जयपुर

गौ-तस्करी केस में राजस्थान सरकार की बड़ी जीत, सुप्रीम कोर्ट ने हार्डकोर अपराधी की जमानत की रद्द; जानें मामला

Rajasthan News: सुप्रीम कोर्ट में राजस्थान सरकारी की बड़ी जीत हुई है। कोर्ट ने गौ-तस्करी के आरोपी नाज़िम खान को दी गई जमानत को रद्द कर दिया है।

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Apr 21, 2025
फाइल फोटो

Rajasthan News: सुप्रीम कोर्ट में राजस्थान सरकारी की बड़ी जीत हुई है। कोर्ट ने गौ-तस्करी के आरोपी नाज़िम खान को दी गई जमानत को रद्द कर दिया है। नाजिम खान एक हार्डकोर अपराधी है, जिसपर कई राज्यों में दर्जनों मुकदमे दर्ज हैं। बता दें, यह निर्णय राजस्थान सरकार की ओर से दायर पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई के बाद दिया गया, जिसमें सरकार ने आरोपी के आपराधिक इतिहास और गंभीर आरोपों की जानकारी सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दी थी।

क्या है गौ-तस्करी का ये मामला?

बताते चलें कि यह मामला एफआईआर संख्या 62/2021, थाना नादोती, जिला करौली में दर्ज हुआ था। दिनांक 13 फरवरी 2021 को पुलिस गश्ती दल ने संदिग्ध कंटेनर ट्रक (RJ05GA4026) को रोका, जिसमें 26 गायें, 3 बैल/बछड़े और एक मृत गाय अमानवीय अवस्था में पाई गईं।

इस ट्रक का मालिक नाजिम खान था जो मौके से फरार हो गया था। पुलिस ने सह-आरोपी कासिम और बिलाल को गिरफ्तार कर लिया। ट्रक को जब्त कर पशुओं को गोशाला भेजा गया। फिर इस मामले में राजस्थान गौवंश वध निषेध अधिनियम, 1995 और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 के तहत गंभीर धाराएं लगाई गईं।

जमानत कैसे मिली, फिर क्यों रद्द हुई?

सुप्रीम कोर्ट ने 21 अक्टूबर 2024 को नाज़िम खान को ज़मानत दे दी थी, लेकिन राज्य सरकार की ओर से कोई वकील पेश नहीं हुआ था, जिससे आरोपी को राहत मिल गई। इस चूक के चलते थाना नादोती के SHO को निलंबित कर दिया गया।

बाद में AAG शिवमंगल शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका (MA No. 2553/2024) दायर की, जिसमें आरोपी के लंबे आपराधिक इतिहास और फरारी के तथ्यों को विस्तार से रखा गया। सरकार ने तर्क दिया कि आरोपी लोक व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा है।

नाज़िम खान का आपराधिक इतिहास

राजस्थान के अलावा उत्तर प्रदेश में आरोपी के खिलाफ कम से कम 9 आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं, जिनमें से कई में गैंगस्टर एक्ट,आर्म्स एक्ट, गौवध कानून, धारा 307 (हत्या का प्रयास) लगाई गई हैं। पांच मामलों में उसे भगोड़ा घोषित किया जा चुका है और गैर-जमानती वारंट जारी हैं। वर्तमान मामले में भी वह तीन वर्षों तक फरार रहा और अंततः अप्रैल 2024 में अलीगढ़ जेल से गिरफ्तार किया गया।

सुप्रीम कोर्ट का ताजा आदेश

उस समय 21 फरवरी 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी को शपथपत्र दाखिल कर सभी आपराधिक मामलों का विवरण देने और संबंधित अदालतों में आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था। साथ ही, उत्तर प्रदेश राज्य को पक्षकार बनाकर उसके आपराधिक इतिहास की पुष्टि करने का आदेश दिया गया।

अब 21 अप्रैल 2025 को न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने आदेश दिया कि जमानत केवल तथ्यों के अभाव में दी गई थी। एक आदतन अपराधी को कानून के दायरे से बाहर रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती। ऐसे अपराधी समाज के लिए खतरा हैं।

Published on:
21 Apr 2025 06:35 pm
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