मुझे लगा कि परिवार के साथ घूमने का मजा ही अलग होता है। हम जहाँ भी जाते हैं, साथ मिलकर खुशियां बांटते हैं। उस दिन मैंने सीखा कि परिवार में अगर सभी एक-दूसरे की मदद करें, तो हर काम आसान और मजेदार बन जाता है। सच में, मेरा परिवार मेरी सबसे बड़ी खुशी है।
एकता और हौसला
लक्ष्य सोनी 10 साल
लक्ष्य और हिमांशी अपने मम्मी-पापा के साथ पहली बार उत्तराखंड के ऊंचे पहाड़ों पर घूमने गए। दोनों बच्चे बहुत उत्साहित थे। कठिन चढ़ाई और चुनौतीयात्रा के दूसरे दिन, परिवार ने एक ऊंचे पहाड़ी मंदिर तक पहुंचने के लिए पैदल ट्रेकिंग शुरू की। आधे रास्ते तक पहुंचते-पहुंचते मम्मी-पापा बहुत थक गए और बोले हमें यहीं से वापस लौट जाना चाहिए। लक्ष्य ने पापा का हाथ पकड़ा और कहा, "पापा, जब हम पढ़ाई में थक जाते हैं, तो आप ही हमें आगे बढ़ने की हिम्मत देते हो।हिमांशी ने मम्मी को पानी पिलाया, और कहा बस थोड़ी दूर और है मम्मी। बच्चों का निस्वार्थ प्यार देखकर मम्मी-पापा की थकान गायब हो गई। आखिरकार पूरा परिवार पहाड़ी की चोटी पर पहुंच गया। वहां से नीचे का नजारा अद्भुत था। बादलों के बीच खड़े होकर ऐसा लग रहा था मानो वे स्वर्ग में आ गए हों। मम्मी पापा ने बच्चों को गले लगाया और कहा— आज तुम दोनों ने हमें सिखाया कि अगर परिवार एक साथ मिलकर कदम बढ़ाए, तो दुनिया का सबसे ऊंचा पहाड़ भी छोटा पड़ जाता है।
मदद करने से ही बात बनती है
वैदेही कांडपाल, 9 वर्ष
एक दिन एक परिवार घूमने जा रहा था। सभी बहुत खुश थे और उनके पास सामान से भरे बैग थे। रास्ते में बच्चे खेलते और हंसते हुए चल रहे थे। बच्चों ने देखा कि उनके माता-पिता भारी सामान लेकर चल रहे हैं। उन्होंने तुरंत माता-पिता की मदद करने का फैसला किया। सभी ने मिलकर सामान उठाया और खुशी-खुशी आगे बढ़ने लगे। इससे बच्चों को समझ आया कि मेहनत और मिल-जुलकर काम करने से कठिन काम भी आसान हो जाता है। हमें हमेशा मेहनत करनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर दूसरों की मदद करनी चाहिए।
गर्मी की छुट्टी का मजा
समृद्धि शुक्ला, 12 वर्ष
गर्मियों की छुट्टी आने वाली थी। मैं बहुत दिनों से पापा को बाहर जाने के लिए कह रही थी, लेकिन ना तो ना पापा को छुट्टी मिल रही थी और मेरे भी पेपर चल रहे थे। मेरा भाई समर्थ भी बहुत दिनों से कहीं घूमने जाने को कह रहा था। आज मैं घर जाकर पापा को कहूंगी कि हमें कहीं घूमने लेकर जाए। फिर मैंने घर जाकर पापा को कहा कि पापा हम कहीं घूमने जाएंगे गर्मियों की छुट्टियों में लेकिन लेकिन मम्मी ने कहा कि नहीं हम घर पर ही रहेंगे। फिर मेरा भाई ने कहा नहीं घूमने जाना है, घूमने जाना है, ठीक है—ठीक है घूमने जाएंगे पर कहां, मम्मी ने कहा पापा बोले कोटा मम्मी बोली गुजरात और समर्थ बोला पास के पार्क में यह सुनकर सब हंसने लगे। सबने लास्ट में यह तय किया कि कोटा जाना चाहिए नानी के घर पर, समर्थ बोला हां मजा आएगा। मैं वहां बहुत खेलूंगा और बहुत मजा करूंगा। मैं भी बहुत खुश थी और आखिर में हम सब घूमने के लिए गर्मियों की छुट्टी के शुरू होने के कुछ दिन बाद कोटा के लिए निकल गए।
Updated on:
26 Aug 2026 10:21 am
Published on:
26 Aug 2026 10:17 am
