
जयपुर/पत्रिका न्यूज़ नेटवर्क। Rajasthan Highcourt : राजस्थान हाईकोर्ट ने धरना-प्रदर्शन व रैली को लेकर कहा कि यातायात संभालना हमारा काम नहीं है, यह तो अफसरों को ही करना पड़ेगा। कोर्ट ने पूर्व में आदेश दे रखे हैं, राज्य सरकार इनकी पालना की स्थिति के बारे में जानकारी पेश करे। साथ ही कहा कि गृह विभाग के सचिव स्तर के अधिकारी को नोडल अधिकारी नियुक्त कर पूर्व के आदेशों को समाहित करते हुए दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि इन आदेशों की पालना सुनिश्चित हो सके। अब सुनवाई 21 अगस्त को होगी।
न्यायाधीश एमएम श्रीवास्तव और न्यायाधीश प्रवीर भटनागर की खंडपीठ ने स्वप्रेरणा से दर्ज याचिका पर सुनवाई के दौरान गुरुवार को यह आदेश दिया। न्यायाधीश समीर जैन ने बुधवार को भाजपा के सचिवालय घेराव के दौरान राजधानी में यातायात व्यवस्था बिगड़ने पर प्रसंज्ञान लिया था।
सुनवाई के दौरान गुरुवार को पुलिस उपायुक्त (दक्षिण) योगेश गोयल और पुलिस उपायुक्त (ट्रैफिक) प्रहलाद कृष्णिया हाजिर हुए। कोर्ट ने कहा कि वर्ष 2016 से अब तक कोर्ट ने धरने, प्रदर्शन और रैली के कारण ट्रैफिक जाम को लेकर बार-बार निर्देश दिए, लेकिन अधिकारियों को उनकी जानकारी ही नहीं है। कोर्ट जनहित में स्वप्रेरणा से प्रसंज्ञान लेकर निर्देश देती है, लेकिन अधिकारी उस बिन्दु पर पूर्व के आदेशों के बारे में कोर्ट को जानकारी ही नहीं देते हैं। या तो पालन करो... कोर्ट ने कहा कि पूर्व में जो आदेश दे रखे हैं सरकार या तो उनको चुनौती दे या उनकी पालना कराए।
कोर्ट ने डीसीपी गोयल से पूछे सवाल
धरने, प्रदर्शन व रैली के लिए किस परिपत्र या आदेश के आधार पर अनुमति दी जाती है?
क्या सरकारी परिपत्र के आधार पर अनुमति दी जाती है? अदालती आदेश का पालन होता है?
हाईकोर्ट ने पूर्व में यह आदेश दिए
जयपुर की शहरी सीमा में रैली और जुलूस आदि के आयोजन पर रोक लगाई। तब सरकार ने कहा था, प्रदर्शनकारियों की संख्या के आधार पर कलक्टर कार्यालय के बाहर, विद्याधर नगर, और मानसरोवर में धरना-प्रदर्शन व रैली की अनुमति दी जाएगी।
सुबह और शाम कार्यालय समय के वक्त धरना-प्रदर्शन-रैली के लिए अंबेडकर सर्कल के पास रास्ता नहीं रोका जाए। अमरूदों के बाग के पास किसी सभा या मेले के आयोजन की अनुमति भी नहीं। सूचना-प्रौद्योगिकी विभाग के कार्यक्रम के समय जेएलएन मार्ग बंद करने पर आपत्ति जताई, तो पुलिस ने तत्काल रास्ता खोला।