
Maharashtra Language Row : क्या है महाराष्ट्र का भाषा विवाद, PC- Chatgpt
महाराष्ट्र में एक बार फिर भाषा और क्षेत्रीय पहचान का मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक बहस के केंद्र में आ गया है। इस बार विवाद की वजह राज्य सरकार का वह अभियान है, जिसके तहत ऑटो-रिक्शा, टैक्सी और ऐप-आधारित कैब चालकों के लिए मराठी भाषा का कार्यात्मक ज्ञान (Working Knowledge) जरूरी बताया गया है। इस नियम के खिलाफ मुंबई और आसपास के इलाकों में हजारों ऑटो और टैक्सी चालकों ने विरोध प्रदर्शन किया और तीन दिन की हड़ताल का ऐलान कर दिया।
महाराष्ट्र परिवहन विभाग पिछले कुछ समय से यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है कि सार्वजनिक परिवहन से जुड़े चालक मराठी भाषा का बुनियादी ज्ञान रखें। सरकार का तर्क है कि राज्य की आधिकारिक भाषा मराठी है और यात्रियों के साथ संवाद के लिए चालकों को कम से कम इतनी मराठी आनी चाहिए कि वे सामान्य बातचीत कर सकें।
इसी अभियान के तहत क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों (RTO) ने कई ऑटो और टैक्सी चालकों की भाषा संबंधी जांच शुरू की। जिन चालकों को पर्याप्त मराठी नहीं आती पाई गई, उन्हें नोटिस जारी किए गए। रिपोर्टों के अनुसार सैकड़ों चालकों को ऐसे नोटिस मिले हैं और उन्हें मराठी सीखने के लिए समय दिया गया है।
कई गैर-मराठी भाषी चालक, विशेषकर उत्तर प्रदेश, बिहार और अन्य राज्यों से आए लोग, इस नियम का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि वे वर्षों से मुंबई में काम कर रहे हैं और अचानक भाषा को लेकर सख्ती उनके रोजगार पर असर डाल सकती है।
प्रदर्शन कर रहे चालकों का आरोप है कि:
मुंबई के कांदिवली सहित कई इलाकों में चालकों ने सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया। कुछ जगहों पर यातायात भी प्रभावित हुआ।
परिवहन विभाग का कहना है कि चालकों को मराठी साहित्यकार बनने की जरूरत नहीं है। उनसे केवल इतनी अपेक्षा है कि वे यात्रियों से सामान्य संवाद कर सकें और प्रशासनिक निर्देश समझ सकें। नियम के तहत भाषा का बुनियादी ज्ञान न होने पर नोटिस दिया जाता है और सुधार का अवसर भी उपलब्ध कराया जाता है।
रिपोर्टों के अनुसार यदि कोई चालक निर्धारित समय के बाद भी नियमों का पालन नहीं करता, तो उसके बैज या परमिट पर कार्रवाई की जा सकती है।
महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक ने साफ कहा कि मराठी भाषा का सम्मान करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है और सार्वजनिक परिवहन से जुड़े लोगों को मराठी का बुनियादी ज्ञान होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का उद्देश्य किसी को परेशान करना नहीं बल्कि भाषा सीखने में मदद करना है।
विरोध बढ़ने के बाद सरनाइक ने कई राहतकारी कदमों की घोषणा की:
सरनाइक का कहना है कि सरकार का मकसद दंड देना नहीं बल्कि चालकों को भाषा सीखने में सहयोग देना है।
विवाद बढ़ने पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को भी सामने आना पड़ा। उन्होंने प्रदर्शन कर रहे चालकों को आश्वस्त करते हुए कहा कि किसी को मराठी का विशेषज्ञ बनने की जरूरत नहीं है। केवल कामकाज चलाने लायक मराठी जानना पर्याप्त है।
फडणवीस ने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य भाषा को बढ़ावा देना है, न कि किसी समुदाय या प्रदेश विशेष के लोगों को निशाना बनाना। उनके अनुसार महाराष्ट्र में काम करने वाले लोगों को स्थानीय भाषा का सम्मान करना चाहिए, लेकिन इसे लेकर अनावश्यक भय फैलाने की जरूरत नहीं है।
महाराष्ट्र में भाषा और "मराठी अस्मिता" का मुद्दा नया नहीं है। शिवसेना और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) जैसे दल लंबे समय से स्थानीय भाषा और स्थानीय लोगों के अधिकारों की राजनीति करते रहे हैं।
इस विवाद के बाद भी राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई। कुछ नेताओं ने इसे स्थानीय भाषा और संस्कृति की रक्षा का सवाल बताया, जबकि विपक्षी नेताओं ने इसे रोजगार और आजीविका से जुड़ा मुद्दा बताया।
एमएनएस ने भी गैर-मराठी भाषी चालकों को मराठी सीखने की सलाह देते हुए कड़ा रुख अपनाया, जिससे विवाद और अधिक चर्चा में आ गया।
भाषा नियम को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर करने की तैयारी भी हुई है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि भाषा को रोजगार से जोड़ने के कानूनी और संवैधानिक पहलुओं की जांच होनी चाहिए। अदालत में यह सवाल उठ सकता है कि राज्य किस सीमा तक किसी पेशे के लिए भाषा ज्ञान को अनिवार्य बना सकता है।
फिलहाल महाराष्ट्र सरकार सख्ती और सहूलियत के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है। एक तरफ मराठी भाषा को बढ़ावा देने का अभियान जारी है, वहीं दूसरी तरफ प्रशिक्षण केंद्र और हेल्पलाइन जैसी सुविधाएं देकर विरोध कम करने का प्रयास किया जा रहा है।
आने वाले दिनों में तीन बातें महत्वपूर्ण रहेंगी:
महाराष्ट्र का मौजूदा भाषा विवाद केवल मराठी सीखने या न सीखने का सवाल नहीं है। यह स्थानीय पहचान, रोजगार, प्रवासी श्रमिकों की भूमिका और क्षेत्रीय राजनीति से जुड़ा एक बड़ा मुद्दा बन चुका है। सरकार का कहना है कि केवल बुनियादी मराठी ज्ञान की अपेक्षा है, जबकि विरोध कर रहे चालक इसे अपने रोजगार पर अतिरिक्त दबाव मान रहे हैं। इसी टकराव ने ऑटो चालकों की हड़ताल और पूरे राज्य में भाषा को लेकर नई बहस को जन्म दिया है।
Updated on:
26 Aug 2026 09:24 am
Published on:
26 Aug 2026 09:24 am
