
Rajasthan High Court : राजस्थान हाईकोर्ट ने जयपुर शहर के वैशाली नगर, गांधी पथ (चित्रकूट एरिया, राजस्व ग्राम बीड़ खातीपुरा) की बेशकीमती 23 बीघा 8 बिस्वा जमीन के मामले में जयपुर विकास प्राधिकरण को झटका दिया है। हाईकोर्ट ने 31 साल पुराने विवाद में जेडीए की अपील को खारिज कर दिया। इसको लेकर जेडीए में अब तक कोई हलचल न होने से उसकी कार्यशैली सवालों के घेरे में आ गई है।
राजस्थान हाईकोर्ट ने जूथाराम व अन्य को इस जमीन का वैध मालिक मानते हुए उन्हें इस पर कब्जा बनाए रखने का हकदार माना है। अदालत ने वर्ष 2002 में सेटलमेंट कमेटी के आदेश के तहत जमा कराई गई राशि 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित लौटाने के निर्देश भी दिए हैं। इससे अब अधिग्रहित भूमि को अवाप्ति से मुक्त करना होगा।
सूत्रों के अनुसार मामले में समय रहते अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी नहीं किए जाने से जेडीए पर सवाल उठ रहे हैं। इस भूमि की वर्तमान बाजार कीमत 1000 करोड़ रुपए से अधिक आंकी जा रही है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस भूमि को चित्रकूट योजना के लिए अधिग्रहित बताया, वह आखिर जेडीए के अधिकार क्षेत्र से बाहर कैसे चली गई? यह मामला रोशन फार्म से जुड़ी जमीन का बताया जा रहा है।
कोर्ट के फैसले के बाद सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जिस भूमि को जेडीए वर्षों तक अपनी योजना का हिस्सा बताता रहा, उस पर न वास्तविक कब्जा लिया और न मुआवजा दिया गया। इसके अलावा अब तक आगे की कार्रवाई भी शुरू नहीं की। जबकि, तत्कालीन जिला कलक्टर ने फरवरी, 2015 को कथित लोगों का नामांतरण निरस्त कर जमीन जेडीए के नाम दर्ज कर दी थी, लेकिन जेडीए ने इस जमीन पर तत्काल कब्जा लेने की बजाय पड़ोस की 37 बीघा जमीन पर फोकस किया। इसके बाद खातेदारों को कानूनी प्रक्रिया अपनाने का मौका मिल गया।
1- यूएलसी के तहत की गई कार्रवाई समाप्त मानी।
2- भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई भी कानूनन समाप्त (लैप्स) हो चुकी है, क्योंकि जेडीए ने समय रहते कब्जा नहीं लिया।
3- जूथाराम को भूमि का कब्जाधारी मानते हुए जेडीए का अधिकार नहीं माना।
4- 2002 में नियमितीकरण को लेकर जमा राशि 1.45 करोड़ की राशि ब्याज सहित लौटाने के आदेश।
1- वर्षों तक स्वामित्व को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं की गई।
2- 2002 में सेटलमेंट कमेटी से राशि जमा कराने के बाद भी मामला लंबित रखा गया।
3- अदालत में जेडीए, यूएलसी कार्रवाई से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण निष्कर्षों को समय रहते चुनौती भी नहीं दे सकी।
1- भूमि का गैर-कृषि उपयोग करने के लिए नियमानुसार रूपांतरण कराना होगा।
2- यदि कहीं अवैध निर्माण, अतिक्रमण या बिना अनुमति कन्वर्जन हुआ है तो जेडीए कार्रवाई कर सकती है।
1- जमीन पर पहले शहरी भूमि सीलिंग कानून (यूएलसी) के तहत कार्रवाई हुई। बाद में चित्रकूट योजना के लिए भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 के तहत अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू की गई।
2- भूमि मालिकों का दावा था कि न तो कब्जा लिया गया और न ही मुआवजा दिया गया।